Sunday, October 17, 2021
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पिता को हस्ताक्षर हेतु कलेक्टर ऑफिस के चक्कर लगाते देख बेटी ने खाई कसम, बनी कलेक्टर

IAS Rohini Bidari

Photo Credits: Twitter

Chennai: अक्सर ये सुनते हुए मिलता है कि लोग गरीबो की मदद करते है, उनकी हर विकट परिस्थितियों में साथ देते है। अगर कोई सरकारी काम मे वो फंस जाते है, तो उनको सही रास्ता बताते है, लेकिन ये बात केवल कागजो ओर मुंह जुबानी ही सुनी जाती है। ऐसे देखने को नही मिलता। गरीब को गवार समझकर उसको अपमानित करदिया जाता है।

किसी भी सरकारी दफ्तर में दस्तखत करवाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाना कोई अचम्भे वाली बात नहीं है। यह सच्चाई है कि चाहे कोई भी प्रमाण पत्र बनाना हो अनुमति लेनी हो या फिर किसी अन्य कागजात पर अफसरों या कर्मचारियों की आवश्यकता हो लोगों को बिना किसी कारण इधर-उधर के धक्के खाने पड़ते है।

कई बार तो वो इतने धक्के खाता है कि थक कर उससे हार मान लेता है। क्योंकि उसकी गुहार कोई नही सुनता, नौकरशाही हर स्थान पर अपना प्रभाव बनाए हुए है। आज हम आपको महाराष्ट्र निवासी रोहिणी (Rohini Bidari) जो कि एक किसान परिवार (Farmer Family) से आती हैं, उनकी कहानी (Story) बता रहे हैं। उनके पिता किसान हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी विद्यालय से हुई। तत्पश्चात उन्होंने अपने परिश्रम से सरकारी इंजीनियरिंग महाविद्यालय में दाखिला लेने में सफल रहीं।

इसके बाद रोहिणी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं। उन्होंने खुद के बदोलत तैयारी कीं, कोई भी निजी शिक्षण संस्थान की सहायता लिए बिना वह आईएस की परीक्षा (IAS Exam) पास कीं वे बताती हैं कि सरकारी विद्यालयों में अच्छे शिक्षकों की कमी नहीं है अगर कमी है, तो सुविधाओं की।

आईएस बनने की प्रेरणा

जब रोहिणी (Rohini Bidari) की आयु 9 वर्ष की थीं। उस वक़्त सरकार के द्वारा किसानों के लिए कुछ योजनाएँ लाई गई थी। उस योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु उनके पिता को सरकारी दफ्तरों में अफसरों के बीच काफी धक्का खाना पड़ रहा था।

उस समय रोहिणी (Collector Rohini Bidari) ने अपने पिता को चिंतित देखकर इसके बारे में बात करते हुए पूछा कि आप क्यूँ परेशान हैं, आप क्या कर रहे हैं, आम जन की परेशानी का निवारण करने की जिम्मेदारी किसकी है? उनके पिता ने कहा “जिला कलेक्टर” (District Collector)।

अपने परेशान पिता से इस शब्द को सुनते हीं रोहिणी के दिलो-दिमाग में यह शब्द बेठ गया और उन्होंने मन हीं मन यह ठान लिया कि जिस अफसर का दस्तखत हेतु, उनके पिता को उनका चक्कर लगाना पड़ रहा है, वह वही अधिकारी बनेंगी।

आईएस बनकर कर रहीं हैं लोगों की सेवा

वह अपने जिले की प्रथम महिला आईएस अधिकारी (Woman IAS Officer) बनी। अपने पिता की बात को स्मरण करते हुए उन्होंने अपने कार्य क्षेत्र में आपना पग रखा। अपने वाक्य कौशल और भाषाई ग्यान को भी बढ़ाया हैं। अब वे सरलता से तमिल भाषा बोल लेती हैं, रोहिणी (IAS Rohini Bidari) अपने सुन्दर विचारधारा और शालीनता से लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हैं।

ENN Team
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