
Photo Credits: Times Of India
Alwar: भारत के एक गणितज्ञ जिन्होंने शून्य की खोज की वही से भारत में गणित विषय का चलन शुरू हुआ। दैनिक जीवन से लेकर व्यापारिक क्षेत्र तक गणित की जरुरत पड़ती है। स्कूलों में तो कक्षा 1 से ही यह विषय शुरू हो जाता है और आखरी तक चलता ही चला जाता है।
कुछ ब्रिलिएंट स्टूडेंट गणित विषय (Maths Subject) में महारत हासिल कर लेते है और कुछ स्टूडेंट जिनका गणित विषय में आधार कमजोर होता है। वे स्टूडेंट गणित विषय से डरते है और उसे मुसीबत मानते है। परंतु आपको बता दें कि गणित एक अभ्यास करने वाला विषय है।
निरंतर अभ्यास करने से जो विद्यार्थी गणित से डरता है, उसका भी यह फेब्रेट सब्जेक्ट बन जाएगा। कक्षा 1 से लेकर कॉलेज तक विद्यार्थी कई फेमस लेखकों की किताबें पढ़ते है। परंतु हमने कभी गौर नहीं किया कि वे किस तरह एक महान गणितज्ञ (Great Mathematician) बने।
इन्ही फेमस लेखकों में से एक है RD शर्मा (RD Sharma) जिन्होंने कई विद्यार्थी की नैया पार करा दी। साथ ही उनका डर भी खत्म कर दिया लोगों ने उनकी किताब पढ़ कर अपने भविष्य को सबरा। तो आइए हम विस्तार से बात करते है, इनके बारे में।
RD Sharma कौन है
आरडी शर्मा (Mathematician RD Sharma) गणित के विद्यार्थियों के हीरो है। इनके नाम को हर कोई जानता है, परंतु इनके जीवन की जानकारी बहुत कम लोगो को है और काफी लोग RD शर्मा का फूल नेम भी नहीं जानते। कुछ जगहों पर इनका नाम राम दास शर्मा मिलता, परंतु उनका वास्तविक नाम रवि दत्त शर्मा उर्फ़आरडी शर्मा है।
इनका जन्म राजस्थान राज्य के बहरोड़ तहसील के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव भूपखेरा में हुआ। इनके पिता पेशे से एक किसान थे। आरडी शर्मा बचपन से ही एक ब्रिलियंट छात्र रहे और बड़े होकर एक महान गणितज्ञ बने पिछले 31 सालों में उन्होंने बोर्ड परीक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए गणित के सरल सूत्र तैयार किये और बच्चों का भविष्य संभाला।
इनका बचपन बेह्द अभावों में बीता। RD शर्मा अपने गांव से 15 किमी दूर पैदल चलकर स्कूल जाया करते थे। उनके पिता ने देखा की बच्चा इतनी दूर ठंडी गर्मी और बरसात में पैदल जाता है, तो उन्होंने पैसे एकत्रित किये और उनके लिए साइकिल खरीद दी।
पिता ने बढ़ाई गणित में रुचि कर्ज लेकर बच्चे को डॉक्टर की उपाद्धि दिलाई
आज आरडी शर्मा जो कुछ भी है उनके पिता के कारण है। आज उनका नाम गणित के महान जानकारों में लिया जाता है। इन सब का क्रेडिट उनके पिता को जाता है। शर्मा जी के पिता ने कभी स्कूल की शक्ल नहीं देखी, परंतु उन्होंने बचपन से अपने बेटे के दिमाग में गणित विषय डाल दिया था।
रात के समय जब शर्मा और उनके पिता चारपाई पर लेटते तो RD शर्मा को तब तक सोने नहीं दिया जाता था। जब तक वे 40 तक पहाड़ा नहीं बोल देते। इन्ही नेक आदतों के चलते शर्मा 9 साल की उम्र में 40 तक पहाड़े सिख गए। साथ ही 20 तक की संख्या का वर्गमूल और घनमूल ज्ञात करना भी सीख लिया। RD शर्मा हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम आते थे।
