आर्थिक तंगी के बावजूद गरीब परिवार के बच्चे ने सबसे महंगे खेल में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर चौका दिया

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Deepak Yadav Taekwondo
Deepak Yadav from Ghazipur won Bronze medal in international Taekwondo event. Deepak talent and hard work story.

Ghazipur: किसी चीज को हासिल करने का जुनून ही व्यक्ति को उस चीज को हासिल करने में मदद करता है, जरूरी नहीं है कि हर प्रतिभा के पास पर्याप्त साधन हो देश में कुछ प्रतिभाएं ऐसी भी हैं, जिनके पास कुछ ना होते हुए भी सब कुछ है।

अक्सर लोगों को अभाव के कारण अपने सपनों से दूर हटते देखा है, परंतु आग में तप कर ही सोना निखरता है। उसी प्रकार बाधाओं से लड़ते हुए हैं, इंसान मूल्यवान बनता है। जरूरी नहीं होता कि हर व्यक्ति को सब कुछ मिले परंतु ईश्वर हर व्यक्ति में एक गुप्त प्रतिभा देते है, जो मार्ग मिलने पर निखर जाती है।

ऐसी ही एक प्रतिभा है गाजीपुर के दीपक यादव (Deepak Yadav) की जो एक ताइक्वांडो प्लेयर हैं। साधारण से परिवार से ताल्लुक रखने वाले दीपक यादव ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से अखिल भारतीय अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता (International Taekwondo Competition) में ब्रॉन्ज मेडल (Bronze Medal) को अपने नाम कर माता पिता के साथ-साथ अपने राज्य का भी नाम रोशन किया। आइए जाने की किस प्रकार दीपक ने यह सफर तय किया।

गाजीपुर के दीपक की कहानी

उत्तराखंड के गाजीपुर जिले के अंतर्गत आने वाले गांव अंधऊ के निवासी दीपक यादव बहुत ही साधारण परिवार से है। उनके पिता पेशे से एक प्लंबर है और माता एक ग्रहण है। दीपक के पिता मात्र कक्षा 10 तक ही पड़े थे और उनकी माता कक्षा आठवीं तक ही शिक्षक थे।

उनके परिवार में खेल से संबंधित कोई भी नहीं था, परंतु इसके बाद भी दीपक ने सबसे खर्चीली खेल में अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया और वे सफल भी हुए। दीपक अपने माता-पिता की दूसरे नंबर की संतान है। वे तीन भाई बहन हैं और उनके पिता मात्र 7 से 8000 RS महीने का कमाते हैं ऐसे में अपने 3 बच्चों का पालन पोषण करना महंगाई के समय में काफी मुश्किल होता है।

ऐसे शुरुआत की ताइक्वांडो खेल की

दीपक बताते हैं कि उन्होंने बचपन में अपने मित्रों द्वारा इस खेल को खेलते हुए देखा करते थे। जब भी अपने मित्रों को ताइक्वांडो खेलते हुए देखा करते थे तो उनके मन में भी इस खेल को खेलने की इच्छा जागृत हुई।

साथ ही वे स्कूल जाते थे तो रास्ते में पढ़ने वाली एक एकेडमी में बच्चों द्वारा ताइक्वांडो की प्रैक्टिस किए जाती थी। तब वे उन्हें देखा करते थे ऐसे में उनका लगाव इस खेल के प्रति बढ़ता चला गया। वे भी इस खेल को खेलना चाहते थे, परंतु परिवार वाले उनको इस खेल के लिए मना करते थे।

वे खेल के प्रति इतना झुक गए थे कि उन्होंने शुरुआत में बिना किट और बिना कोच के प्रेक्टिस करना शुरू कर दिया था इसी बीच उनकी पहचान वंश अकादमी के संस्थापक विपिन यादव से हुई।

विपिन में दीपक के अंदर इस खेल के प्रति जुनून और जज्बे को देखा, तो उन्हें अकादमी में एडमिशन दिला दिया। दीपक के परिवार मैं उनके खेल के प्रति लगन से जरा भी खुश नहीं थी, क्योंकि वह एक गरीब परिवार था और अपने बच्चे से अपने परिवार को संभालने की उम्मीद करता था।

बेहद संघर्षों के बाद माता-पिता का नजरिया बदलने में कामयाब हुए दीपक

दीपक के परिजन उनके खेल के प्रति तब नॉर्मल हुए जब दीपक ने वर्ष 2021 में डिस्ट्रिक्ट स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल की। दीपक बताते हैं कि उन्होंने अपने माता-पिता को अपने खेल के प्रति मनाने के लिए काफी प्रयास किए परंतु कुछ नहीं हुआ। तब उन्होंने 2020 से लगातार कठिन परिश्रम किया और वर्ष 2021 में गोल्ड मेडल हासिल किया तब जाकर अपने परिवार से सपोर्ट मिला।

इसके बाद दीपक ने अपने परिश्रम को और ज्यादा बढ़ा लिया और अच्छी तरह मेहनत करके दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय अंतर्राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में ब्रोंज मेडल हासिल किया यह प्रतियोगिता दिल्ली के त्याग राज स्टेडियम में आयोजित की गई थी।

दीपक के कोच विपिन यादव बताते हैं कि दीपक के परिवार दीपक को दिल्ली भेजने के लिए एफर्ट नहीं कर पा रहे थे उन्होंने सभी खिलाड़ियों का रिजर्वेशन एसी कोच में कराया, परंतु अंतिम क्षणों में दीपक का परिवार कुछ पैसों के साथ दीपक को दिल्ली भेजने की इच्छा जता रहे थे। ऐसे में अकादमी की तरफ से दीपक की रहने और खाने की व्यवस्था की गई और दीपक इस प्रतियोगिता के भाग बने।

भविष्य की तैयारी में जुट गए हैं दीपक

दीपक ने अपने जीवन में ढेरों अभाव देखें इसका उदाहरण यह भी है कि जब भी इस प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे। उस समय उनके पास इस खेल को खेलने के लिए प्रोफेशनल किट भी नहीं थी। उस दौरान अन्य प्लेयर से उनके लिए किट का इंतजाम किया गया।

उसके बाद उन्होंने इस खेल को खेला। दीपक अपनी कामयाबी से बेहद खुश हैं और अब वे आगामी प्रतियोगिता जो दक्षिण कोरियाई ताइक्वांडो प्रतियोगिता कुकीयां दिल्ली में ही आयोजित होने वाली है।

वर्ष 2023 में उसकी तैयारी में लगे हुए हैं। दीपक के कोच विपिन कहते हैं कि उन्हें दीपक पर पूरा भरोसा है कि वे आगामी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल करें। दीपक को उनके उज्जवल भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं देते।

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