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Aligarh: व्यक्ति दुनिया में कही भी चला जाए, परंतु उसे अपनी जन्म भूमि से बहुत प्यार होता है। हर व्यक्ति की ख्वाहिश होती है की वे अपने देश से बाहर विदेश में जॉब करे और अपने माता पिता को ढेर सारी खुशियां दे। ऐसे कई उदाहरण दुनिया के सामने आए, जिन्होंने अपना बना बनाया करियर को छोड़ अपने वतन लौटे और अपना स्टार्ट अप कर करोड़ों का कारोबार किया।
हर व्यक्ति अपने जीवन में जो कुछ करता है, वो बहुत ही सोच समझ कर करता है और किसी व्यक्ति के करियर का फैसला उसके जीवन का सबसे अहम फैसला होता है। आज की यह कहानी भी कुछ इसी तरह है यदि कोई व्यक्ति जिसने अपने करियर के लिए इतनी मेहनत की। उसके बाद वह अपनी लगी लगाई नोकरी छोड़ अपने गांव में खुद का कारोबार करे, तो लोग उसे पागल समझेंगे।
हो सकता है की उसके परिजन भी उसका सपोर्ट ना करे। परंतु यह एक दम विपरित है। अलीगढ़ जिले के अभिषेक गोस्वामी (Abhishek Goswami) ने ना केवल अपने बेटे का साथ दिया, बल्कि उसके भारत लौटने पर खुश भी था। जान कर हैरानी होगी, अभिनव (Abhinav Goswami) को अमेरिका में नोकरी करने के साथ साथ ग्रीन कार्ड भी प्राप्त था। परंतु उसने सब छोड़ कर अपने देश अपने गांव में गौशाला और गुरुकुल खोलने का विचार बना लिया था।
अभिनव का साधारण परिचय
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य के अलीगढ़ (Aligarh) तहसील के अंतर्गत आने वाला एक कस्बा जरारा में जन्मे अभिनव काफी सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति है। वे काफी पढ़े लिखे भी है उन्होंने वर्ष 1997 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री हासिल की। अपना एजुकेशन पूर्ण कर अभिनव ने कॉर्पोरेशन जगत के माध्यम से देश-विदेश की बड़ी बड़ी कम्पनियों में नोकरी की।
वे करीब 10 वर्ष तक अमेरिका में रहकर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एप्पल में डाटा एनालिस्ट के पद पर काम किया। उनके पास अमेरिका का ग्रीन कार्ड भी था। जिसके अनुसार वे अपनी इच्छा के अनुसार अमेरिका देश में रह कर जॉब कर सकते है। परंतु अभिनव का मोह भंग हो चुका था।
गांव के बच्चों के हित में काम करने की इच्छा रखते है अभिनव
अभिनव का वापस लोटने का कारण अपने गांव के बच्चो को बहतरीन भविष्य देना था। वे अपने गांव की तरक्की करना चाहते है। अभिनव ने अपनी शिक्षा भारत से ही पूरी की है और वे एक सांस्कृतिक माहोल में रहे है जिसका असर उन पर काफी ज्यादा है। इसलिए वे अमेरिका की 2 करोड़ रुपया की नोकरी छोड़ अपने देश लौटे।
वापसी के बाद उन्होंने अपने पैतृक गांव और अपने आसपास के गांव के बच्चों के लिए शिक्षा पद्धति और उनके शैक्षणिक विकास के लिए स्कूल निर्माण पर विचार किया। इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत की और अपने सपने को पूरा किया।
देश में अभिनव के द्वारा 108 गुरुकुलों का निर्माण किया गया। अभिनव कहते है कि वे एक ऐसी पीढ़ी को जन्म देना चाहते है, जो प्राचीन भारतीय सभ्यता (Ancient Indian Culture) के साथ इस योग्य बने की वे दूसरो को नोकरी दे ना की खुद किसी के अंडर जॉब करे।
पढ़ाई, जैविक खेती और गौशाला भी उपलब्ध है
अभिनव के द्वारा स्थापित किए गुरुकुल (Gurukul) में बच्चों को प्राचीन वैदिक शिक्षा के साथ जैविक खेती (Organic Farming) और गायों की सेवा और उनके प्रति लगाव को भी बढ़ाया। उन्होंने गौशाला भी खोली।

अभिनव के द्वारा कहे गए शब्द “इस पीढ़ी के हाथो में पूरे देश का भविष्य है और आने वाली पीढ़ी का भी” यदि वर्तमान पीढ़ी अपनी संस्कृति और सभ्यताओं के साथ वैदिक शिक्षकों से दूर रही, तो फिर भारत विकास उस सभ्यता से नहीं होगा जो कई पीढ़ी से चला आ रहा है।
पत्नी बच्चो को मनाया और गांव आ गए
अभिनव कहते है, अमेरिका के कैलीफोर्निया में घर लेने के बाद उन्होंने अखंड रामायण का पाठ कराया। वे विदेश में रह कर भी अपनी संस्कृति को नहीं भूले। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी प्रतिभा और दोनों बच्चों को समझाया तो वे सब भी गांव वापसी के लिए मान गए। गांव आकर उन्होंने अपने गांव को सवारना प्रारंभ किया ।



