
Photo Credits: Twitter(@DarshanaJardosh)
Rishikesh: हमारे देश भारत में परिवहन के लिए सड़क और रेल नेटवर्क को प्राथमिकमा दी जाती है। इन बडें परिवहन नेटवर्क को जोड़ने में पुल और सुरंगे बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। अगर बात की जाये भारतीय रेल की तो इसे दूरदराज में स्थित पहाड़ी स्थानों से जोड़ने के लिए सुरंगो का सहारा लेना पड़ता है।
हमारे देश में रेलवे नेटवर्क (Railway Network) को जोड़ने के लिए बहुत से रेल सुरंग है। जिसमें से सबसे लंबी रेल सुरंग पीर पंजाल रेलवे सुरंग है। पीर पंजाल रेलवे सुरंग जिसकी लंबाई 11.2 किलोमीटर की है। भारत की सबसे बड़ी रेलवे सुरंग होने के साथ साथ इसे एशिया की दूसरी सबसे बड़ी रेलवे सुरंग होने का भी दर्जा प्राप्त है।
इसी प्रकार अगर सड़क परिवहन की बात की जाये तो अटल टनल को सबसे लम्बी सड़क सुरंग का दर्जा दिया गया है। यह भारत की सबसे लम्बी टनल है इसे अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी टनल के नाम से जाना जाता है।
सिर्फ 26 दिनों में बनाई गई रेलवे सुरंग
वैसे तो कई रेलवे टनल (Railway Tunnel) हमारे देश में है और बहुत से टनल के निर्माण कार्य चालू भी है। लेकिन अभी एक रेलवे सुरंग की चर्चा हर जगह की जा रही है। इस रेलवे टनल की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि इस टनल को सिर्फ 26 दिनों में पहाड़ तोड़कर तैयार कर दिया गया है।
आखिर कहां इस टनल का निर्माण किया गया है और किसने यह कार्य किया अगर यह सवाल आपके मन में भी है, तो इस खबर को पढ़ने के बाद आपको आपके सारे प्रश्न के जबाव यहां मिल जाऐंगे। आइये इसे खबर को विस्तार से जानते है।
उत्तराखंड में बनाई गई रेलवे टनल
आपको जानकारी के लिए बता दे कि हम जिस टनल की बात कर रहे है, उसका निर्माण उत्तराखंड (Uttarakhand) के ऋषिकेश (Rishikesh) में किया गया है। इस रेलवे टनल को ऋषिकेश और कर्णप्रयाग मार्ग के बीच में बहुत ही तेजी से बनाया गया है।
देश की सबसे अव्वल दर्जे की इंजीनियरिंग कंपनी जिसका नाम लार्सन एंड टुब्रो (Larsen And Toubro) है। उसने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस कंपनी के इंजीनियरों ने सिर्फ और सिर्फ 26 दिनों के कम समय में ही पहाड़ को तोड़कर लगभग 1 किलोमीटर लंबी सुरंग (Rishikesh Railway Tunnel) को बना दिया है। यह सुरंग उत्तराखंड में है, जो कि ऋषिकेश और कर्णप्रयाग मार्ग (Rishikesh To Karnaprayag Line) को जोड़ेगी।
पुष्कर सिंह धामी ने एलएंडटी को दी बधाई
ऋषिकेश से लेकर कर्णप्रयाग तक की इस रेल परियोजना को 16216 करोड़ की परियोजना बताया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत शिवपुरी से लेकर व्यास के बीच में एक सुरंग बनाई गई है। जोकि 1 किलोमीटर की है। इसे केवल 26 दिनों के कम समय में बनाकर तैयार कर दिया गया है।
इस उपलब्धि के लिए उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रेवले विकास निगम और इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो की तारीफ की है। इसके विषय में जानकारी देते हुए पुष्कर जी ने बताया की वहा कि स्थिति बहुत ही कठिन थी। लेकिन इतनी कठिन भोगौलिक स्थिति होने के बावजूद भी एलएंडटी ने इस रिकॉर्ड को बनाकर हम सभी को अचंभित कर दिया है।
125 किलामीटर लंबी है यह रेल परियोजना
आपको बता दे कि इस रेलवे परियोजना के कंपलीट होने के बाद 125 किलोमीटर की यह लंबी रेल लाइन देवप्रयाग, कर्णप्रयाग और टिहरी गढ़वाल को जोड़ देगी। इस 125 किलोमीटर रेल लाइन की 100 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन सुरंग से होकर जाती है।
इस रेल परियोजना में अब तक 35 किलोमीटर से भी अधिक की सुरंग बन चुकी है और 17 सुरंगों का कार्य अभी प्रगति पर है। इन 17 में से 11 सुरंगे ऐसी होंगी, जिनकी लंबाई 6 किलोमीटर से भी अधिक होगी। इन सभी सुरंग का डायमीटर 8 मीटर का है।
Indian Railways conquering the invincible!
26 days of non-stop hard work and grit paves the way for the modern day Rail Tunnel, cutting through the difficult terrain between Shivpuri and Byasi, on the Rishikesh – Karnaprayag rail line in Uttarakhand. #NayeBharatKiNayiRail pic.twitter.com/INkehtXR9t
— Darshana Jardosh (@DarshanaJardosh) April 21, 2022
इसके साथ ही अभी उत्तराखंड में केन्द्र सरकार के द्वारा रेलवे लाइन का विकास काम बहुत ही तेज रफ्तार से हो रहा है। यहाँ पर गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ इन चार धामों को जोड़ने के लिए भी रेलवे लाइन का निर्माण कार्य चालू हो चुका है।
#Rishikesh to #Karnprayag Rail #CharDham railway project .
Work progress of Tunnel 1 and ADIT Tunnel . pic.twitter.com/KQHhaE6nC2— Chandrashekhar Dhage (@cbdhage) October 2, 2021
इतने कम समय में रेल सुरंग को बना पाना बहुत ही आश्चर्य की बात है। लेकिन यह कारनामा एलएंडटी (L And T) ने कर दिखाया है। जिसके लिए इस कंपनी के इंजीनियर बधाई के पात्र है। हमारी पूरी टीम उनके इस कार्य की सराहना करती है। यह हमारे देश के लिए गौरव की बात है कि हमारे पास ऐसे इंजीनियर है, जो कि इतने काबिल है। एलएंडटी की यह उपलब्धि सराहनीय है।



