Supaul, Bihar: भारत एक कृषि प्रधान देश है यहां पर विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग तरह की फसलें उगाई जाती है। क्योंकि भारत तीनों मौसम से संबंध संपन्न है, यहां गर्मी ठंड बरसात सभी ऋतु में बराबर से देश पर अपना असर डालती है, जिस वजह से यहां के किसान तीनों रितु ओं की अलग-अलग फसल उगाने में सक्षम है।
ऐसे में कुछ किसान आज की जरूरत अनुसार कुछ खास प्रकार की फसलों को भी उगाते हैं जैसे कोई आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां उगाता है, तो कोई मोती की खेती कर रहा है। ऐसे में पिछले एक दशक से देश में मशरूम की खेती (Mushroom Farming) को लेकर के भी काफी उठाओ आया है। बाजार में मशरूम अच्छे दामों में बिकता है, इसलिए कई किसान मशरुम की खेती को भी अपनी आजीविका बना चुके हैं।

ऐसे ही एक किसान परिवार की बहू पूनम ने आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) शुरू की और आज वह पूरा गांव उनकी मेहनत की वजह से मशरूम क्लस्टर बनने की कगार पर पहुंच चुका है। आज की कहानी आपको प्रेरणा देगी कुछ बड़ा करने की।
बिहार के एक छोटे से गांव की है यह प्रेरणादाई कहानी
दोस्तों यह कहानी है उस पूनम (Poonam) की जो बिशनपुर चौधरी टोला में 15 वर्ष पहले शादी करके आई थी। ये गांव बसंतपुर खंड के अंतर्गत सुपौल (Supaul) जिले में आता है। जैसा कि हम जानते हैं जब कोई महिला शादी करके आती है, तो उसका जीवन चार-दीवारी के अंदर घरेलू काम करते हुए ही गुजर जाता है।
हालांकि पूनम आत्मनिर्भर बनना चाहती थी, अपने परिवार की आर्थिक स्थितियों में मदद करने के उद्देश्य से परंतु गांव में महिलाओं के काम ना करने का तो जैसे रिवाज था। इसके चलते हुए वो भी घर में सिमट के रह गई परंतु कहते हैं, जहां चाह वहां राह और एक दिन उन्हें मशरूम के जरिए उम्मीद की एक किरण नजर आई।
पूरा परिवार आर्थिक तंगी से गिरा हुआ था, पूनम ने पार लगाई नैय्या
पूनम से बातचीत के दौरान जानकारी मिली की उनके पति नौकरी की तलाश में थे, लंबे प्रयास करने के बाद भी उन्हें जब कोई अच्छी नौकरी नहीं मिली तो अपने पैतृक किसानी के व्यवसाय में ही उन्होंने हाथ आजमाना शुरू कर दिया।
किसानी के काम से घर तो चल जाता था, लेकिन दूसरी बड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत आर्थिक परेशानियां होने लगी। चूंकि पूनम इंटर तक पढ़ाई कर चुकी थी। इसलिए उन्हें ऐसा लगता था की पारिवार की आर्थिक पूर्ति के लिए उन्हें भी कोई ना कोई काम करना चाहिए।
इसी दौरान उन्हें अपने पति से जानकारी लगी कि सरकार किसी आत्मा प्रोजेक्ट के तहत सिर्फ महिलाओं को ही मशरूम की खेती का प्रशिक्षण दे रही है। जिससे वह आत्मनिर्भर बन सके बस यूं समझ लीजिए पूनम की तो लॉटरी लग गई हो, उन्होंने जिद करके अपने पति से कहा कि वह यह ट्रेनिंग कैसे भी लेना चाहती है। बस यहीं से शुरू हो गया पूनम की मशरूम खेती का कारवां।
सरकार से मिली आर्थिक मदद ने व्यापार को बनाया और मजबूत
मशरूम का शुरुआती प्रशिक्षण लेने के बाद पूनम ने घर के छोटे से ही कमरे में मशहूर हो गाना शुरू किया एवं पति के माध्यम से बाजार में बेचने लगी। जैसे जैसे दिन बीते पूनम ने मशरूम की खेती से संबंधित अपनी शिक्षा को और मजबूत करने राघोपुर के कृषि विज्ञान केंद्र से लगातार संपर्क में रही।
Mushroom cultivation is emerging as an important source of income for #farmers in #Bihar. With production crossing 21325 tonnes in 2020-21, Bihar has joined the league of leading #mushroom producing states of #India.✌️ pic.twitter.com/jyczcET1p7
— Bihar Foundation (@biharfoundation) July 10, 2021
नतीजा यह रहा की वह आए दिन अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को भी घरेलू स्तर पर मशरूम की जानकारी मुहैया कराने लगी जल्द ही वह मशरूम महिला के नाम से पूरे जिले में फेमस हो गई। इसके चलते उन्हें सरकार की एक योजना के तहत 200000 RS का लोन भी प्रदान किया गया ताकि वह अपनी मशरूम की खेती को और उन्नत कर सकें।
पूनम रखती है बहुत दूर की सोच, अब ये ठाना है मशरूम गांव बनाना है
पूनम का कहना है कि वह राघोपुर के कृषि विज्ञान केंद्र के साथ मिलकर गांव की ही अधिक से अधिक महिलाओं को मशरूम खेती के प्रति जागरूक और स्किल्ड बनाएंगे। जिससे उनके गांव में अधिक से अधिक मशरूम की खेती होने लगे।
बल्कि वह तो कहती है कि हम सब मिलकर के एक दिन इतना मशरूम उगाएंगे जो पूरे देश में सप्लाई किया जाएगा। अब तक वह 15 महिलाओं को अपने साथ प्रशिक्षित कर मशरूम के काम में लगा चुकी हैं और यही आलम रहा तो जल्द ही यह गांव मशरूम क्लस्टर के नाम से जाना जाएगा।




