इस माँ ने अपने सरदार बच्चों के लिए एक खास हेलमेट बनाकर बड़ी समस्या से छुटकारा दिलाया

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Sikh helmet
Sikh woman made special helmet for her sardar kids. Now every Sikh bike rider can use this helmet for safety. Turban friendly helmet news.

Photo Source: Social Media

Delhi: यदि आप बाइक या साइकिल चलाते हैं, तो हेलमेट पहनना कितना अनिवार्य है ये आप जानते ही होंगे। अक्सर देखा गया है कि एक्सीडेंट के दौरान सिर पर चोट लगना एक बड़ी समस्या बन सकता है। आपको बताना चाहेंगे दुनिया में पहले हेलमेट का आविष्कार (Helmet Invention) 1975 में “बेल ऑटो पार्ट्स कंपनी” द्वारा साइकिल चालकों के लिए किया गया था।

आज ट्रैफिक नियमों के अनुसार हेलमेट ना पहनने पर अच्छा खासा आपका चालान भी बन सकता है। ऐसे में जहां आम नागरिक तो आसानी से हेलमेट पहन लेते हैं, वही सरदार के छोटे बच्चे जो पगड़ी लगाया करते हैं उनके हिसाब से हेलमेट बाजार में उपलब्ध नहीं है। जिसके करके उन्हें बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

परंतु कहते हैं ना आवश्यकता आविष्कार की जननी है। तो एक सरदार बच्चे (Sikh Kids) की मां ने उनके लिए एक जबरदस्त हेलमेट का आविष्कार किया, जिससे वह पगड़ी (Turban) के ऊपर भी हेलमेट लगा सके। आइए जानते हैं, किसने और कहां किया पगड़ी के ऊपर पहनने वाले हेलमेट का आविष्कार।

कनाडा में रह रही हैं श्रीमती तीन सिंह

जानकारी के अनुसार कनाडा (Canada) में रह रहे सरदार परिवार मैं दो बच्चे हैं। और कनाडा देश के ट्रैफिक नियम के अनुसार बच्चा किसी भी उम्र का हो यदि वह रोड पर साइकिल चलाता है तो, उसके सर पर हेलमेट होना अनिवार्य है।

ऐसे में दोनों बच्चों को अपनी पगड़ी के ऊपर हेलमेट रखना मुश्किल हो रहा था। इनकी मां श्रीमती टीना सिंह जो प्रोफेशन से एक थैरेपिस्ट है, उन्होंने अस्पताल में देखा है कि सिर की चोट की वजह से कितनी खतरनाक ब्रेन इंजरी हो सकती हैं।

इसलिए वह भी चिंतित थी कि कुछ ना कुछ सलूशन निकालना ही होगा ताकि बच्चे सुरक्षित साइकिल चला सके। जब काफी रिसर्च के बाद भी हेलमेट नही मिले तो, निर्णय लिया कि अब वह खुद बच्चों के लिए हेलमेट तैयार करेंगे।

बच्चों को होती थी यह समस्या इसलिए उठाए ये कदम

दोस्तों आपने नोटिस किया होगा सिख समुदाय में बाल कटवाने का रिवाज नहीं है बल्कि, वह बचपन से ही “केस” बढ़ा कर रखते हैं। जिस वजह से छोटी उम्र के बच्चे भी सर पर बालों का जुड़ा बनाकर गोल पगड़ी पहनते हैं।

यही वजह है कि जब एक साधारण हेलमेट सर पर लगाई जाती है, तो वह पगड़ी की वजह से फिट नहीं बैठती। ऐसे में यदि बड़े साइज की हेलमेट इस्तेमाल की जाए, तो उसकी फिटिंग्स सटीक ना होने की वजह से दूसरे नुकसान भी हो सकते हैं। यही प्रॉब्लम इन दोनों बच्चों को भी हो रही थी।

बाजार के लगभग सभी डिपार्टमेंटल स्टोर्स में ढूंढने के बाद भी उन्हें अपने पगड़ी के शेप के अनुरूप कोई भी हेलमेट नहीं मिला। तब बच्चों की मां टीना काफी परेशान हो गई, और मन में ठाना कि अब तो स्वयं ही कोई ना कोई हेलमेट तैयार करनी होगी। ताकि उसके बच्चे दूसरे बच्चों की तरह बाहर साइकिल चलाने का लुत्फ उठा सकें।

यह खास डिजाइन बनाता है इस हेलमेट को यूनिक सरदारों के लिए एक दम परफेक्ट

टीना (Tina) से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने कई दिनों तक पहले हेलमेट की डिजाइन को ड्राइंग के तौर पर पेपर में बना कर देखा। इसके बाद हेलमेट बनाने की उचित मटेरियल उसमें लगने वाला प्लास्टिक एवं फोम की जानकारी बाजार से प्राप्त की ताकि, इस मटेरियल से बनने वाला हेलमेट पूर्ण रूप से सुरक्षित भी हो। फिर जुट गई हेलमेट तैयार करने में।

इस दौरान उन्होंने कई बार अपने डिजाइन में परिवर्तन किया और लगभग 2 साल की लगातार जद्दोजहद के बाद एक परफेक्ट हेलमेट डिजाइन वह बना पाई। आप फोटो में देख सकते हैं कि हेलमेट के ऊपरी हिस्से में एक गोल शेप अलग से उभरा हुआ है। जिसके अंदर बच्चे की पगड़ी आसानी से फिट हो जाती है।

SGS इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा सुरक्षा मानकों पे खरा उतरा

हेलमेट (Sikh Hwelmet) पूर्ण तरह से सुरक्षित है या नहीं यह जानने के लिए श्रीमती टीना सिंह (Tina Singh) ने बकायदा इस हेलमेट को अंतर्राष्ट्रीय हेलमेट टेस्टिंग विभाग में टेस्टिंग के लिए भेजा और आपको बता दें कि इस हेलमेट को सुरक्षा के मामले में सभी तरह के मापदंडों में पास कर दिया गया।

अब सिख बच्चों के लिए भी एक मल्टीस्पोर्ट्स सभी सिक्योरिटी टेस्टिंग में पास मजबूत हेलमेट का विकल्प उपलब्ध हो गया है। टीना सिंह बधाई के हकदार हैं कि अपने बच्चों के साथ साथ उन्होंने समाज के दूसरे बच्चों की भी समस्या का समाधान पूरी तरह निकाल दिया।

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