
Indore: दुनिया भर में खेती के आधुनिक तरीके को गूंज है। लोग अपना खुद का व्यवसाय करने के लिए खेती किसानी को ज्यादा अच्छा समझते है। आपदा काल के बाद लोगो की नौकरियां छूट गई, जिससे लोगो में काफी ज्यादा इंसिक्योरिटी है, लोग खुद को और अपने कारोबार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खेती किसानी का सहारा ले रहे है।
इन लोगो ने वर्षो से चली आ रही पारंपरिक खेती पर काम करके उसे आधुनिक रूप दिया फलत: लोगो को इस आधुनिक खेती से काफी ज्यादा लाभ हुआ। हम जानते है, जैसे जैसे समय बीत रहा है, वैसे वैसे लोगो ने अपनी सुख सुविधा के लिए वनों की कटाई कर इमारत खड़ी कर ली है।
जिस जमीन पर अनाज उगाया जाता था, उस जमीन पर आज बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनी हुई है। ऐसे में लोगो के पास खेती किसानी के लिए पर्याप्त भूमि न होने से उन्होंने एक दूसरा रास्ता निकाला है। मृदाविहीन खेती याने हाइड्रोपोनिक्स आइए आज हम इस तकनीक के बारे में विस्तार से जाने।
मिट्टी नहीं बस पानी ही काफी है
हाइड्रोपोनिक खेती की खासियत है की इसमें सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है और साथ ही एक पॉलीहाउस स्ट्रक्चर की जो तापमान को नियंत्रित कर सके। आप चाहे तो खुले वातावरण में भी इस तकनीक से खेती कर सकते है, बस इस बात का ख्याल रखना होता है की आपकी सब्जियो की फसल मौसम के अनुसार हो।
हाइड्रोपोनिक खेती मे पाइपों की मदद से एक ढांचा तैयार किया जाता है, जो लगातार पानी का बहाव बनाए रखता है और इन्ही पाइपों के ऊपर छेद करके पौधे लगाए जाते है। हाइड्रोपोनिक खेती के लिए 15-30 डिग्री का तापमान की जरूरत होती है।
हाइड्रोपोनिक खेती की कार्य प्रणाली
हाइड्रोपोनिक तकनीक की खेती के लिए पीवीसी के कई पाइपों को आपस में कुछ इस प्रकार जोड़ा जाता है की एक तरफ के पाइप से पानी को भेजा जाए और दूसरी तरफ के पाइप से पानी बाहर निकल सके। इन पाइपों में ऊपर की ओर ढेर सारे छोटे-छोटे होल बनाए जाते है और उन्ही होल्स में पौधे का रोपण किया जाता है।
पाइप के छिद्रों में प्लास्टिक की एक जालीनुमा गिलास की तरह एक विशेष संरचना होती है, जिसमे कोकोपीट यानी नारियल का छिलका रखा होता है। इसी छिलके के अंदर पौधे के बीच या छोटे पेड़ लगाए जाते है।

यह संरचना बीज या पेड़ की जड़ को पाइप से जाने वाले पानी में डूबा कर रखती है। समय के साथ पौधे में भी वृद्धि होती है और उसकी जड़े पानी में रह कर पानी में मिलाए गए जरूरी पोषक तत्वों से अपना भरण पोषण करती रहती है।
हाइड्रोपोनिक की विशेषता किस फसल के लिए है उपयुक्त
हाइड्रोपोनिक तकनीक वाली खेती से झाड़ीदार पौधो को बड़ी ही सरलता से उगाया जा सकता है इस खेती के माध्यम से कुछ खास फसलों को ही उगाया जा सकता है जो निम्न है, गाजर, शलजम, मूली, शिमला मिर्च, मटर, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी, ब्लूबेरी, तरबूज, खरबूज, अनानास, अज्वाइन, तुलसी, टमाटर, भिंडी आदि।
With the #population growing at a rapid pace, #farmers are adopting fresh methods to grow #crops that occupy less space & consume less #water. This is why the #hydroponic #farming set up in #India has emerged as a disruptive technique.#sustainable #agriculture #organic pic.twitter.com/Pfu90RfI6D
— HARVEL OFFICIAL (@HarvelOfficial) April 26, 2022
हाइड्रोपोनिक खेती (Hydroponic Farming) आपको मृद्रविहीनखेती करने का विकल्प प्रदान करती है। इस खेती के लिए आपको उपजाऊ जमीन की आवश्कता नहीं होगी। आप चाहे तो बंजर भूमि घर का छत या फिर घर के किसी कमरे में भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते है। हाइड्रोपोनिक तकनीक (Hydroponic Technology) की मदद से काफी लोग वर्टिकल फार्मिंग भी करते हैं। इस विधि से कम स्थान पर ज्यादा से ज्यादा सब्जियो के वृक्ष लगाए जाते है।
हाइड्रोपोनिक फार्मिंग की लागत
पारंपरिक खेती की अपेक्षा हाइड्रोपोनिक तकनीक से की जाने वाली खेती थोड़ी महंगी होती है। यदि आप 100 वर्ग फुट की जमीन पर हाइड्रोपोनिक सिस्टम बनाना चाहते है, तो आपको कम से कम 60-70 हजार रुपये की लागत आएगी। साथ ही पॉलीहाउस (Polyhouse) निर्माण के लिए भी लागत लगती है।
Hydroponic farming in India
The estimated cost of setting up a hydroponic farm in India in one acre will range between Rs. 1.45 Cr to Rs. 1.80 Cr. It is an estimated cost and can vary according to your specific choice of equipment. pic.twitter.com/1BPIpumwmQ
— The Future of Farming (@future__farming) April 18, 2022
जो वृक्ष का रोपण करना चाहते हो उसके पौधे या बीजो का खर्च भी होगा और जो जल के माध्यम से पौधो तक पोषक तत्व पहुंचने होते है, के लिए भी खर्च आएगा। लोग इस सिस्टम का उपयोग महंगी सब्जियां लगाने में करते है, जिससे उन्हे ज्यादा मुनाफा हो सके। इस तकनीक की मदद से वे बेसिल लीव, लेट्यूस जैसी पत्तेदार सब्जियां उगाते है। जिनकी कीमत बाजारों में काफी ज्यादा होती है।




