
Muzaffarpur: आज से कुछ समय पहले प्लास्टिक से बनी पॉलिथीन का उपयोग किया जाता था, यह पॉलिथीन काफी ज्यादा नुकसान देय हुआ करती थी। इसका सबसे बड़ा नुकसान मुख जानवरों को झेलना पड़ता था। कई बार लोग पॉलिथीन में बचा हुआ खाना भरकर कचरे के ढेर में रख देते थे, ऐसे में जानवर खाने के साथ पॉलिथीन भी खा लिया करते थे, जिससे उनकी असमय मृत्यु हो जाती थी।
यह समस्या धीरे-धीरे काफी बढ़ती जा रही थी, इसके अलावा प्लास्टिक पॉलिथीन मिट्टी में डीकंपोज नहीं होती, बल्कि हजारों साल तक वह उसी तरह जमीन पर पड़ी रहती है। इस स्थिति के चलते मृदा प्रदूषण का भी खतरा बढ़ता है। दोस्तों आज से कुछ समय पहले सिंगल यूज प्लास्टिक से कई तरह की चीजें बनती थी जैसे डिस्पोजल पॉलिथीन और ना जाने क्या-क्या।
इस स्थिति को समझते हुए प्लास्टिक पॉलीथिन डिस्पोजल पर रोक लगा दिया गया है। मार्केट में आप कपड़े से बनने वाले झोले का इस्तेमाल होता है और डिस्पोजल के नाम पर मिलने वाले कप प्लेट और दो ना अब कई तरह की चीजों से बनाए जा रहे हैं, जो धरती को नुकसान नहीं पहुंचाती।
मक्की के छिलके से बन रहे हैं प्लेट कप और झोला
हालातों को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है, जिस वजह से मार्केट में ढेर सारी प्रोडक्ट जो उपयोगी है, उनके इस्तेमाल पर भी बैन लग गया है, इसीलिए उन उपयोगी वस्तु के निर्माण के लिए अन्य विकल्प की खोज की गई जो है, मक्के के छिलके।
जी हां दोस्तों मक्के की छिलके से अब मार्केट में मिलने वाले डिस्पोजेबल प्रोडक्ट (Corn Products) मिल रहे है। जो लोगों के लिए काफी उपयोगी है। बिहार (Bihar) की एक बेटे ने इन प्रोडक्ट का निर्माण किया है। इस बेटे ने कप प्लेट और डिस्पोजेबल झोले का भी निर्माण किया है, जिससे चारों तरफ इस लड़के की वाहवाही हो रही है।
बिहार के लाल ने बनाएं यह प्रोडक्ट
आपको बता दें बिहार राज्य के अंतर्गत आने वाले मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के फन की तुर्की ब्लॉक क्षेत्र के मुरारपुर गांव के रहने वाले 26 वर्षीय मोहम्मद नाज ने इस टेक्नोलॉजी का आविष्कार किया है। मोहम्मद नाज (Mohammad Naaz) के द्वारा मक्की के छिलके से कप, प्लेट, पत्तल, कटोरा जैसे प्रोडक्ट का निर्माण सफलतापूर्वक कर लिया गया है।
इसके साथ ही वे 24 स्कूल के करीब 1000 बच्चों को अपने द्वारा निर्मित इस टेक्नोलॉजी का फायदा और प्रोसेस बच्चों को सिखाइए। वैज्ञानिकों का भी मानना है की मक्की के छिलके से प्लास्टिक से बनने वाले ढेरों प्रोडक्ट को बनाया जा सकता है या नहीं या प्लास्टिक के स्थान पर एक बेहतरीन विकल्प साबित होने वाला है। नाज के इसने की भरे कारनामे को दे लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।
इस तरह पाई सफलता
मिली जानकारी से पता चला है कि मोहम्मद नाज शुरू से ही पर्यावरण के लिए कुछ बेहतरीन करना चाहते थे, उनका दिमाग इन चीजों में काफी तेज चलता है। उनके नॉलेज के बल पर उन्हें अच्छी कंपनी में नौकरी का ऑफर भी प्राप्त हुआ, परंतु उन्होंने उस ऑफर को ठुकरा कर कुछ बेहतरीन करने के बारे में सोचा।
वे चाहते थे कि प्लास्टिक के स्थान पर कुछ ऐसा विकल्प निकाला जाए, जिससे प्रकृति को भी नुकसान ना हो और आम आदमी का काम भी चलता रहे। वे बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहले बांस का प्रयोग करके कप और प्लेट का निर्माण किया परंतु वह सफल रहे इसके बाद उन्होंने मक्की के छिलके का प्रयोग कर कप प्लेट का निर्माण किया जहां वे सफल रहे।
50 पैसे की लगती है लागत
वे बताते हैं कि जब उन्होंने पहली बार इस प्लेट का निर्माण किया, तो उन्हें सफलता हासिल हुए उन्हें काफी खुशी हुई कि वह अपने समाज के लिए कुछ अच्छा कर सके हैं। उनका कहना है कि मक्की के छिलके से एक प्लेट बनाने में करीब 50 पैसे की लागत आती है।
यह छिलका जमीन पर कुछ समय पड़े रहने के बाद अपने आप ही भूल कर समाप्त हो जाता है और पूरी तरह वाटरप्रूफ है। हम कह सकते हैं कि मोहम्मद नाज के द्वारा बनाए जा रहे प्रोडक्ट पूरी तरह इको फ्रेंडली है।




