असफलताओं से नही मानी हार, लंबे संघर्ष के बाद गुंजन द्विवेदी बनी IAS अफसर: Success Story

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IAS Gunjan Dwivedi
Success Story Of IAS Gunjan Dwivedi. Gunjan Dwivedi became IAS after a long struggle. Gunjan Dwivedi Failed Many Times Then She Became UPSC Topper.

File Photo Credits: Twitter

Lucknow: असफलता और सफलता में में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता है। यूपीएससी परीक्षा सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा में सम्लित होना है। ऐसे में इस परीक्षा में सफल ना होना ये तो सामान्य है। लेकिन इससे बड़ी बात यह है कि अपनी गलतियों से सिख लेकर आगे बढ़ना। हमेशा आगे बढ़ते चले जाना।

यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) कोई सामान्य बात नही है उसकी कठिनाई से हर कोई वाकिफ है, जो परीक्षा देने और सफल होने की सोच रखते हैं वे बहुत अच्छे से समझते हैं कि कम से कम एक से दो साल कड़ी मेहनत करनी होगी, तभी सफलता हासिल होगी।लेकिन कई बार कठिन मेहनत के बाबजूद निराशा ही हाथ लगती है, क्योंकि शायद कहीं कोई रणनीति सही नही बन पाती है। ऐसा ही कुछ हुआ लखनऊ की गुंजन द्विवेदी (Gunjan Dwivedi) के साथ। लेकिन उन्होंने हार नही मानी।

गुंजन द्विवेदी आईएएस की परीक्षा (IAS Exam) दे रहे उन अभ्यर्थी के लिए प्रेरणा हैं जो पहले या दूसरे प्रयास में प्री भी नहीं निकाल पाते। गुंजन के साथ भी IAS परीक्षा के दौरान कुछ ऐसा ही हुआ था। उन्होंने ग्रेजुएशन खत्म करते ही सिविल सर्विसेस की तैयारी में जुट गई। परीक्षा देने के लिये न्यूनतम आयु सीमा से कम थीं, तो उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयारी शुरू कर दी।

उन्होंने इस समय का सही इस्तेमाल करने के लिये परीक्षा की तैयारी करने का विकल्प चुना। दो साल पूरी मेहनत के साथ तैयारी करने के बाद उन्होंने पहली बार परीक्षा दी लेकिन न पहली बार न ही दूसरी बार में भी उनका प्री-परीक्षा में सेलेक्शन हुआ। असफलता से निराश हुई, लेकिन अपने परिवार और साथियों के सहयोग से दोबारा खुद को मजबूत बनाया।

तीसरी बार में उन्होंने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुये न केवल कामयाबी पायी, बल्कि टॉप अभ्यर्थी (UPSC Topper) में भी शामिल हो गयीं। गुंजन की कहानी उन अभ्यर्थी के लिये प्रेरणास्त्रोत है, जो खूब कड़ी मेहतन के बावजूद सफल न होने पर निराशा के समंदर में खुद को समा लेते हैं, क्योंकि इस परीक्षा में सफलता का दूसरा नाम ही असफलता से ना हारना है।

बचपन का सपना किया साकार

गुंजन (IAS Gunjan Dwivedi) के पिता रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर हैं और बड़ी बहन भी इनकम टैक्स ऑफिसर हैं, ऐसे में उन्हें बचपन से ही इन सर्विसेस की सारी इन्फॉर्मेशन थी और यह जानकारी थी कि कैसे इस क्षेत्र में कदम रखकर समाज के एक बड़े विकास के लिये काम किया जा सकता है। इन वजहों से उनका झुकाव बचपन से ही यूपीएससी की तरफ हो गया।

कक्षा 12 के बाद जब कैरियर चुनने का समय आया तो उन्होंने उस विषय को प्राथमिकता दी जो यूपीएससी के हिसाब से सही रिसर्च करके ग्रेजुएशन के लिये विषय चुना। उनकी बड़ी बहन जोकि यूपीएससी की ही तैयारी कर रही थी, उनसे भी गुंजन को बहुत हेल्प मिली। उन्होंने दिल्ली के दौलत राम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में डिग्री ली। उनकी उम्र इस समय 21 साल थी तो उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए मन लगाकर पढ़ाई शुरू कर दी।

पोस्टग्रेजुएशन उन्होंने नहीं किया और ग्रेजुएशन के तीनों साल बहुत अच्छे से मन लगाकर यूपीएससी परीक्षा को ध्यान रखते हुये कड़ी मेहनत से पढ़ाई की। 2014 में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने अपना पहला अटेम्पट 2016 में दिया, फिर 2017 में। दोनों में ही वे प्री का रास्ता भी क्लियर नही कर पाई। 2018 में उन्होंने 9वीं रैंक हासिल की और पिछली सारी असफलताओं को दरकिनारे कर।

असफलता से सीखा

गुंजन ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि मैंने अपने जीवन के चार साल देने के बाद भी जब प्री तक का मुंह नहीं देखा तो मन मे निराशा तो होती थी लेकिन परिवार और उनके दोस्त इतना ज्यादा सहयोग करते थे और कुछ नकारात्मक सोचने का समय ही नही मिलता था। सब्जे सहयोग से होसलो को फिर से उड़ान मिल जाती थी।

अपनी पुरानी असफलता से सीखते हुये वे दोबारा तैयारी में लग जाती थीं। यहां तक की तीसरी बार जब उन्होंने परीक्षा उतीर्ण कर ली तब भी वह परिणाम आने के पहले अपने चौथे प्रयास की तैयारी में लग गयी थीं और दो महीने से प्री के लिये पढ़ाई शुरू कर दी थी।

उन्होंने ठान लिया था कि चाहे जो हो, चाहे जितनी बार असफल हों पर सफलता तो यूपीएससी में पके रहेंगे है। कम से कम तब तक नहीं रुकना जब तक हिम्मत ना हार जाये। ऐसी हिम्मत और जुनूनू के आगे सफलता भी कब तक दूर रहेगी, आखिर आ ही गिरी गुंजन की झोली में सफलता। परिणाम आने पर उन्हें खुद नहीं भरोसा हुआ कि वे यह रैंक ला सकती हैं।

गुजंन कहती हैं, पढ़ाई करने के लिए नोट्स बनाना बहुत जरूरी है। लेकिन खुद पर भरोसा रखना भी बहुत महत्वपूर्ण है। किसी की बातों में नही आना कभी असफलता से डरना नही यदि आपने लक्ष्य बना लिया है, तो उसे पाकर ही रहिये। यूपीएससी को क्लियर करने के लिए कठिन मेहनत के साथ धैर्य रखना भी बहुत महत्वपूर्ण है।

साथ ही हर सब्जेक्ट को बारीकियों के साथ पढ़ना होगा। शुरुआत से ही आप न्यूज़पेपर पढ़ना अपनी आदत में डाल लें। आसपास हो रही घटनाओं के बारे में जागरूक रहें। अगर आप खुद को मोटिवेट रखकर यूपीएससी की तैयारी करेंगे, तो सफलता को प्राप्त करने से कोई भी नही रोक सकता।

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