
Barmer: देश में हर वर्ष लाखो युवा अपने सपने को लिए प्रतियोगिता से भरे सफर की तरफ बढ़ते है। एक व्यक्ति का जीवन तब शुरू होता है, जब वो पहली बार स्कूल जाता है और कक्षा 12 के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। हर युवा अपने जीवन में एक उद्देश्य के साथ आगे बढ़ता है।
ज्यादातर युवाओं का उद्देश्य पढ़ लिख कर नौकरी करना होता है और कुछ व्यापार के तरफ भी बढ़ते है। देश में कई युवा ऐसे है, जो UPSC को अपना लक्ष्य और अपनी जिंदगी समझते है, यूपीएससी की परीक्षा काफी कठिन परीक्षा है, परंतु इस परीक्षा से मिलने वाला पद की शक्ति दुनिया को हिलाने की ताकत रखती है।

आज हम इस पोस्ट के माध्यम से एक ऐसे आईएएस अधिकारी (IAS Officer) की बात करेंगे, जो बार बार असफल रहा, परंतु हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहा और आज आईएएस बनकर देश की सेवा कर रहा है तो आइए जानते है आईएएस अधिकारी देव चौधरी की सफलता की कहानी।
वर्ष 2016 में चयनित हुए देव चौधरी की कहानी
आज हम इस पोस्ट के माध्यम से एक ऐसे आईएएस अधिकारी की बात करेंगे, जिन्होंने असफलता से बहुत कुछ सीखा हम बात कर रहे है, राजस्थान राज्य के एक रेगिस्तानी जिले बाड़मेर के अंतर्गत आने वाला एक कस्बा जहा पर एक आईएएस अधिकारी का जन्म हुआ राजस्थान अपनी संस्कृति से जाना जाता है।
यहां के एक युवा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हिंदी माध्यम से की और आईएएस बनने का सपना देखा, परंतु उन्हे UPSC की परीक्षा में नाकामयाबी ही हाथ लग रही थी। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और काफी संघर्षों के बाद उन्होंने अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया हम बात कर रहे है वर्ष 2016 के बेच के आईएएस अधिकारी देव चौधरी की।
सिविल सेवा देश के हर युवा का सपना
भारत का हर युवा सिविल सर्विस का सपना देखता है। परंतु कुछ हालातो के कारण अपने सपने को छोड़ देते है और कुछ हालातो को सुधारने के लिए यूपीएससी को अपना जुनून बना लेते है। ऐसा ही एक सपना गांव के एक जूनूनी युवक का भी था।
राजस्थान (Rajasthan) जिले के पश्चिमी रेगिस्तान के एक सबसे पुराने और आर्थिक रूप से पिछड़े जिले बाड़मेर (Barmer) के एक छोटे से गाँव से अपनी शुरुआती शिक्षा प्राप्त की। देव के पिता पेशे से एक शिक्षक थे और शिक्षा का महत्व समझते थे।
फिर कुछ सोच विचार के बाद वे अपने बेटे के भविष्य की बेहतरी के लिए गाँव से शहर में आ कर रहने लगे इसके बाद देव की पढ़ाई शहर के स्कूल में हुई। कक्षा 11वीं से उन्होंने एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की और कॉलेज की पढ़ाई बाड़मेर से ही की।
देव चौधरी ने भी बचपन से यूपीएससी का सपना देखा
देव कहते है की सिविल सर्विस में जाने का सपना उन्होंने बचपन से ही देख रखा था और जब उन्होंने अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर ली तब उन्होंने यूपीएससी की तैयारी प्रारंभ की। वे बताते है की शुरुआत उनकी बेहद कठिन थी, क्योंकि उन्होंने अपनी तैयारी जीरो से शुरू की थी, इसलिए उनके लिए पहला टास्क क्या पढना है और कैसे पढ़ना है? मुख्य परीक्षा के लिए लेखन पद्धति कैसे सुधारे। इसके साथ ही अच्छा स्टडी मैटेरियल और उसका इंग्लिश में होना एक हिंदी मीडियम के विद्यार्थी के लिए सच में काफी बड़ी चुनौती थी।
वर्ष 2012 में पहली बार परीक्षा दी
देव ने पहली बार परीक्षा वर्ष 2012 में दी और प्रीलिम्स परीक्षा पहले प्रयास में पास कर लिया। परंतु मुख्य परीक्षा में रह गए। फिर उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और एक बार फिर वर्ष 2013 में परीक्षा दी।
Under project "Gyan Deep", Rajkot District Panchayat president @bhupatbodarbjp donated more than 1500 books today. We have received 3800 books as of now. This will continue till we reach 50k @CMOGuj @jitu_vaghani @brijeshmeja1 @pkumarias @vmittra @RajkotInfo @InfoGujarat pic.twitter.com/4PoA6hDfyg
— DDO Rajkot (@DDORAJKOT1) March 16, 2022
दूसरे प्रयास में वे प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनो में सफल हुए परंतु वे चयनित ना हो सके। वर्ष 2014 में वे चयनित तो हो गए, परंतु आईएएस अधिकारी के लिए नहीं। उनका सपना अधूरा था इसलिए उन्होंने एक बार फिर वर्ष 2015 में चौथी बार परीक्षा दी और वे अच्छे रैंक के साथ आईएएस बन अपना सपना पूरा किया।



