कैलाश सत्यार्थी ने जिस बाल मज़दूर को बचाया, जाने वह आज क्या काम कर रहा है, इतने सालो बाद

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Kailash Satyarthi Amar Lal
Success Story in Hindi: Kailash Satyarthi and Amar Lal story in the real example of hard word and success. It is our proudest moment as parents of this bright young lawyer who we rescued from inter-generational slavery at the age of 5. He stayed at Bal Ashram until he completed his education.

Image Courtesy: Twitter(k_satyarthi)

Bhopal/Madhya Pradesh: कैलाश सत्यार्थी को तो आप जानते ही होंगे, ये बाल जीवन को सवारने के लिए जाने जाते है और नोबेल शांति पुरस्कार भी हासिल कर चुके है। आज हम एक ऐसे बाल मजदूर की कहानी जान्ने जा रहे है, जिनका जीवन कैलाश सत्यार्थी ने बचाया और सवार दिया। आज 25 साल के हो चुके अमर लाल एक कामयाब वकील है। परन्तु वे जो आज है वे नहीं बन पाते, अगर नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी न होते।

आज अमर लाल नोएडा में कानून की पढ़ाई कर वकील बन गए हैं। कभी बाल मज़दूरी करने वाले, अमर लाल को केवल 5 साल की उम्र में कैलाश सत्यार्थी (Kailash Satyarthi) के बचपन बचाओ आंदोलन के ज़रिये बचाया गया था। तब से उनके जीवन में लगातार बदलाव आया है।

अमर लाल ने मीडिया प्लेटफॉर्म डेक्कन हेराल्ड को बताया था की जब कैलाश सत्यार्थी जी ने मुझे देखा था तो मैं एक टेलीफोन पोल को ठीक करने के लिए काम कर रहा था। मैं पाँच साल का था जब मुझे बचपन बचाओ आंदोलन ने छुड़वाया गया था। मैं एक वकील बनकर समाज की भलाई के लिए अपना योगदान देना चाहता हूँ,” यह विचार उस बाल मजदूर के थे, जो अब वकील बनके लोगो को न्याय दिलवाने में लगे है।

आपको बता दे की कौलश सत्यार्थी ने जिन भी बच्चों का जीवन संवारा है, वे सब उन्हें प्यार से ‘भाईसाहब जी’ बुलाते हैं। कैलाश सत्यार्थी 2018 में अमर लाल के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर एक तस्वीर और जानकारी साझा की थी। उन्होंने ट्वीट किया था ”आज, मेरा बेटा अमर लाल एक 17 साल की दुष्कर्म सर्वाइवर के लिए अदालत में खड़ा हुआ। इस युवा वकील के माता-पिता के रूप में यह हमारे लिए गर्व का क्षण है, जिसे हमने 5 साल की उम्र में बाल मज़दूरी से बचाया था। अपनी पढ़ाई पूरी करने तक अमर बाल आश्रम में रहा। अभी और आगे जाना है।” यह काफी पसंद की गई थी।

अमर अपने परिवार से पहले सदस्य है, जो पढ़-लिख कर यहाँ तक पहुंचे है। उन्होंने बताया, “हम बंजारा समुदाय से आते हैं। हमेशा एक जगह से दूसरी जगह पर पलायन करते रहने की वजह से हमें कभी भी स्कूल जाने का मौका नहीं मिल पाता है।” आपको बता दे की अमर लाल मूल रूप से राजस्थान से हैं। वकालत की डिग्री हासिल कर, अमर पीड़ितों के लिए आगे आ रहे हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया की 2016 में ‘सेव द चिल्ड्रन’ द्वारा किये गये सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 380.7 लाख़ लड़के और 80.8 लाख़ लड़कियाँ बाल मज़दूरी के शिकार हैं। फिर कैलाश सत्यार्थी ने एक अभियान छलकते हुए, बचपन बचाओ आंदोलन के तहत 88,000 से भी अधिक बच्चों को बाल मजदूरी, उत्पीड़न और शोषण से आज़ादी दिलवाई। इसी के चलते उनके नोबेल शांति पुतस्कर से नवाज़ा गया था।

भारत के मध्य प्रदेश के विदिशा में 11 जनवरी 1954 को पैदा हुए कैलाश सत्यार्थी ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ चलाते के लिए पूरे विश्व में जाने जाते है। उन्हें बच्चों और युवाओं के दमन के ख़िलाफ़ और सभी को शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करने के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने पाकिस्तान की मलाला युसुफ़ज़ई के साथ ये नोबेल पुरस्कार साझा किया था।

कैलाश सत्यार्थी का झुकाव शुरू से ही समाज सुधार और सेवा की दिशा में था। काॅलेज में पढ़ाते हुए आखिर में उन्होंने निर्णय ले ही लिया कि एक इंजीनियर के तौर पर अपना करिअर बनाने के बजाय वे अपना जीवन समाजसेवा के लिए समर्पित कर देंगे और खासकर बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम करेंगे वर्ष 1980 में उन्होंने इंजीनियरिंग को अलविदा कहा और बाॅन्डेड लेबर लिबरेशन फ्रंट के महासचिव बन गए। इसके बाद उन्होंने बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए ढेरों काम किए। उनके काम को पहचान मिली ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ से।

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