पिता स्कूल में चपरासी, माँ ने दुकान खोलकर पढ़ाया, कड़ी मेहनत कर बेटी बनी IPS ऑफिसर

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2025
IPS Dr Vishakha Bhadane
Success and Struggle Story of IPS Dr Vishakha Bhadane. How a peon daughter Vishakha Bhadane became IPS Officer. IPS crack inspirational story.

Delhi: किसी ने सच ही कहा है अगर जिंदगी में कुछ पाने के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयास की जाए तो मंजिल मिल ही जाती है। सफलता केवल मेहनत की मोहताज होती है। अगर आपमें सच्ची लगन और मेहनत करने का जज़्बा है, तो कामयाबी एक दिन आपके क़दम ज़रूर चूमेगी। व्यक्ति अपनी मेहनत और जोश के दम पर बड़ा से बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है।

आज कल अधिकतर देखा जा रहा है कि कॉम्पटेटिव एग्जाम्स की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स अक्सर एक या दो बार असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं। वह अपना हौसला खो बैठते हैं, उन्हें ये लगने लगता है कि अगर वह सफल न हुए तो जिंदगी में क्या कर सकेंगे। उन्हें आगे का रास्ता नहीं समझ आता है।

ऐसे कई उदाहरण आपको आए दिन देखने को मिलेंगे, जिन्होंने तमाम अभावों के बावजूद अपनी मेहनत के बल पर सफलता हासिल की है। अपनी सफलता की कहानी (Success Story) की श्रंखला में आज हम आपको ऐसे ही व्यक्तित्व के बारे में बताएंगे। आर्थिक तंगी और सुविधाओं की कमी के बावजूद वे आईपीएस रैंक के अधिकारी बनने में सफल रहे। हम बात कर रहे हैं 2018 बैच की IPS ऑफिसर डॉ विशाखा भड़ाने (IPS Dr Vishakha Bhadane) की। जिन्होंने अपनी सफलता के आगे अपनी गरीबी को आने नहीं दिया।

कौन हैं डॉ विशाखा

डॉक्टर विशाखा नासिक की रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम अशोक भडाने है, जो नासिक (Nasik) के एक छोटे से स्कूल में चपरासी का काम करते हैं। परिवार में विशाखा (Vishakha Bhadane) दो बहनों और एक भाई और मां के साथ रहती थी। घर में सबसे छोटा होने के बावजूद सबसे मेहनती कार्यकर्ता था। परिवार की गरीबी इतनी अधिक थी कि पिता की आय से घर का खर्चा नहीं चल पाता था। माँ ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए कुछ काम का सोचा। जिससे घर खर्च में तोड़ी मदद हो सके। इसके लिए माँ ने एक छोटी सी दुकान खोली।

माता-पिता ने बढ़ाया हौसला

माता-पिता चाहते थे कि बच्चे खूब पढ़-लिखकर अपने जीवन में बड़ी कामयाबी को छुये। यही कारण है कि आर्थिक तंगी होने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिता अपनी नौकरी से अधिक नहीं कमा सकते थे, इसलिए माँ ने बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक हेल्प के रूप में काम करने का विचार किया।

पति को मेहनत करके देख उनकी पत्नी से भी नहीं देखा गया उन्होंने भी खोल दिया एक दुकान खोल दिया, ताकि बच्चो को आगे पढें सके। इस दुकान से जो भी पैसा आता था, विशाखा और उसके भाई-बहनों की शिक्षा के लिए एक छोटी सी राशि ही खर्च की जा सकती थी। इतना सब करने के बाद भी माता-पिता के लिए बच्चों की पढ़ाई और किताबों का खर्चा उठाना बहुत कठिन हो जाता था।

जब किताबों की कमी के कारण स्कूल में दो महीने की छुट्टी होती थी, तो तीनों भाई-बहन पास के विद्यालय में पढ़ने के लिए जाते थे। बच्चे इतने मेहनती थे कि बच्चों की लगन और मेहनत को देखकर टीचर भी उन्हें पढ़ाई और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। बीमारी के कारण जब विशाखा 18 साल की थी तब उनकी मां गुजर गई।

19 साल की उम्र में मां का हुआ देहांत

विशाखा जब 19 साल की थीं, तब उनके परिवार के साथ एक बड़ा हादसा हो गया। जिसके बाद विशाखा बहुत टूट गई थी। जिसने विशाखा की जिंदगी बदल दी। जब विशाखा 19 साल की थी, तब उसकी माँ की किसी बीमारी के कारण उनका देहांत हो गया था। जिसके बाद विशाखा पर बहुत सारी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ आ गईं। उन्होंने सभी जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया।

विशाखा को अब पहले घर के सारे काम करने थे, फिर उसे पढ़ाई के लिए जाना था। तीनों बच्चों के पढ़ाई में होशियार होने के कारण उन्हें किसी भी प्रवेश परीक्षा में ज्यादा कठिनाई नहीं हुई। विशाखा और उनके भाई ने सरकारी आयुर्वेद कॉलेज से बीएएमएस में दाखिला के लिए परीक्षा दी। जिसमें इन दोनों का चयन हो गया।

इसके बाद डॉ विशाखा ने यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) देने का विचार बनाया और इसकी तैयारी में लग गई। हालांकि, उन्हें अपने पहले प्रयास में असफलता देखने को मिली। उन्होंने हार नही मानी। अपनी पहली हार को जीत की सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ती चली गई। लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने साल 2018 में यूपीएससी पास (UPSC Crack) की और आईपीएस ऑफिसर (IPS Officer) बन गईं।

सफलता का राज (Success Mantra)

विशाखा की सक्सेस स्टोरी (Success Story Of Vishakha Bhadane) से उन सभी युवाओं को सीख मिलती है, जो सोचते हैं कि सुविधाएँ होने पर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। विशाखा ने जैसे अभावों में जीवन जीया और बिना किसी सुख सुविधा के पढ़ाई की, पर अपनी लगन और मेहनत के दम पर कामयाबी को प्राप्त किया, उसी तरह से हर व्यक्ति परिश्रम से कामयाबी हासिल कर सकता है। आज की इस कहानी से हम सब लोगो को यह सीख मिलती है कि अगर आपके अंदर प्रतिभा हो , तो बिना सुविधा के भी आप अपनी जिंदगी में कामयाबी हासिल कर सकते।

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