
Rohtak: दोस्तों अब एक्सप्रेस वे का चलन आ गया है, तो स्पीड के कारण गाड़ियों में दुर्घटना के आंकड़े बढ़ रहे। और इन एक्सीडेंट्स में एक मेजर कारण होता है ड्राइवर को ड्राइविंग के दौरान झपकी लगना या नींद आ जाना (Blinking While Driving), तो देश के होनहार युवा ने इस समस्या का समाधान ढूंढ लिया है।
आज हम इसी अविष्कार की डिटेल्स के साथ चर्चा करने वाले हैं। जैसे जैसे देश की जनसंख्या बढ़ रही है, वैसे वैसे आवागमन का ट्रैफिक भी बढ़ता जा रहा है, देश की तरक्की में एक मजबूत रोड इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत बड़ा रोल होता है इसलिए आज सरकार देश मे अच्छी क्वालिटी के रोड्स का जाल बनाने में जी जान से लगी है छोटे रास्ते चौड़े किये जा रहे।
2 लेन रोड को 4 लेन बना रहे और 4 लेन रोड्स को 6 और 8 लेन्स की रोड में बदला जा रहा है, ताकि लोग तेजी से कम समय मे अपने मंज़िल तक पहुचे साथ ही सुरक्षित रहे, क्योंकि सकरे रास्तो में समय भी ज्यादा लगता है और एक्सीडेंट्स होने की संभावना भी ज्यादा होती है। आइये जानते हैं थोड़ा और विस्तार से।
ये अविष्कार कितना महत्वपूर्ण है
भारत में 2021 में हुए सड़क हादसों (Road Accidents) की ताजा रिपोर्ट पे नज़र डालें, तो आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि देश में सिर्फ वर्ष 2021 में सड़क दुर्घटनाओं में 1.55 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा औसतन 426 लोग प्रतिदिन या हर घंटे 18 लोगों का है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, भारत में दुर्घटना से होने वाली मौतों के अलावा 3.71 लाख लोग बुरी तरह घायल भी हुए जो बाद में कुछ अपाहिज की ज़िंदगी बिता रहे या लाचार हैं।
एनसीआरबी के रिपोस्ट जो ग्रह मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है के अनुसार इस बात की पुष्टि हुई है की सड़क हादसे में मरने वाले और घायल लोगो की संख्या वर्तमान आंकड़ों में सबसे ज्यादा पाई गई है। जबकि सड़क दुर्घटनाओं और घायल लोगों की संख्या में पिछले वर्षों की तुलना में कमी आई है।
रोजाना बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के कारण और निवारण
आम आदमी हो या खास सड़क सुरक्षा हर किसी के लिये एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। जैसे जैसे सड़क हादसों की संख्या तेजी से बढ़ रही उसके कारणों पे भी रिसर्च तेज हो रहा, जिसमे कुछ प्रमुख्य कारण हैं, ड्राइवर की लापरवाही, यातायात नियमों का उलंघन या उनकी जानकारी ही न होना, चालक द्वारा नशा करना और देर रात ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर की नींद लग जाना या झपकी आना, आज गाड़ियों की औसत स्पीड 60 से 80 किलो मीटर प्रति घंटे के आस पास होती है।
ऐसे में सिर्फ 2-5 सेकंड की झपकी भी पर्याप्त होती है दुर्घटना को अंजाम देने के लिये। इन दुर्घटनाओं से बचने के कुछ उपाय तो साधारण हैं, जैसे यातायात के नियमों का पालन करें, हेलमेट लगायें, सीट बेल्ट पहन के कार चलायें, नशा न करें। परंतु नींद लगना एक त्वरित घटना हो सकती है जिसका कई बार अनुमान भी नही लगता इसी का सॉल्यूशन आज आपको देने वाले हैं।
आइये जानते हैं किसने और कहा किया एन्टी स्लीपिंग ग्लास का अविष्कार
जानकारी के अनुसार इंस्टीटूट ऑफ इंजिनीरिंग एंड टेक्नोलॉजी एम डी यू रोहतक अर्थात हरियाणा के बी टेक (B Tech) में पढ़ने वाले 2 छात्र हिमांशु और साक्षी ने सोचा क्यों न ऐसे किसी तकनीक पे प्रोजेक्ट बनाएं, जिससे समाज की किसी खास समस्या का समाधान निकले।
उन्हीने देखा पंजाब और हरियाणा में सबसे ज्यादा दुर्घटना ड्राइवर के सो जाने के वजह से हो रही है, तो बस इसी के समाधान निकालने वो जुट गए और कुछ महीनों के मेहनत से बनाया एक खास चश्मा जिसका ग्लास (Anti Sleeping Glass) नींद आने पे ड्राइवर को अलर्ट कर देता है।
जानते हैं इस चश्मे की वर्किंग प्रणाली
इस चश्मे में जो ग्लास लगाए गए हैं, वो एक सेंसर की तरह काम करते हैं, जो ड्राइवर को आंखों की पलको के झपकने के पैटर्न को रीड करता है और जैसे ही सेंसर को पलकों के झपकने के अंतराल में कमी नज़र आती है और पलकें नीचे की ओर झुकी रहती हैं।
ये सिग्नल को साथ मे जुड़े सर्किट तक पहुँचा देता है, जिससे अलर्ट अलार्म बजने लगता है और चालक को तुरंत संभलने का मौका मिल जाता है। इसे और एडवांस बनाते हुए आगे इसी प्रोजेक्ट में ये सिग्नल्स को मोबाइल में भी भेजने का प्रावधान होगा, जिससे साथ बैठे व्यक्ति को भी ड्राइवर की स्तिथि का अनुमान लग सके।



