बिना कोचिंग किये Youtube की मदत से रोज पढाई की और पहले ही प्रयास में ऐसे IPS अफसर बन गये

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Aadarsh Shukla UPSC
This 22-year-old college student Aadarsh Shukla clears UPSC in first attempt without coaching. Adarsh Shukla UPSC Success Story.

Photo Credits: Social Media

Barabanki: सिविल सर्विसेज परीक्षा (Civil Service Exam) को निकाल पाना अत्‍यंत कठिन है। देश की सबसे कठिन परीक्षा में इसका स्‍थान शीर्ष पर है। कई रातों को इसके लिए न्‍यौछावर करना पड़ता है, तब जाकर विद्यार्थी इस परीक्षा में सफलता हासिल कर पाता है। दिन का चेन रातों की नींद सब इसके लिए कुर्बान करनी पड़ती है।

लाखों स्‍टूडेंट इस परीक्षा को पास करने का सपना देखते है। लेकिन कुछ ही इसमें सफल हो पाते है। क्‍योंकि इसे तब ही निकाला जा सकता है, जब इसे हम अपने जीवन सबसे बड़ा उदृदेश्‍य बना ले।

इसे लक्ष्‍य बनाने के बाद प्रतिदिन सिर्फ इस परीक्षा में सफल होने के लिए परिश्रम करना पड़ता है। तब जाकर इसमें सफलता मिल पाती है। इसके साथ ही घर वालों का सपोर्ट और हमारा धैर्य भी इस परीक्षा में सफलता हासिल करने में मदद करता है।

बिना कोचिंग के पास की यूपीएससी परीक्षा

इस परीक्षा में सफल होने के लिए बच्‍चे महंगी से महंगी कोचिंग क्‍लास जॉईन करते है। लेकिन आज की यह कहानी एक ऐसे स्‍टूडेंट की है, जिसने इस परीक्षा के लिए कोचिंग तक नहीं की। सिर्फ अपनी मेहनत और लगन से ही इस परीक्षा में सफलता हासिल कर ली और यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा में अच्‍छी खासी 149वी रैंक भी हासिल की। कौन है, वह होनहार परिश्रमी बालक जिसने इतनी बडी सफलता अपनी लगन से हासिल कर ली आइये जानते है।

आदर्श जिन्‍होंने 21 साल में पास की यूपीएससी परीक्षा

आज की यह कहानी है, उत्‍तप्रदेश (Uttar Pradesh) राज्‍य के बाराबांकी (Barabanki) में रहने वाले आदर्श शुक्‍ला (Adarsh Shukla) की। जिन्‍होंने केवल 21 वर्ष की आयु में यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली है। आदर्श शुक्‍ला ने इस परीक्षा में 149वी रैंक हासिल की। आदर्श शुक्‍ला के पिताजी का नाम राधाकांत है। वह एक प्राइवेट कंपनी में जीएसटी डिपार्टमेंट में जॉब करते है। आदर्श की मॉं एक हाउस वाइफ है, उनका नाम गीता शुक्‍ला है।

घर वालों के संघर्ष का है परिणाम

आदर्श के पिताजी 1993 में अपने बेहतर भविष्‍य के सपने लेकर बाराबांकी आ गये थे। वह अपने घर की परेशाानियों को दूर करने के लिए अपने गॉंव को छोड़ कर शहर आये थे। वह बताते है, कि शहर में आकर उन्‍होंने कई कठिनाइयेों का सामना किया।

उन्‍होंने वहा किराये का मकान लेकर जीवन के नये सफर की शुरूआत की। यहा गॉंव में उनकी पत्‍नी अपने बच्‍चों कि परवरिश करती थी। भले ही राधाकांत जी ने परेशानियों का सामना किया। लेकिन कभी भी अपने बच्‍चों की पढ़ाई में रूकावट नहीं आने दी।

कई समस्‍याओं का सामना करते हुए भी उन्‍होंने अपने घर का माहोल ऐसा बनाया कि उनके बच्‍चे अच्‍छे से मन लगाकर पढ़ सके और जो वह चाहते है, उस सपने को पूरा कर सके। अपने बेटे की सफलता पर राधाकांत जी कहते है कि उनके बेटे ने अपना नहीं बल्‍कि उनका सपना पूरा किया है।

