
Mohanlalganj: जी हां, बिल्कुल ठीक सुना आपने स्ट्रॉबेरी की खेती (Strawberry Farming) कर आप भी साल भर में 20 लाख से ज्यादा कमा कर अपनी आमदनी को 2 गुना बढ़ा सकते हैं, परंतु कैसे? तो आइए जानते हैं मोहनलालगंज (यूपी) के गांव गोपाल खेड़ा, के सिद्धार्थ सिंह के बारे में।
इन्होने एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी की नौकरी छोड़ केवल तीन चार लाख रुपयों की लागत से मात्र 1 एकड़ की जमीन पर खेती कर, साल भर से भी आधे समय (अमूमन 6 माह) में 20,00000 रुपए से भी ज्यादा की कमाई की और घर बैठे ही 2 से ढाई लाख रुपए महीने की कमा वे कर चुके हैं। इनकी मेहनत और लगन युवा पीढ़ी के लिए आदर्श है, खेती की नई तकनीक व नए नए हुनर सीख इन्होंने अपनी काबिलियत को एक नया मुकाम दिया हैं।
काबिलियत किसी राह की मोहताज नहीं और हुनरअपनी मंजिल खोज ही लेता है
आज की पढ़ी लिखी युवा पीढ़ी भी बेरोजगारी का दंश झेल रही है, ऊपर से सरकार द्वारा दिखाई जा रही लुभावनी नौकरियों के सपनो के पीछे भागने पर मजबूर है। इस भागती दौड़ती जिंदगी में आज की युवा पीढ़ी रोजगार के अवसर के स्वप्ना अपनी आंखों में लेकर मुकाम तलाश रही है।
वही हमारे देश के कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो अपनी पूंजी से या फिर बैंकों से लोन लेकर अपना निजी व्यवसाय या स्टार्टअप शुरू कर अपने साथ देश को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दे रहे है। आपदा काल के चलते पारंपरिक व्यवसाय ने लोगो से उनका कारोबार छीना वे अपने व्यवसाय को खुदके हाथो बंद करने पर मजबूर हो गए थे।
वही दूसरी तरफ वर्क फ्रॉम होम एवं घरेलू व्यवसाय जैसे खेतीवाड़ी, बागवानी टैरेस गार्डेनिंग, नर्सरी आदि ने लोगो को रोजगार के नए अवसर प्रदान किए है। पारंपरिक व्यवसाय में कई तरह की परेशानियां आती है, जैसे पाबंदी, लागत अधिक, समय के भीतर टारगेट पूरा करना, अन्य पर निर्भर होना आदि और महामारी के उपरांत आत्मनिर्भर भारत योजना ने युवाओं को अपना व्यवसाय करना सिखाया, जो लोगो को आजादी के साथ कई सारी सुविधा देता है।
शुरुआत खेती-बाड़ी के हुनर से
आइए जानते हैं कि किस तरह एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी में एक अच्छी खासी रकम पाने वाले सिद्धार्थ ने कैसे खेती की ओर अपना रुख किया। सिद्धार्थ बताते है की जब उनका काम में मन नहीं लग रहा था, तो उन्होंने अपने मौसेरे भाई राजेश सिंह जो किसानी का काम करते है।

उनके साथ वे मिलकर कुछ नया करने का विचार बनाने लगे और खेती करने का फैसला लिया शुरुआत में दोनों भाइयों ने स्ट्रॉबेरी की खेती (Strawberry Ki Kheti) से संबंधित सभी जानकारी को समझा और वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण लेकर आधुनिक तरीके से खेती को करना चाहा।
वे दोनो बताते है की उन्होंने 2 सप्ताह के भीतर एक लाख की कमाई स्ट्रॉबेरी की खेती से की। उन्होंने आगे बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए पॉलीहाउस तकनीक सबसे बेहतरीन मानी जाती है। सिद्धार्थ ने संपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि कम संसाधन के साथ फसल की सुरक्षा के लिए पॉलीटनल तकनीक, सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई और खरपतवार हटाने के लिए पॉलीमोल मल्चिंग बेस्ट ऑप्शन है।
स्वयं की नर्सरी और एक एकड़ खेत से की शुरुआत
इस पूरी प्रक्रिया में फसल तैयार करने में 400000 Ru की लागत लगी, परंतु कमाई इससे कहीं अधिक थी। उन्होंने अपने खेत में 70 क्यारियां लगाकर 50000 पौधे का रोपण किया। एक पौधे की कलम से 15 से 20 पौधे तैयार हो जाते हैं।

करीब डेढ़ माह के बाद पौधे तैयार हो जाते है और एक सीजन में उतने पौधो से करीब ढाई क्विंटर से भी अधिक फल प्राप्त होते है। वर्ष 2019 में सिद्धार्थ सिंह ने एक बार पुणे में 25000 पौधे लाकर अपनी स्वयं की नर्सरी की शुरुआत की।
करीब डेढ़ महीने में ही पौधे तैयार हुए और दिसंबर के पहले हफ्ते में उनके साड़े तीन कुंटल स्ट्रॉबेरी के फल निकले। जिससे उन्होंने अधिक मुनाफा कमाया। अब वे इस वर्ष दो महीने में 20 लाख की स्ट्रॉबेरी बेचने का लक्ष्य बनाए हुए है।
सिद्धार्थ की कहानी से लोगो को मिल रही प्रेरणा
सिद्धार्थ की कहानी से प्रेरित होकर पारंपरिक खेती करने वाले किसान भी अब आधुनिक खेती को अपना रहे है और खेती की तकनीक को जानने व सीखने का प्रयास कर रहें है। स्ट्रॉबेरी खेती से संबंधित नई जानकारी जुटाने के लिए क्षेत्रीय एग्रीकल्चर संस्थानों से संपर्क कर खेती के गुण सीखने का प्रयास कर रहे हैं। स्ट्रॉबेरी की खेती में लगने वाली लागत जुटाने हेतु कृषि सहकारी व निजी बैंक आदि से सहायता प्राप्त कर रहे हैं।



