
Begusarai: वर्तमान समय में भी काफी शिक्षित और होनहार विद्यार्थी कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हजारों वर्ष पहले से चला आ रहा रोजगार का मजबूत साधन कृषि को माना गया है।
वर्तमान समय में भारत का 75 प्रतिशत युवा खेती-किसानी के बदौलत अपना जीवन चला पा रहा है। समय के साथ खेती और अन्य पारंपरिक फसलों में काफी परिवर्तन देखने को मिला है। आज से कुछ वर्षों पहले हर घर में अनाजों का भंडार लगा होता था, परंतु धीरे-धीरे जमीन ने अपनी उर्वरक शक्ति को खो दिया है। फल स्वरूप अब किसान पारंपरिक खेती से अपना जीवन काफी मुश्किलों से चला पा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि कई किसान नुकसान होने पर आत्मह-त्या जैसा घातक कदम भी उठा लेते हैं। इसीलिए कृषि विज्ञान के क्षेत्र में काफी तरक्की देखने मिल रही है। आज का युवा ठंडे इलाकों में भी उगने वाली फसलों को भारत में तकनीकों के माध्यम से उगा रहा है।
बिहार में हो रही सेब की खेती
दोस्तों सबसे ज्यादा सेब की खेती ठंडे प्रदेशों जैसे जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश आदि में होती है। इन प्रदेशों से लगभग 1 वर्ष में 20 लाख टन से भी ज्यादा सेब का उत्पादन होता है। इन्हीं प्रदेशों से भारत और विदेशों में सेव फल की सप्लाई होती है। परंतु अब बिहार के बेगूसराय में भी सेब की खेती (Apple Farming) हो रही है।
जी हां दोस्तों बिहार के बेगूसराय (Begusarai) में रहने वाले किसान अमित ने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सेब की फसल लगाने की शुरुआत की है। अमित कुमार (Amit Kumar) इन सेब की फसल से हर वर्ष लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अमित कुमार बीएससी एग्रीकल्चर के विद्यार्थी रहे है। एग्रीकल्चर से संबंधित सभी तकनीकों को उन्होंने गहन अध्ययन करके सीखा है, फल स्वरूप आज भी ठंडे प्रदेशों में उगने वाली फसल को अब वे बिहार में अपनी तकनीक से होगा रहे हैं।
विशेष किस्म की होती है खेती
दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं कि सेब की खेती ठंडे प्रदेशों में होती है, परंतु इसमें एक किस में ऐसी है जो देश के सबसे गर्म प्रदेश में उगती है। जैसा कि हम जानते हैं कि राजस्थान भारत का सबसे गर्म प्रदेश है यहां पर इस फसल की खेती की जाती है। बिहार राज्य में भी 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान होता है, इसीलिए यह फसल यहां भी संभव है। सेब की इस किस्म का नाम “हरमन 99” है।
आपको बता दें इस किस्म की खेती औरंगाबाद जिले में भी होती है। अमित कुमार बेगूसराय में अपनी 4 कट्ठा जमीन पर करीब 84 पौधे लगाकर खेती कर रहे हैं। अमित के द्वारा उगाया जा रहा यह फल का साइज आकार और स्वाद एकदम कश्मीर के सेब की तरह ही है।
फल को लगाने की प्रोसेस
दोस्तों आपको बता दें इस फल के बीजों का सीधा रोपण नहीं किया जाता, सबसे पहले इसके पौधे की नर्सरी बनाई जाती है। उसके बाद इन नर्सरी से प्राप्त पौधों को थोड़ी-थोड़ी डिस्टेंस में लगाया जाता है। आपको बता दे सबसे पहले इस वृक्षारोपण के लिए आधा फीट गहरा गड्ढा खुद आ जाता है।
उस गड्ढे में रोग नाशक दवा का छिड़काव करके वृक्षारोपण किया जाता है। 1 से 2 दिन के बाद सेब की फसल में ड्रिप सिंचाई विधि से सिंचाई की जाती है। 6 से 8 महीनों में यह वृक्ष फल देने प्रारंभ कर देता है मार्केट में इस फल की कीमत लगभग 100 RS प्रति किलोग्राम के हिसाब से होती है।
बाजार में बिकने वाले सेब की कीमत
हम जानते हैं कि बाजार में सेब की कीमत अलग-अलग होती है, क्योंकि कुछ सेवफल भारत में उगाए जाते हैं, तो कुछ कश्मीर याने ठंडे प्रदेशों से आते हैं। ठंडे प्रदेशों से आने वाले सेब की कीमत लगभग 80 से 100 RS प्रति किलोग्राम होते हैं।
वही गर्म प्रदेशों में उगने वाले फल की कीमत लगभग 50 से 60 RS प्रति किलोग्राम होती है। सेब के एक पेड़ से साल भर में करीब 10 से 20 KG सेब प्राप्त होते हैं। आप सोच सकते हैं कि 86 पेड़ों से अमित कुमार कितने रुपए कमाते होंगे।




