इन्होने अपनी 1 करोड़ की कमाई छोड़कर, गाँव में खेती शुरू की, अब गाँव को इन कार्यों से सवार रहे हैं

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Uttarakhand man JP Joshi
Uttarakhand man JP Joshi started farming in village and making life of villagers. Jai Prakash Joshi adopted village and working.

Photo Credits: Social Media

Pithoragarh: भारत में जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने के लिए काफी सारे युवा काम कर रहे है। वे खुद जैविक को अपना मुख्य व्यवसाय बना रहे है। ये युवा भारत को नया सवेरा देना चाहते है। जिससे हमारा भारत एक बार फिर सोने की चिड़िया कहलाने लगे।

भारत आदिमानव के समय से कृषि करते आ रहा है। आदिमानव ने कृषि की खोज की थी। जिससे आज भारत प्रगति कर पाया है। वो पारंपरिक तरीका था। आज के आधुनिक दौर में लोग पारंपरिक खेती को छोड़ आधुनकि खेती को अपना रहा है। कृषि विज्ञान के विशेषज्ञयों ने कई सारी वैज्ञानिक तकनीकों की खोज की और किसानों की पैदावार को 4 गुना बढ़ा दिया।

आज का युवा किसान टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर अपनी इनकम को बढ़ा रहा है। लोग अपने पुराने काम को छोड़ कर इस आधुनिक खेती की तरफ रुख कर रहा है। युवा से लेकर बुजुर्ग किसान को भी समझ आ गया है। कि उन्हें क्या करना चाहिए।

आज हम बात करेंगे 50 वर्षीय किसान जय प्रकाश जोशी की इन्होने 2012 के जमे हुए व्यवसाय को छोड़ गांव वापस आ गए। जय प्रकाश जोशी ने अपने व्यापार की शुरूआत मुंबई में एक ऑयल उत्पादन मल्टीनेशन कंपनी मे मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर 8 वर्ष तक काम किया।

जयप्रकाश (Jai Prakash Joshi) अपने गांव के किसानों की तस्वीर बदलने के लिए, नुकसान को झेलते हुए भी यह जिम्मा उठा रहे है। खेती-किसानी किसानों के जीवन का मुख्य आधार है। आइये हम विस्तार पूर्वक जानते है इनके बारे में।

कुछ बातों ने गांव वापस लौटने में प्रेरित किया और गांव वापसी के बाद स्कूलों को लिया गौद

जय प्रकाश जोशी बताते है कि जब वर्ष 2014 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत ने “गाँव बचाओ, गाँव बसाओ” का नारा दिया और उस नारे का उद्देश्य गांव से नोकरी की तलाश में जा चुके लोगो को वापस बुलाना था।

जोशी जी कहते है कि वे उस समय मुंबई में रहते थे और टीवी पर मुख्यमंत्री जी का भाषण सुना था। उनकी बातों ने जोशी जी को अपने घर अपने गाँव वापस आने के लिए प्रेरित। वे बताते है कि उनके गाँव मलान से भी काफी सारे लोगो ने पलायन किया जिससे गांव एक दम खाली सा हो गया।

गाँव के करीब 90 प्रतिशत लोग अन्य राज्यो में जा चुके थे। गाँव में पक्की सड़क, पानी और बिजली की बहुत ज्यादा समस्या है। फिर भी प्रकाश जोशी अपने गांव को आबाद करने के लिए मुंबई से अपना कारोबार में विराम देकर अपनी पत्नी और बच्चों समेत अपने गाँव में वापसी की।

जोशी की पत्नी पुणे की थीं और पुणे की यूनिवर्सिटी से फर्स्ट क्लास ग्रेजुएट रही। उनके बच्चे भी पढ़ लिख रहे थे। इसीलिए गाँव पहुंचकर जोशी ने सबसे पहले एक स्कूल को गोद लिया। और फर्नीचर से लेकर स्कूल की सभी जरुरतो को पूरा किया। कई सारे बेस्ट टीचरों को भी नियुक्त कराया। स्वयं के बच्चों का नाम भी गाँव के स्कूल में दर्ज कराया। साथ ही सड़क और पानी की व्यवस्था करवाई।

डेयरी प्रोजेक्ट और बंजर जमीन पर हरियाली उगाने जैसे काम किये

अपने गाँव को सुधारने के बाद जोशी अब अपने क्षेत्र में रोजगार लाना चाहते थे। जिसकी शुरुआत उन्होंने एक बड़े से डेयरी फार्म (Dairy Farm) को खोल कर किया। जय प्रकाश जोशी बताते है कि वे एक ऐसा प्रोजेक्ट ढूंढ रहे है। जिससे गांव के निवासियों की अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सके। इसीलिए उन्होंने दो मंजिल की डेयरी बनाई। साथ ही 60 से भी ज्यादा गायों को पाला।

अब उनकी गाय प्रतिदिन करीब 350 लीटर दूध का देती है। इसके अलावा उन्होंने गांव के कई युवाओं को रोज़गार मुहैया कराया। अपने गाँव को बेहतर बनाने के लिए जोशी जी ने बहुत जल्द दूसरा कदम बढ़ाया उठाया।

वे कहते है उनके गांव में करीब 100 प्रतिशत ज़मीन बंजर हो चुकी थी। इसी लिए उनका लक्ष्य गांव में हरियाली लाना बन गया था। उन्होंने उस जमीन पर जैविक खेती का सहारा लेकर कई तरह की फसल लगाई और धीरे धीरे उनकी जमीन उपजाऊ हो गई।

डेरी में आग लगने से काफी बड़ा नुकसान झेला

जय प्रकाश जोशी ने इस डेयरी में अपनी जमाराशि का एक बहुत बड़ा भाग इन्वेस्ट किया था। परन्तु नियति कुछ और चाहती थी। इसी लिए दिनांक 22 अप्रैल, 2022 उनके जीवन में एक काला साया बन कर आया। उनके डेयरी फ़ार्म में भीषण आग लग गई। जिससे उन्हें लगभग 80 लाख रुपये की हानि हुई।

इस घटना से वे पूरी तरह से टूट से गए। वे कहते है धन का क्या उसे तो कल भी कमा सकते है, परंतु इस आग ने एक गाय और उसके बछड़े की जान ले ली। जो सबसे बड़ा दुख है। पास में लगे लीची और आम के कई पेड़-पौधों को भी भारी नुकसान हुआ।

हार नहीं मानी और पिथोरगढ़ में गन्ने की फसल लगाई

पिथौरागढ़ (Pithoragarh) में जय प्रकाश जोशी ने गन्ने की खेती की शुरुआत की। पिथोरागढ़ के साथ गन्ने की खेती का एक पुराना इतिहास है। एक समय में पिथौरागढ़ काफी बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती करता था। साथ ही यहाँ पर बनने वाला गुड़ विदेशो में भी प्रसिद्ध था। जोशी जी बताते हैं कि मलान गाँव (Malana Village) की ज़माने से कैलाश मानसरोवर यात्रा की जाती थी।

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