
Photo Credits: IAS Sreedhanya Suresh On Social Media
Kozhikode: संघर्ष से भरा जीवन जीने में भी मजा है। क्योंकि इस संघर्ष के बाद जो सफलता मिलती है उसकी कहानी दुनिया के मुंह से सुनने में जो आनंद आता उसके अनुभव की बात ही अलग है। हमारे समाज में गरीबी एक बहुत बड़ी बीमारी है। परंतु जिसके जीवन में अभाव नही होता, उसे सफलता का कोई लालच नहीं होता। जब तक लालच न हो तो लोगो का सफलता पाने का कोई उद्देश्य ही नहीं होता।
किसी महान हस्ती से कहते सुना है की लोगो की तड़प सफलता के लिए ऐसी होनी चाहिए, जैसे एक मछली पानी के लिए तड़पती है तब सफलता मिल पाती है। जैसा की आप जानते है की कामयाबी गरीब और अमीर में फर्क नहीं करती, उसे तो केवल मेहनती और लगनसार विद्यार्थी चाहिए है।
देश के हर राज्य में PCS की परीक्षा आयोजित होती है। हर वर्ष हजारों युवा राज्य IAS के लिए चयनित होते हैं। परंतु अचंभब की बात तो ये होती है की एक गरीब का बच्चा किस तरह इस परीक्षा में सफल हो जाता है जबकि उस बच्चे ने अपना सारा जीवन अभाव में बीता दिया है।
आपको बता दें कि लक्ष्य को पाने की तैयारी अपने कम्फर्ट जोन से निकल कर की जाती है। जरूरी नहीं होता की हम किसी नामचीन संस्था से ट्यूशन ले जब ही हम किसी परीक्षा के लिए तैयार हो सकते है। चाहे कितनी भी ट्यूशन कर ले विद्यार्थी आखिर में Self-Study से ही जीत हासिल करता है, आज की कहानी भी एक ऐसी आदिवासी बेटी की सफलता की है, जिसके पिता मजदूर थे।
श्रीधन्या के सक्सेस की कहानी
आईएएस श्रीधन्या सुरेश (IAS Sreedhanya Suresh) जो केरल राज्य के वायनाड (Wayanad) जिले के अंतर्गत आने वाले पोजुथाना गाँव की निवासी है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गाँव के सरकारी स्कूल से की। इसके बाद वे केरल के सेंट जोसेफ कॉलेज से जूलॉजी विषय से कॉलेज की पढ़ाई कर डिग्री प्राप्त की।
फिर ग्रेजुएशन के बाद श्रीधन्या ने कोझीकोड (Kozhikode) जिले के कालीकट विश्वविद्यालय से मास्र्ट्स किया। पढ़ाई पूरी कर श्रीधन्या ने केरल में ही अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में क्लर्क के पद पर प्राइवेट नौकरी की। साथ ही वे कुछ दिनों के लिए वायनाड में आदिवासी हॉस्टल में एक वार्डन के पद पर भी काम कर चुकी है।
मजदूरी की पिता ने और बेटी ने यूपीएससी (UPSC) की तैयारी
श्रीधन्या सुरेश के पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं। जो दिन भर काम करके अपने परिवार को चला रहे है। श्रीधनया का गांव पोज़ुथाना केरल के सबसे गरीब क्षेत्र में से एक है। वे तीन भाई-बहन है और पिता का व्यवसाय बाजार में धनुष बाण बेचना है, जिससे वे अपना घर चलाते है।
Sreedhanya Suresh IAS is the first tribal girl from Kerala to crack civil services and joined as Assistant Collector in Kozhikode. My heartiest congratulations to the young IAS officer. Her success is a proud moment for all of us. # pic.twitter.com/lRADO7CFxO
— कुश आंबेडकरवादी (کش) (@Kush_voice) May 6, 2020
स्नातक तथा स्नाकोत्तर की डिग्री पूर्ण कर श्रीधन्या यूपीएससी की तैयारी करने के लिए एक आईएएस अधिकारी (IAS Officer) से प्रेरित हुई और स्वयं तैयारी के लिए विचार बनाया। इसके बाद उन्होंने अपनी यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ कर दी। पहला तथा दुसरा प्रयास उनका विसफल रहा। परंतु उन्होंने हार नही मानी।वे लगातार अपनी तैयारी करती रही।
तीसरी बार में सफल हुई और केरल के पहली महिला अधिकारी बनी
2 बार असफलता मिलने के बाद उनके हौसले और बुलंद हो गए और उन्होंने अपनी पढ़ाई की चाल को और तेज कर दिया। फलस्वरूप उन्होंने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर ली। वर्ष 2018 में वे आईएएस ऑफिसर बन गई।
Congratulations to Sreedhanya Suresh IAS, who has been appointed as Calicut Assistant Collector.
Last year, Sreedhanya became the first person from Kerala’s Kurichiya tribal community to crack the civil services exam.
This is a historic moment. അഭിനന്ദനങ്ങള്. pic.twitter.com/NN1REPs34z
— Advaid അദ്വൈത് (@Advaidism) May 5, 2020
410 वी रैंक हासिल कर ऑफिसर लिस्ट में श्रीधन्य ने अपना नाम दर्ज किया। वे UPSC की परीक्षा पास करने के साथ ही श्रीधन्या केरल राज्य की पहली आदिवासी महिला आईएएस अधिकारी (Kerala’s First Woman Tribal IAS Officer) बनीं। वर्तमान में वे कोझीकोड जिला कलेक्टर के रुप में पदस्थ है।
माता पिता का अभिमान है श्रीधन्या
श्रीधन्या ने कभी भी हार नही मानी। घर की परिस्थियो के आगे वे कभी नहीं झुकी और लगातार प्रयास करती रही। अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने आज सफलता प्राप्त कर अपने माता पिता और अपने समाज का नाम रोशन कर दिखाया। वे अपने माता पिता का गौरव बन गई है। उनकी सफलता ने यूपीएससी की तैयारी कर रहे कई उम्मीदवारों का हौसले बढ़ा दिए है।



