
Delhi: एक योद्धा अंत तक कभी हार नहीं मानता। एक बहादुर हमेशा चुनौती का हर परिस्थितियों में मुकाबला करता है। एक बेहतरीन उदाहरण 25 वर्षीय डॉ मारिया बीजू हैं। Media खबरों के मुताबिक उनके साथ एक दुर्घटना हुई, जिसने उन्हें व्हीलचेयर पर बिठा दिया, लेकिन महिला ने MBBS करने के लिए मुश्किलों का डटकर सामना किया और अपने अल्मा मेटर में डॉक्टर बन गईं।
उन्होंने 1 फरवरी को यह उपलब्धि हासिल की। केरल की लड़की ने 2015 में थोडुपुझा के अल-अजहर मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स में दाखिला लिया। केरल की रहने वाली मारिया बीजू की ज़िन्दगी इस किसी कहानी से कम नही है। मारिया जब 25 साल की थीं, तब वह एक दुर्घटना का शिकार हो गयीं।
एक्सीडेंट के कारण उनके शरीर के 70% हिस्से को लकवा मार गया था और सीने से नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था। “खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे कि बता तेरी रज़ा क्या है।” काफी समय तक हॉस्पिटल में गुजारने के बाद भी उनके पैर ठीक न हो सके, लेकिन फिर भी वह हार नही मानी।
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उन्होंने खुद को व्हीलचेयर पर ही अपने आपको स्थिर नही समझा, उन्होंने पढ़ाई का रास्ता अपनाया और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति व संघर्ष से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। उनकी इस इच्छाशक्ति और हौसले को देखते हुए उनका परिवार व कॉलेज भी सहायता के लिए आगे आया।
उन्होंने राइटर की हेल्प से परीक्षा दी। फिर उन्होंने हार ना मानते हुए आगे खुद ही लिखने की कोशिश को जारी रखा। आज अपनी मेहनत और लगन के बल पर, वह एक डॉक्टर बनकर समाज की सेवा में जुटी हुई हैं।
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कुछ लोगों की जिंदगी संर्घष से भरी होती है. ऐसी ही जिंदगी है, केरल की डॉक्टर मारिया बीजू की. विकलांगता को हराकर आज वो उस बुलन्दी पर हैं, जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है. जो लोग जीवन को खोने के विचार से निराश हैं, उनके लिए मारिया की कहानी प्रेरणास्रोत से कम नही है। मारिया अपने संघर्षो के बारे में कहती हैं कि आगे बढ़ना मेरे लिए काफी मुश्किल था, लेकिन मैं किसी भी कीमत पर रूकना नहीं चाहती थी। मारिया की ज़िन्दगी हम सभी को एक प्रेरणा देती है।



