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Delhi: UPSC की परीक्षा का नाम सुन हमारे मन मे एक बात आती है कि उसमे सफल होने के लिए पैसा होना चाहिए अच्छी स्कूल से पढ़ाई होनी चाहिए। देश में हर साल सैकड़ों बच्चे UPSC की तैयारी करते हैं। गांवों में भी बच्चे बड़ा अधिकारी बनने का सपना देखते हैं। परिवार वाले भी चाहते हैं कि उनके बच्चे कोई बड़ा अधिकारी (Officer) बन उनका नाम गर्व से ऊंचा कर दें। पर गांवों में अच्छी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों की कमी भी है।
यहां सुविधाओं की कमी में बच्चे कोशिश तो करते हैं, लेकिन एक बार भी सफल नहीं हो पाते। ऐसी ही एक शख्स ने सिविल सर्विस परीक्षा (Civil Service Exam) की तैयारी की लेकिन परिवार के विकट परिस्थितियों ने उसकी राह में रुकावटे पैदा कर दीं। पिता के देहांत के बाद भी अपने सपने से पीछे नही हाटे, शख्स ने आईएएस (IAS) बन परिवार का नाम रोशन कर दिया।
आईएएस सक्सेज स्टोरी (IAS Success Story) में तमिलनाडु (Tamilnadu) के एक छोटे से गांव ‘के एलमबहावत’ (K Elambahavath IAS) के संघर्ष की कहानी सुना रहे हैं। जानकारी के मुताबिक के. एलमबहावत ने एक बार कहा था कि हमेशा लक्ष्य ऊपर रखें और सच्ची मेहनत से काम करें। कड़ी मेहनत का कोई रास्ता नहीं होता है। कभी भी अपने सपने देखना मत छोड़िए।
के. एलमबहावत का जन्म तमिलनाडु के Thanjavur जिले के एक छोटे से गांव Cholagangudikkadu में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी। के. एलमबहावत के पिता ग्राम प्रशासनिक अधिकारी थे। उनकी मां किसान थीं और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी काम करती थीं। साामान्य बच्चों की तरह ही के. एलमबहावत (K Elambahavath) का बचपन भी बीता। के एलमबहावत बचपन के दिनों में माँ के साथ खेत जाकर उनका खेती-बाड़ी में हाथ बटाते थे। इसके अलावा वो अपनी तीन बहनों के साथ स्कूल पढ़ने के लिए भी जाया करते थे।
उन्होंने अपने बचपन का अधिकतम समय खेत मे ही गुजारा, माँ का साथ देते थे खेती में, स्कूल जाने, दोस्तों और तीन बड़ी बहनों के साथ खेलने में अपना बचपन व्यतीत किया। एलमबहावत के पिता गांव के पहले ग्रेजुएट थे। इनके परिवार ने शिक्षा को अत्यधिक महत्व दिया लेकिन 1997 में समय ने ऐसी करवट ली कि उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। दुखो का पहाड़ टूट गया था परिवार (Family) में। उस समय ये 12वीं (12 th Class) में थे और कक्षा 12 में आर्थिक तंगी को देखते हुए पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी।
12वीं में ही पढ़ाई छूटने के बाद एलमबहावत ने लॉन्ग डिस्टेंस के पढ़ाई की। मद्रास यूनिवर्सिटी से हिस्ट्री में बी.ए. किया। उन्होंने अपने दम पर अध्ययन किया, क्योंकि यूपीएससी की तैयारी के दौरान कोचिंग सेंटरों तक कोई सोर्स नहीं था। परिवार की स्थिति भी ठीक नही थी। एलमबहावत का दिन खेतों में काम करते हुए और शाम में सरकारी दफ्तरों में नौकरी की तलाश में बीतता था।
पढ़ाई छोड़ने के बाद एलमबहावत का अधिकतर दिन खेतों में गुजरने लगा। खेती करने के बावजूद इतना पैसा नही आ पा रहा था, जिससे घर की जरूरतें पूरी हो सके। ऐसे में उन्होंने सोचा कि वो किसी सरकारी नौकरी के लिए अप्लाई कर दें, इस दौरान उन्होंने Junior Assistant (एलडीसी) के लिए अप्लाई किया, लेकिन उन्हें सफलता (Success) नही मिलीं।
"I got jobs 6 times in the state government – Jr Asst to Dy SP for 7 yrs. But appeared for UPSC relentlessly. Gave interview 3 times. Not selected. 4th interview – got IRS. Finally, I got selected for IAS in 2016"
