आप अपने क्षेत्र के हिसाब से बकरियों की इन 8 नयी नस्लों में से चुनें और व्यवसाय से फ़ायदा उठायें

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Goats Business
NBAGR Registered 8 New Breeds of Goats. Now Goad farming business in India is going good. Commercial Goat Farming Business.

Demo File Photo Credits: Flikr

Delhi: बकरी पालन भूमिहीन मजदूर, आर्थिक रूप से तथा सामाजिक रूप से पिछड़े व्‍यक्‍तियों और सीमान्‍त किसानों के द्वारा अपनी आजीविका के तौर पर बहुत अधिक किया जाता है। माना जाता है कि बकरी पालन (Goat Farming Business) बहुत ही किफायती और फायदे का कार्य होता है।

चाहे बकरी पालन अपने घर में 4-5 बकरी पालकर किया जाये या फिर व्‍यावसायिक फार्म में सैकडो की संख्‍या में पालकर। कम निवेश में अधिक लाभ कमाने का यह एक बहुत ही अच्‍छा जरिया होता है। बकरियों की देखभाल करने में उसके पोषण में बहुत ही कम खर्चा आता है। इसलिए इससे कमाई 4 से 5 गुना तक हो जाती है।

किसी भी व्‍यवसाय (Business) की एक शर्त होती है कि अगर उसे वैज्ञानिक ढंग से किया जाये, तो अधिक लाभ कमाया जा सकता है। इसलिए आज हम बककियों कि कुछ ऐसी नस्‍लों कि जानकारी लेकर आये है, जिसे जानकर आप भी बकरी पालन करके लागत से कई गुना ज्‍यादा का प्रॉफिट प्राप्‍त कर सकते है।

किस तरह करें बकरी पालन

बकरी पालन करने के लिए सबसे पहले हमें एक उन्‍न्‍त किस्‍म की नस्‍ल वाली बकरी (Breeds of Goats) का चयन करना बहुत ही आवश्‍यक होता है। बकरी की नस्‍ल का चयन करते समय हमें उसकी गर्भधारण की और फीडिंग से रिलेटेड जानकारी होना बहुत ही आवश्‍यक होता है।

इसकी जानकारी होने के बाद ही हम बकरी को सही समय पर गर्भित और उसके खान पान का सही ध्‍यान रख सकते है। बकरियों को चराकर या फिर एक जगह खूटों पर बॉंध कर भी बकरी पालन किया जा सकता है।

वैज्ञानिक कहते है कि अगर हमारे पास बकरियों को चराने की सही व्‍यवस्‍था हो तो उस हिसाब से सिरोही नस्‍ल की बकरी का पालन करना चाहिए और यदि चराने की सही व्‍यवस्‍था ना हो तो बरबरी नस्‍ल की बकरी का पालन करना चाहिए। हमारे देश में पशु गणना के अनुसार 14.9 करोड़ बकरियाँ है।

अभी की बात की जाये तो वैज्ञानिकों द्वारा 8 नई किस्‍म कि नई नस्‍लों के बारे में जानकारी बताई गई है। दावा है, कि इनका पालन करके लोग कई गुना का फायदा कमा सकते है। कौन कौन सी वह नस्‍ल है, जिन्‍हें उत्‍तम किस्‍म कि नस्‍ल में शामिल किया गया है और क्‍या है इनकी खासियत आइये जानते है।

सलेम काली बकरी (Salem Black Goat)

यह बकरी तमिलनाडु राज्‍य के सलेम, एरोड़ जिलों में पाई जाने वाली बकरी है। यह बकरी दुबली, लम्‍बे पैरों वाली तथा काले रंग की होती है। इस नस्‍ल की बकरी को मुख्‍य रूप से मॉंस, खाद और खाल के लिए पाला जाता है। इस नस्‍ल की बकरी के नर का का वजन लगभग 48.64 किलाग्राम का होता है तथा मादा का वजन 31.76 किलोग्राम का होता है।

इन नस्‍ल कि बकरी में यौन मेच्‍योरिटी बहुत ही जल्‍दी आ जाती है। जिस वजह से जल्‍दी ही यह मेमनों को जन्‍म देने लगती है। इस नस्‍ल की बकरी एक बार में 2 से अधिक मेमनों को पैदा करती है। जिससे हमें कम समय में अधिक लाभ प्राप्‍त होता है। इस नस्‍ल की सबसे बड़ी खासियत होती है कि इनकी मृत्‍यू दर बहुत ही कम होती है।

