पंजाब के मशरूम किंग ने एक कमरे से प्रारम्भ किया था अपना बिजनेस, अब सालाना 1.25 करोड़ कमा रहे

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Punjab mushroom king Sanjeev Singh
Punjab mushroom king Sanjeev Singh set example of new farming trend. How The Mushroom King Of Punjab Earns Rs. 1.25 Crore per Year.

Photo Credits: Twitter

Ludhiana: भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत हर तरह की सब्जियां उंगाई जाती है। कुछ सब्जियां ऐसी होती है जो स्वास्थ्य पेट के साथ किसान को भी मालामाल बना देती है। भारत मे आज भी कई गांव ऐसे है, जो मशरूम का नाम भी नही जानते है।

गांव के लोगो को खेती (Farming) के प्रति इतना जागरूक किया जा रहा है कि वो सभी पौष्टिक सब्जियों के बारे में जान सकें। उनको उंगा कर उनका सेवन कर अपने जीवन को स्वस्थ बनाए सके। पिछले कुछ सालों में किसानों का रुझान मशरूम की खेती की तरफ तेजी से अग्रसर हो रहा है, अगर इसकी बारीकियों को समझ लिया जाए तो मशरूम की खेती बेहतर आमदनी का जरिया बन सकती है।

बस कुछ बारीकियों का ध्यान रखना होता है, जिससे बाजार में मशरूम का अच्छा दाम प्राप्त हो सके। अलग-अलग राज्यों में किसान मशरूम की खेती (Mushroom Cultivation) का प्रशिक्षण लेकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, इसमें ज्यादा जगह की भी समस्या नही है और कम समय के साथ ही इसकी खेती में लागत भी बहुत कम लगती है, जबकि इसमें होने वाला मुनाफा जितनी लागत लगती है उससे कई गुना अधिक हो जाता है।

काफी कम लोग होंगे, जो मशरूम के विषय में जानते होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग मशरूम को सांप के छत्ते का नाम दिया करते थे, लेकिन दिन प्रतिदिन इसकी महत्त्वता बढ़ती जा रही है।‌ अब लोग इसका सेवन करना बेहद पसंद कर रहे हैं। आज हमारे देश के अधिकतर घरों में लोगों को मशरूम की सब्जी और अचार बेहद पसंद है, जिसकी वजह से इसकी खेती हर जगह पर की जा रही है।

हमारी यह प्रस्तुति एक ऐसे किसान की है, जो मशरूम की खेती से करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं। आज कल तो इतनी सुविधा हो गई है कि मशरूम की खेती के लिए किसान किसी भी कृषि विज्ञान केंद्र या फिर कृषि विश्वविद्यालय में जाकर आसानी से प्रशिक्षण ले सकते हैं।

पंजाब निवासी संजीव सिंह

संजीव सिंह पंजाब के पहले ऐसे किसान हैं, जिन्होंने मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) प्रारंभ की। उन्होंने बर्ष 1992 में मशरूम की खेती प्रारंभ किया और आज लगभग 2 करोड़ का वार्षिक कमा रहे हैं। उन्होंने यह जानकारी दिया कि वह केवल 25 वर्ष की आयु में खेती के बारे में जानकारी एकत्रित किया। उन्होंने दूरदर्शन चैनल पर चल रहे कृषि के कार्यक्रम को देखा और मशरूम की खेती के बारे में जानकारी ली, फिर उन्होंने खेती का शुभारंभ किया।

नहीं होती मिट्टी की ज़रूरत

उन्होंने बताया कि अगर हमें मशरूम की फसल उगानी हो तो इसके लिए अधिक क्षेत्र की अवश्यकता नहीं है। वर्टिकल फार्मिंग द्वारा हम बहुत ही कम क्षेत्र में मशरूम को उगा सकते हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके लिए मिट्टी की भी महत्तवता नहीं होती, बल्कि हम इसे ऑर्गेनिक खाद द्वारा उगा सकते हैं।

संजीव (Punjab Mushroom king Sanjeev Singh) ने यह भी बताया कि आज हर देश विकसित हो चुका है, परंतु पहले ऐसा कुछ नहीं था। प्रारंभिक दौर में मुझे बहुत सारी तकलीफों का सामना करना पड़ा। उन्होंने एक कक्ष बनवाया और मेटल की रेक पर मशरूम की खेती को आरंभ की।

हालांकि उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से 1 साल का कोर्स किया और मशरूम की खेती (Mushroom Farming) के विषय में अत्याधिक जानकारी एकत्रित की। अपनी खेती के दौरान उन्हें सबसे बड़ी परेसानी यह आ रही थी कि उन्हें मशरूम के बीज दिल्ली से मंगाने पड़ते थे।

लम्बी अवधि के बाद मिली इस क्षेत्र में सफलता

उन्हें तकरीबन 8 वर्षों तक कड़ी मेहनत करनी पड़ी तब जाकर उन्हें सफलता प्राप्त हुई। सन 2001 में संजीव को अपनी खेती में सफलता मिली, फिर उन्होंने साल 2008 में स्वयं की प्रयोगशाला शुरू की और बीज का वितरण शुरू किया। बहुत ही जल्द उन्होंने तकरीबन 2 एकड़ इलाके में मशरूम का उत्पादन और बीज निर्माण प्रारंभ किया। उसके बाद उनके बीज जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बिकने के लिए जाने लगे।

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