स्टूडेंट के 10वीं में सेकंड डीवीज़न आये, तो स्कूल से निकाल दिया गया था, आज वही IPS अधिकारी बन गया

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IPS Akash Kulhari
IPS Akash Kulhari Success Story In Hindi. IPS officer Akash Kulhari, who was once expelled from school for getting low marks.

Bikaner: हमनें बहुत सी वेब सीरीज देखी है। जिसमें यूपीएससी की तैयारी करने वाले केंडीडेट की कहानी बताई जाती है। एस्‍पिरेंट नाम की वेब सीरीज भी यूपीएससी की तैयारी करने वाले तीन फ्रैंड्स की है। जो की यूपीएससी की प्रेपरेशन साथ में करते है।

इन्‍ही रियल लाईफ कहानी के बीच में आज हम आपके पास यूपीएससी की तैयारी करने वाले एक ऐसे आईपीएस अधिकारी की कहानी लेकर आये है जिनकी कहानी रील स्‍टोरी के समान ही है, लेकिन पूरी तरह से रियल है। आज की हमारी मॉटीवेशनल स्‍टोरी आकाश कुल्‍हरि की है। आकाश कुल्‍हरि (Akash Kulhari) जोक‍ि राज्‍य राजस्‍थान (Rajasthan) के बीकानेर से ताल्‍लुक रखते है।

अपराध जगत के लिए खौफ आकाश कुल्‍हरि

आपको बता दे कि आईपीएस आकाश कुल्‍हरि (IPS Akash Kulhari) अपराध जगत के लोगों के लिए बुरे सपने के समान है। आज उनकी छवि एक ईमानदार आईपीएस अधिकारी की है। हमारी सोच हमेशा से ही यही रही है, कि आईएएस, आईपीएस एक 90 फीसदी अंक लाने वाला बच्‍चा ही बन सकता है। लेकिन आकाश कुल्‍हरि उन बच्‍चों में से है।

जिनके अंक भले ही स्‍कूल में अच्‍छे ना थे। लेकिन जीवन की सबसे अहम परीक्षा में उन्‍होंने सफलता के झण्‍डे गाड़ दिए। आपको बता दे कि एक समय ऐसा उनके जीवन में आया था। जब उन्‍हें स्‍कूल से दसवी के रिजल्‍ट के आने के बाद निकाल दिया गया था। उन्‍हें इसलिए स्‍कूल से निकाला गया था क्‍योंकि उनके नंबर दसवी में बहुत कम थे।

खराब प्रदर्शन कि वजह से निकाला गया था स्‍कूल से

भले ही उनके नंबर दसवी मे कम हो लेकिन उनके हौसले बहुत ऊँचे थे। उनके पास दृढ़ संकल्‍प और परिश्रम का हथियार था। जिसके जरिए ही उन्‍होनें देश की सबसे अहम परीक्षा सिविल सर्विसेज को पास किया। जब तक उन्‍होंने इसे पास नही किया तब तक निरन्‍तर मेहनत की हार नहीं मानी।

जब उनका इंटरव्‍यू लिया गया तो आईपीएस अधिकारी आकाश जी कहते है, कि वह बचपन से ही पढ़ाई में ज्‍यादा होशियार नहीं थे। उनका लगातार स्‍कूल में खराब प्रदर्शन देखकर उनके माता पिता भी काफी परेशान रहते थे। आकाश जी ने प्रारंभिक पढ़ाई राजस्‍थान के बीकानेर से कंपलीट की है।

आकाश जी की शिक्षा एवं शुरूआती सफर

1996 में दसवी की परीक्षा में उनके सिर्फ 57 प्रतिशत ही अंक आये। कम अंक आने की वजह से स्‍कूल ने उन्‍हें निकाल भी दिया था। जिसके बाद उनका परिवार काफी परेशान हो गया उनके पिता जी ने बहुत मेहनत की उसके बाद आकाश का एडमिशन बीकानेर (Bikaner) के केंद्रीय विद्यालय में कराया।

यहाँ पर आकाश ने काफी परिश्रम किया और अपने परिश्रम की बदौलत वह बारहवी में 85 प्रतिशत अंक लाने में लाने में सफल हो गये। इसके बाद वह उच्‍च शिक्षा के लिए आगे बढ़े। उन्‍होंने बीकानेर के दुग्‍गल कॉलेज से 2001 में बीकॉम फिर उसके बाद दिल्ली स्‍कूल ऑफ सामाजिक विज्ञान से एमकॉम किया।

पहले प्रयास में निकाली सिविल सर्विसेज परीक्षा

एम कॉम करने के दौरान ही आकाश ने यूपीएससी (UPSC) की प्रेपरशन शुरू की। उन्‍होंने अपनी तैयारी इतनी जबरदस्‍त की। पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को निकालने में सफल हो गये। 2006 में वह इस परीक्षा को पहले अटेम्‍प्‍ट में पास कर लिये। परीक्षा की तैयारी के समय 2005 में आकाश ने एम फिल भी कंपलीट किया।

आकाश बताते है कि उनकी माँ शुरू से ही चाहती थी कि में एक अधिकारी बनूँ। इसलिए अपनी माता कि चाहत को सम्‍मान देते हुए उन्‍होंने स्‍नातक के बाद एमबीए ओर कॉरपोरेट मे नौकरी को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने को चुना।

आकाश बताते है कि इस परीक्षा के लिए उन्होंने कोई भी लापरवाही नहीं की, पूरी जान इसमें झोंककर कड़ी मेहनत की। इसलिए वह इस परीक्षा को पहले ही प्रयास में निकाल पाये। आकाश के एक छोटे भाई भी है जोकि अपने बडे भाई आकाश से प्रेरणा लेकर इसी मार्ग पर चले। वह भी अपने भाई की ही तरह इस परीक्षा को निकालने में सफल हुए।

आज वह भी यूपीएससी परीक्षा निकालकर एक आधिकारी बन चुके है। कम अंक लाकर भी पहले अटेम्‍प्‍ट में इस परीक्षा को निकाल पाना किसी भी कैंडीडेट के लिए बहुत बड़ी बात होती है। अपने प्रदर्शन से आकाश ने ना सिर्फ कंम अंक लाने वाले विद्यार्थियों को उम्‍मीद की किरण दी बल्‍कि उनका हौसला भी बढ़ाया। आकाश जी बधाई के पात्र है। इसलिए हम सफलता पर आकाश जी को बधाई देते है।

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