आदर्श ने स्‍नातक में हासिल किया था गोल्‍ड मेडल

आदर्श प्रारंभ से ही पढ़ाई में बहुत ही होनहार थे। उन्‍होंने अपने हाई स्‍कूल की परीक्षा में टॉप किया था। आदर्श ने बारहवी की परीक्षा में 94.5 फीसदी अंक हासिल किए थे। उनके अंको देखकर उनके परिवार को पहले से ही अंदाजा हो गया था कि उनका बेटा कुछ अलग करेगा।

वह अपने बेटे को घर कि हर समस्‍या से दूर रखते थे। जिससे आदर्श को अपनी इच्‍छानुसार पढ़ाई करने में कोई दिक्‍कत ना आये। आदर्श ने स्‍नातक की परीक्षा के दौरान भी बहुत ही अच्‍छा प्रदर्शन किया था। जिस वजह से उन्‍हें गोल्‍ड मेडल दिया गया था। आदर्श ने स्‍नातक में बीएससी किया है।

यूपीएससी 2020 में 149 वी रैंक हासिल की

आदर्श ने केवल 21 वर्ष की आयु में ही सिविल सर्विसेज की परीक्षा निकाली है। उन्‍होंने यूपीएससी 2020 में 149 वी रैंक पाई है। जिसके बाद उन्‍हें आईपीएस ऑफिसर (IPS Officer) का पद मिला है। आदर्श ने यूपीएससी परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में निकाला है।

अपनी सफलता के बाद यूपीएससी परीक्षा के बारे में बताते हुए आदर्श कहते है, कि इस परीक्षा को निकालना इतना आसान नही है। मैनें प्रतिदिन इसके लिए कड़ी मेहनत की है। में रोज 8 से लेकर 9 घंटे पढ़ाई करता था। तब जाकर में इस परीक्षा में सफल हो पाया हूँ।

धैर्य के साथ साथ परिवार का सपोर्ट है जरूरी

बच्‍चों को टिप्‍स देते हुए आदर्श कहते है, कि अगर इस परीक्षा को आप निकालना चाहते है। तो सबसे पहले तो आपको धैर्य बना कर रखना पडेगा। उसके बाद नियमित रूप से इसकी तैयारी करनी होगी। अगर एक दिन भी आप अपने लक्ष्‍य से भटके तो इसका सफर बढ़ता ही जायेगा।

इसके अलावा आदर्श कहते है, कि इस परीक्षा को घर वालों के सपोर्ट के बिना नहीं निकाला जा सकता है। वह कहते है, कि अगर मेंरे घर वालों ने मेरा सपोर्ट ना किया होता तो शायद में इस परीक्षा को कभी निकाल ही नहीं पाता। वह अपनी सफलता का पूरा श्रेय सिर्फ अपने परिवार को देते है।

वह कहते है कि यह सफलता मेरी नहीं, बल्‍कि मेरे मॉं पिता की कड़ी मेहनत की सफलता है। आदर्श शुक्‍ला की एक बहन भी है। वह भी बहुत होशियार है। आदर्श की बहन का नाम स्‍नेहा है जो‍कि वकालत की पढ़ाई करती है।

कई राजनीतिक हस्‍तियों ने आदर्श को दी बधाई

क्रांग्रेस के प्रवक्‍ता पीएल पुनिया जी ने आदर्श को बधाई दी है। पीएल पूनिया पूर्व आईएएस रह चुके है। आदर्श के घर में जाकर उन्‍होंने आदर्श को शुभकामनाऍ दी। पीएस पुनिया के अलावा भी कई राजनितिक पार्टियों के लोगों ने आदर्श को बधाई दी। इतनी कम उम्र में यूपीएससी क्‍लीयर करना बहुत ही बड़ी उपलब्‍धि है। आदर्श देश के युवा के लिए आदर्श बन चुके है। उनकी इस बडी उपलब्धि पर हमारी टीम उन्‍हें बधाई देती है।

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