K.Elambahavath,IAS 2016, TN
Full story – https://t.co/cZx6SOP8ho pic.twitter.com/C4IhQ2osej
— Humans of LBSNAA (@humansoflbsnaa) January 1, 2019
ऐसा नौ सालों तक चला, लेकिन कोई हल नहीं निकला। उनको कोई रास्ता नही मिल रहा था। हर तरफ से निराशा ही हाथ लग रही थी। अपने होसलो को भी धीरे धीरे खोने लगे थे। हर कोशिश के बाद जब वे थक गए तो अपना लक्ष्य और राह दोनों को बदलने की कोशिश की। उन्होंने खुद को IAS अधिकारी बनाने का फैसला किया। बहुत सारे स्टूडेंट्स IAS बनने के लिए प्रेरित होकर आते हैं, पर एलमबहावत ने इसे निराशा के बाद चुना।
गांव के लोगों और टीचर की मदद से उन्हें तमिलनाडु सरकार की तरफ से नि: शुल्क सेवा कोचिंग पाई। सफलता पाने से पहले एलमबहावत सिविल सर्विल की परीक्षा में करीबन 5 बार मेन्स और तीन बार इंटरव्यू में असफल हुए हैं। उहोने अपने आप को मजबूत बनाये रखा। जिसके बाद उन्होंने तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमिशन की परीक्षा को पास कर लिया। यहां उन्होंने स्टेट गर्वमेंट ग्रुप 1 सर्विस जॉइन की।
नौकरी ज्वाइन करने के बाद भी उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करना नहीं छोड़ा, स्टेट गर्वमेंट (State Government) की नौकरी (Job) में वो असिस्टेंट डायरेक्टर (पंचायत) और डीएसपी के तौर पर कार्यरत थे, यहां वो नौकरी के साथ तैयारी करते थे, पहले सभी प्रयास में निराश होने के बाद आखिरी अटेम्प्ट में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा को क्रैक (UPSC Exam Crack) कर लिया। लगातार प्रयास के बाद साल 2015 में उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में 117वीं रैंक (117 Rank) हासिल की।
5 बार मेन्स और तीन बार इंटरव्यू राउंड में फेल होने के बाद किसी के लिए आगे बढ़ना आसान नहीं था। मगर, एलमबहावत ने उम्मीद नहीं छोड़ी। अपनी उम्मीद पर आगे बढ़ाना जारी रखा। एक ऐसा भी वक्त आया, जब उनके अधिकतम प्रयास समाप्त हो गए। लग रहा था, सब पीछे छूट गया हो। तभी 2014 में केंद्र सरकार ने उन लोगों के लिए दो और अटेंप्ट का मौका दिया जो सिविल सेवा एप्टीट्यूड टेस्ट से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए थे। इस मौके पर एलमबहावत ने अपनी किस्मत को आजमाया और बाजी मारी।
"Always aim high & be truthful to your conscience. There is no substitute for hard work. Never give up your dreams.”
Says #IAS K Elambahavath, a school dropout, who failed after appearing for 5 Mains & 3 Interviews but didn't give up & fulfilled his dreamhttps://t.co/707LzJ72t7
— District Collectors (IAS) (@DCsofIndia) November 5, 2019
2015 में उन्होंने आईएएस के लिए अपना अंतिम प्रयास किया और सफल रहे। आईएएस स्टेट कैडर में वो ऑल इंडिया 117वीं रैंक लेकर आए थे। आज वो देश के जाने-माने सरकारी अफसर हैं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत। यूपीससी सिविल सर्विस एग्जाम में फेल (Fail in UPSC Exam) होने के बाद एलमबहावत ने स्टेट गर्वमेंट ग्रुप 1 सर्विस जॉइन की।
इसके अंतर्गत असिस्टेंट डायरेक्टर (पंचायत) और डीएसपी था। नौकरी के साथ तैयारी की, लेकिन 5 बार MAINS और तीन बार इंटरव्यू राउंड में फेल (Fail in Interview) हुए। उसके सभी प्रयास बिना किसी सफलता के समाप्त हो गए। इतने समय कके बाद को भी स्टूडेंट्स हार मानकर अपने लक्ष्य से पीछे हट जाता है, लेकिन एलमबहावत ने ऐसा नही किया उनको अपनी मेहनत पर भरोसा यह इसी के दम पर आगे बढ़ते चले गए।