कहमी बकरी (Kahmi Goat)

इस नस्‍ल की बकरी (Kahamee bakaree) को गुजराज राज्‍य में अधिक पाला जाता है। इन बकरी के फेस का कलर लाल तथा पेट के बाद का भाग काला होता है। इस नस्‍ल की बकरी को मांस और दूध के लिए बहुतायत में पाला जाता है। यह बकरी प्रतिदिन 1.7 लीटर का दूध देती है। इस नस्‍ल की बकरी की प्रजनन दर 1.5 होती है।

असोम हिल बकरी (Asom Hill Goat)

इस बकरी का कलर सफेद होता है। यह बकरी मेघालय और असम (Meghalaya and Assam) राज्‍य में पाई जाती है। इस नस्‍ल की बकरी में नर और मादा दोनों को दाढ़ी होती है। इसे मुख्‍यत: मॉंस के लिए पाला जाता है। इस नस्‍ल की बकरी का प्रजनन दर 1.6 होता है। वयस्‍क बकरी का वजन 15 से लेकर 27 किलो तक का होता है।

रूहेलखंडी बकरी (Rohilkhandi Goat)

यह बकरी मुख्‍यत: उत्‍तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में पाई जाती है। इस बकरी को भी मांस और दूध दोनों के लिए पाला जाता है। इस बकरी का भी रंग काला होता है। इस बकरी की गर्दन और फेस पर धब्‍बे पाये जाते है। यह नस्‍ल खासकर जुडवॉ बच्‍चे देती है। 3 मेमनो को जन्‍म देना इसके लिए आम बात होती है। यह बकरी रोज 450 से लेकर 750 मिलीलीटर तक दूध देती है।

सूमी बकरी (Sumi Goat)

यह बकरी नागालैंड (Nagaland) में पाई जाती है। यह बकरी सामान्‍य आकार की होती है। इसका रंग सफेद और बाल रेशमी होते है। नरों में लम्‍बे बाल तथा मादा में जांघ में लम्‍बे बाल पाये जाते है। इसके बाल बहुत ही लाभ पहुँचाते है। इनके बालों से कई तरह की वस्‍तुऍं बनती है। इसलिए इस बकरी का पालन खासकर बालों के लिए किया जाता है। इस बकरी की नस्‍ल में नर का वजन 31.50 तथा मादा का वजन 25.56 किलोग्राम तक का होता है।

नन्‍दीदुर्गा बकरी (Nandidurga Goat)

इस बकरी की नस्‍ल कर्नाटक राज्‍य में मिलती है। इस बकरी का मुख, खुर और पलक काली रंग (Black Colour) की होती है। इन बकरियों को मख्‍यत: मॉंस प्राप्‍ति के लिए पाला जाता है। यह बकरियॉं भी जुडवा बच्‍चे जन्‍म देती है। जिससे लाभ दोगुना हो जाता है। वसस्‍क मादा बकरी का वजन 25 से 42 किलो तथा नर का वजन 56 किलो तक का होता है। जिस वजह से मॉंस कि अधिक प्राप्‍ति हो पाती है।

बिदरी बकरी (Bidri Goat)

यह बकरी कर्नाटक (Karnataka) के उत्‍तर पूर्वी क्षेत्र में पाई जाती है इसका कलर सामान्‍य तौर पर काला होता है। इसके कान नीचे झुके होते है। इसे भी मुख्‍यत: मॉंस के लिए ही पालते है। यह साल में औसतन 1.8 मेमनों को जन्‍म देती है। मादा का वजन 45 किलो तथा नर का वजन 50 किलो तक का होता है। यह बकरी भी जुडवा बच्‍चे जनती है।

भाखरवाली बकरी (Bhakharwali Goat)

यह बकरी जम्‍मू कश्‍मीर (Jammu Kashmir) राज्‍य में पाई जाती है। इस बकरी का कलर सफेद और काला दोनों ही होता है। इसकी सींग नीचे की तरफ होती है। उस नस्‍ल की बकरी को दूध और मॉंस दोनों के लिए पाला जाता है।

इस बकरी से औसतन हर दिन 900 मिलीलीटर का दूध प्राप्‍त होता है। इस नस्‍ल के मादा बकरी का वजन 50 किलोग्राम तथा नर का वजन 60 किलोग्राम तक का होता है। इस बकरी के पालन से बहुत अधिक लाभ कमाया जा सकता है।

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