21 साल की निकिता ने डिप्टी कलेक्टर बन अपने स्वर्गवासी पिता की अंतिम इच्छा पूरी की।

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Mppsc Topper Nikita Mandloi Story. 21 Year Old Girl Nikita Mandloi From Khargone Madhya Pradesh was the Topper of MP PSC Exam. Nikita Mandloi Depti Collector Life Story in Hindi.

Image Credits: Twitter

भारत की बेटी भारत की शान है। आज देश मे बेटी की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अभियान चलाया था बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ इससे बेटियों को जीने की नई राह मिली है। पहले गॉव में लोग बेटी की पढ़ाई पर विशेष ध्यान नही देते थे, लेकिन आज गॉव में भी बेटी की पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है।

मेहनत कभी बेकार नही जाती है। मेहनत का फल मिलता जरूर है लेकिन देर से मिलता है। मेहनत करने वालो को कभी हार नही माननी चाहिये।
अगर किसी काम को करने की मन मे ठान लो तो कोई भी कठिन परिस्थिति बाधा नही बनती। अपने सपनो को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत ही सफलता का माध्यम होता है। इसी बात को यही साबित किया मध्यप्रदेश की एक होनहार बेटी निकिता ने।

खरगौन शहर के कुंदा नगर में रहने वाली निकिता ने पहले ही अटेम्प्ट में PSC का Exam क्लियर किया। डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुई हैं। मीडिया की खबरों के मुताबिक निकिता ने ST वर्ग में MP में टॉप रैंक हासिल की। प्रदेश में ओवर ऑल 23 रैंक प्राप्त करके देश की शान बनी। निकिता का जीवन बहुत संघर्ष से भरा था।

निकिता (MP-PSC Topper Nikita Mandloi) के पिता मंगलसिंह थे, पिता शिक्षक के पद पर थे, पिता ने अपनी बेटी के लिए बहुत सपने देखे थे। बेटी को डिप्टी कलेक्टर या कलेक्टर बनाने का सपना देखा था। कुछ वर्षो पूर्व कुंदा नगर में अपना खुद का घर बनाकर बस गए। सात वर्ष पूर्व पिता का स्वर्गवास हो गया।

अब परिवार की जिम्मेदारी माता के कंधों पर आ गई। लेकिन मां राधा ने कभी हार नही मानी। पिता के निधन के बाद निकिता ने अपने होसलो को कम नही होने दिया। निकिता ने अपने पिता के सपनो को पूरा करने के लिए कड़ा परिश्रम किया। निकिता ने आज अपने पिता के सपनो को सच कर दिखाया। निकिता की कामयाबी से परिवार में खुशी की लहर है।

निकिता की प्रारंभिक शिक्षा शहर के स्कूल में की। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए इंदौर गई। उसने इंदौर में JSITS कॉलेज से बायो मेकेनिकल में इंजीनिरिंग की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के समय ही उसका चयन प्राइवेट कंपनी द्वारा किया गया। जिसके द्वारा निकिता को विदेश में नौकरी का ऑफर मिला, लेकिन निकिता इस ऑफर को दरकिनारे कर अपने पिता के सपनो को पूरा करने के लिए पीएससी की तैयारी में जुट गई।

निकिता ने ढाई साल कड़ा परिश्रम कर Exam को पास किया। निकिता ने सभी से कहा कि अपने सपनो को पुई करने के लिए दिन रात कड़ी मेहनत करके उनको साकार करने की ओर आगे बढे, मुसीबतों से डरना नही है। मुसीबत ही सफलता की सीढ़ी होती है जिन पर चढ़कर अपने सपनो को पूरा करना होता है।

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