पर्यटन हब के बाद अब यह शहर मशरूम हब भी बनेगा, मशरूम की खेती का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा

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Mushroom hub Nainital
Nainital is tourism hub and will become Mashroom hub soon. government will give Mashroom farming training to farmers.

Nainital: उत्तराखंड राज्य का नैनीताल (Nainital) जिला जिसे 16 जनपदों में से एक जनपद माना जाता है। यहां पर अब मशरूम की खेती कर इस जिले को मशरूम हब बनाने की तैयारी चल रही है। यह जिला एक बहुत अच्छा पर्यटक स्थान है। अब इस जीने की कीमत और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। जब यहां मशरूम की खेती और मशरूम का हब बन जाएगा। जिलाधिकारी नैनीताल धीराज सिंह गबर्याल के अनुसार दिए गए निर्देश पर यह कार्य संभव हो रहा है।

बहुत जल्द इस जिले में काफी तेजी से मशरूम की खेती प्रारंभ होगी और धीरे-धीरे बढ़ती चली जाएगी। अब बनाने की तैयारी में जुटे लोगों ने सबसे पहले 500 काश्तकारों और किसानों को मशरूम की खेती (Mushroom Farming) के लिए एक प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया है। प्रशिक्षण के बाद किसान मशरूम की खेती कर अपने जिले को मशरूम हब बना लेंगे।

मशरूम क्या है

मशरूम एक खाने योग्य कवक है। जो जीवाणु युक्त होता है और जमीन के अंदर पैदा होता है। मशरूम प्रोटीन और कई खनिज पदार्थों के साथ विटामिन से भरपूर होता है, इसीलिए यह मानव शरीर के लिए बहुत ही खास भोजन माना गया है। मशरूम के लगातार सेवन करने से कई बीमारी कोसों दूर हो जाती हैं, इसीलिए कुछ शहरों में मशरूम का इस्तेमाल लगातार होता है।

Mushroom Cluster village
Mushroom farming demo file photo

मशरूम में भी कई तरह की वैरायटी आती हैं, कुछ खाने योग्य होती हैं, तो कुछ खाने योग्य नहीं होती हैं। ऐसा माना जाता है कि मशरूम बादल की गड़गड़ाहट के साथ जमीन पर ऊपर उगते हैं। इनका आकार छत्तेनुमा होता है और इनमें कोई रंग नहीं होता। यह कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत माना गया है।

मशरूम के फायदे

अब हम बात करते हैं मशरूम के फायदे की, तो आपको बता दें मशरूम के सेवन से इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है। साथ ही माइक्रोबियल और कई प्रकार के फंगल इंफेक्शन ठीक हो जाते हैं। मशरूम के सेवन से शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत होती है और दिल की बीमारियों से भी निजात मिलता है। मशरूम एक अच्छा पोषक तत्व है और कई प्रकार का एंजाइम जिसकी वजह से कोलेस्ट्रॉल भी कंट्रोल में रहता है।

इसके साथ ही कुछ बड़ी बीमारियां है जैसे प्रोटेस्ट कैंसर याने स्तन के कैंसर के लिए भी यह उपयोगी है। डायबिटीज की बीमारी से बचने के लिए भी इसका उपयोग होता है। वजन कम करने के लिए, मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ाने के लिए और त्वचा को हेल्दी रखने के लिए यह बहुत उपयोगी उत्पाद है।

नैनीताल का अच्छा प्लेस है मशरूम की खेती के लिए

जैसा कि हम जानते हैं कि मशरूम पहाड़ी इलाकों में और ठंडे प्रदेशों में ज्यादा मात्रा में उगता है। इसीलिए नैनीताल का आबोहवा बहतरीन जगह है मशरूम की खेती के लिए। बीते वर्ष में इस इलाके से जिलेभर का सबसे ज्यादा मशरूम उत्पादित हुआ था।

पूरे जिले भर में 2150 मैट्रिक्स टर्न मशरूम का उत्पादन किया गया था। इसीलिए भी नैनीताल को मशरूम हब (Mushroom Hub) बनाने का विचार आया है। उत्पादन की मात्रा को देखते हुए विशेषज्ञों ने यहां से अधिक से अधिक मात्रा में मशरूम उगाने के लिए तैयारियां जोरों शोरों से प्रारंभ कर दी है।

mushroom cultivation
Mushroom cultivation file free photo.

इस योजना की शुरुआत नैनीताल जिले के डीएम के द्वारा की गई है। उनके निर्देशन पर उद्यान विभाग काम कर रहा है। डीएम के अनुसार इस खेती का उद्देश्य पहाड़ों में रहने वाले किसानों और काश्तगारो की इनकम को बढ़ाना है, क्योंकि यह वही लोग हैं, जो पहाड़ों में बसे होने के कारण मौसम और आपदा की मार झेलते हैं।

किसानों और महिलाओं को भी मिलेगा मौका

बताया जा रहा है कि काश्तकारों के साथ-साथ किसानों और महिलाओं को भी इस मुहिम में शामिल किया जा रहा है इसका उद्देश्य किसानों और महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाना है। मशरूम उत्पादन कार्य से जोड़ने के लिए महिलाओं की 4 टीम का निर्माण किया गया जा रहा है।

साथ ही काश्तकारों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के लिए भीमताल में मशरूम के बीज का लेब भी तैयार किया गया है। वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक आरसी जोशी का कहना है कि अभी तक 2400 से ज्यादा किसानों को मशरूम उत्पादन मिशन में शामिल कर लिया गया है।

वे आगे बताते हैं कि वर्ष 2021 22 में नैनीताल की कुमाऊं में 4310 मेट्रिक टन मशरूम का उत्पादन किया गया था। जिसमें नैनीताल अकेले ने 2150 मैट्रिक टन मशरूम का उत्पादन किया था।

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