इनका गांव दिल्ली से लगभग 150 किमी दूर स्थित था। शर्मा कहते है कि उन्हें अच्छी तरह से याद है, जब उनके पिता ने उनके ग्रेजुएशन के लिए पैसे उधार लिए थे। विद्यार्थी जीवन से डॉ शर्मा बनने तक का सफर बहुत ही आभाव में निकला। उनके पिता ने पढ़ाई के लिए जो कर्ज लिया था। डॉ शर्मा ने पढ़ाई में अपना बेस्ट देकर अपने पिता का नाम रोशन कर दिया।
सोच से ज्यादा लिख डाली किताबे
आरडी शर्मा अभी तक 25 किताबे लिख चुके है। इनके द्वारा लिखी गई किताबे आपको साहित्य महोत्सवों के स्टाल पर लगी नहीं मिलेगी। इनकी किताबें साहित्यिक नहीं है, परंतु बेस्ट सेलर (Best Seller) जरूर हैं। वास्तव में इनके लेखक बनने की कहानी बहुत ही अद्भुद प्रकार की है।
इन्होंने कभी नही सोचा कि वे कभी किताबें भी लिखेंगे। परंतु कुछ ऐसी परिस्थितियां बनी की उन्हें किताबे भी लिखनी पड़ी। इसके बाद से ही एक के बाद एक उन्होंने 25 किताबें लिख डाली। उस समय शर्मा जी राजस्थान यूनिवर्सिटी (Rajasthan University) से अपनी पीएचडी (PhD) की पढ़ाई पूरी करने में लगे हुए थे।
इनके एक शिक्षक जो इन्हें लाइनर अलजेब्रा पढ़ाते थे। उनका आकिस्मक देहांत हो गया। देहांत के बाद सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हुई की अब इस विषय पर सटीक नोट्स कैसे तैयार होंगे, जो किसी भी भारतीय किताब में उपलब्ध नहीं थे।
इस विषय पर लिखी एक विदेशी लेखक की किताब उपलब्ध थी। परंतु उसका दाम बहुत अधिक था। इस लिये हर कोई उसे खरीद नहीं सकता था। आरडी शर्मा ने उस सब्जेक्ट में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। इसीलिए उन्होंने इस विषय पर किताब लिखने का विचार बना लिया। आरडी शर्मा के द्वारा लिखी गई पहली किताब 1986 में प्रकाशित हुई।
सरल भाषा और सरल तरीके का इस्तेमाल किया
डॉ शर्मा कहते है कि कोई भी विद्यार्थी गणित को आसानी से सीख सकता है, चाहे वो क्लास का टॉपर हो या बैकबेंचर। छात्र इसे किस तरह आसानी से सीखता है, ये सिखाने वाले अध्यापक पर डिपेंड करता है। वे मानते है कि यदि अध्यापक आम जीवन से जुड़े, उदाहरण से बच्चों को समझाते है, तो बच्चे बहुत जल्द समझ जाते है।
इस विषय को समझने और उस पर महारत हासिल करने का सिर्फ एक रास्ता है की इस विषय का नियमित अभ्यास करना। पटना अध्यापक कार्तिकेश झा ने आरडी शर्मा की किताबों की बात करते हुए कहा कि में पिछले 8 वर्षों से कक्षा 10वीं तक के छात्रों को गणित पढ़ा रहा हूं।
अभी तक डॉ शर्मा की किताब के साथ आर एस अग्रवाल, एनसीआरटी और अन्य किताबों से पढ़ाया है वे कहते है कि सभी किताबे बेस्ट है, परंतु आरडी शर्मा की किताब सभी से बहुत खास है। इनकी किताबों में बेसिक से एडवांस लेवल तक के सभी सवाल मिल जाते हैं और सबसे खास बात यह की आप जो भी टॉपिक देखेंगे, इनकी किताबों में उससे सम्बंधित ढेर सारे प्रश्न मिल जाते है।



