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Bhopal/Madhya Pradesh: कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई हमारे देश भारत के लिये एक महत्वपूर्ण दिवस है। कारगिल जंग लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई को यह समाप्त हुआ। इसमें भारत की पाकिस्तान के विरुद्ध विजय हुई थी। इसकी शरुआत पाकिस्तान के की थी और भारत ने अपनी सरहदों और कारगिल की चट्टानों की रक्षा की थी। इस दिन (26 जुलाई) कारगिल जंग में वीरगति को प्राप्त हुए जवानों के सम्मान हेतु मनाया जाता है।
देश के वीर जवानो के शौर्य और पराक्रम को याद करने के लिए हर साल 26 जुलाई (26 July) को कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो हमेशा ही पूरा देश कारगिल हीरो (Kargil Hero) को सलाम करता है, परन्तु कारगिल विजय दिवस अपने आप में एक खास दिन है। आज भी इन हीरो का पराक्रम और शौर्य लोगों में जोश भर देता है। देश के ऐसे कई हीरो हैं, जिनकी कहानी लोगों को गर्व से जगा देती है। इनमें से एक हैं दीपचंद और उदय सिंह। इसके साहस और हौसले की कहानी आपको हैरान कर देगी।
आपको बता दे की पाक से कारगिल की रक्षा करते हुए करीब 21 साल पहले, नायक दीप चंद ने अपना दाहिना हाथ और दोनों पैर खो दिए। आज भी इन वीरों के साहस को देश याद करता है। जवान दीप चंद (Deepchand Singh) ने 1999 में भारतीय सेना के अभियान विजय कारगिल में अपना शौर्य दिखाया था। ये एक ऐसे फौजी हैं जिन्होंने अपने प्राण की परवाह किये बिना देश की रक्षा में अपने आप को झौंक दिया।
मीडिया में बताया गया था की महाराष्ट्र के पुणे में उनका इलाज किया चला और इलाज के दौरान उन्होंने कंप्यूटर कोर्स (Computer Course) पूरा किया। वह कहते हैं, वे अब डॉक्टरों द्वारा कगाये गए पैरो का इस्तेमाल करते है और डॉक्टरों ने यह उनकी सुविधा के लिए हल्के पैरों का निर्माण किया। वह चलने में भी मदत करते हैं।
वे बताते है की अब वे अपने स्कूटर की सवारी भी कर पाते है और अपने प्रोस्थेटिक्स की मदद से फुटबॉल भी खेल पाते हैं। कारगिल हीरो दीप चंद ने बताया कि जब एक छोटा बच्चा रसोई के प्लेटफॉर्म पर रखा रखे बिस्कुट को खुद की थोड़ी कोशिश करके ले लेता है, तो मैंने सोचा कि अगर एक छोटा बच्चा, जो अच्छी तरह से बोल भी नहीं सकता है, तो खुद के लिए काम कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकत। बस इसके बाद मैंने अपने इसी पैर और हाथ के सहारे अपना खुद का काम करना शुरू कर दिया।
आपको बता दे की कारगिल पर पाकिस्तान की योजना भारत के क्षेत्र पर कश्मीर में पहाड़ की कुछ चोटियों पर कब्ज़ा करने और फिर श्रीनगर-लेह राजमार्ग को बंद करने की थी। इस सड़क को बंद करना पाकिस्तान की प्रमुख रणनीतियों में का हिस्सा था, क्योंकि यह एकमात्र सड़क मार्ग था, जिससे भारत कश्मीर में तैनात सैनिकों को सैन्य सहायता और रसद भेजता था।
कहा जाता है की कारगिल पर योजना बना रहे पाकिस्तानी जनरलों का मानना था कि ऐसा करने से भारत कश्मीर विवाद पर बातचीत के लिए मजबूर हो जायेगा, परन्तु भारत के वीर जवानों के पाक की इस योजना को नाकाम कर दिया। पाक सेना ने शुरू में भारत को भारी नुकसान पहुंचाया था। भारतीय सेना को भी नहीं पता था कि क्या हुआ और बाद में भारतीय सेना ने कुछ कामयाब अभियान चलाकर अपने पहाड़ों को वापस हासिल कर लिया था।



