Tuesday, October 26, 2021
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बेटी की इच्छा पूरी करने माँ ने नौकरी छोड़ शुरू किया बिजनेस, देखते-ही-देखते 500 से बन गए 40 लाख

Business Woman

Chennai: हर एक शख्स अपने सपनों को पूरा करना चाहता है। लेकिन अपना एक स्थाई रोजगार को छोड़कर जोखिम उठाने का खतरा कोई भी मोल नहीं लेना चाहता। एक बार चाइना के एक बड़े कारोबारी ने कहा था की अगर आप एक बंदर के सामने पैसो से भरा एक बेग रखोगे और दूसरी तरफ केलो का गुच्छा रखोगे, तो वह केले की ओर भागेगा।

उसे नहीं पता कि उतने सारे पैसो से वो इससे भी अधिक केले खरीद सकता है, ठीक उसी प्रकार एक नोकरी पेसा वाला आदमी से सामने रोज़गार का व्यापार रखोगे, तो वह रोजगार चुनेगा क्युकी इसमे जोखिम ना के बराबर होता है। आज हम आपको ऐसी ही कहानी से रूबरू कराने जा रहे है, जो आपके लिये प्रेरणा का स्त्रोत बन जाएगी।

जब वर्ष 2008 में शेरिल हफ्टन (Sherrill Houghton) की बेटी डेनिस (Denise) ने अपना एमबीए (MBA) की पढ़ाई पूरी कर और स्वम का कुछ करने का निश्चय किया। पर भरोसा नहीं था कि वह अकेले कुछ कर पाएंगे।

तब उन्होंने अपनी माँ को नौकरी छोड़ने की सलाह दिया। यह शेरिल को बेवकूफी भरा निर्णय लग रहा था। शेरिल एक सरकारी विद्यालय में सोलह वर्षो से कार्यरत थीं। उनके कन्धों पर बहुत सारा उत्तरदायित्व का भार था। अपनी कम पगार में उन्हें अपने सास-ससुर और दो बच्चों की उत्तरदायित्व उठाना पड़ता था।

परंतु डेनिश को मालूम था कि सुनहरा भविष्य उनके लिए इंतजार कर रहा है, वह तो केवल प्रयास करने में लगी थी। डेनिश का विचार था कि प्रकृति के अनुकूल सामग्री से डिस्पोजेबल नैपकिन और कपड़ो का निर्माण किया जाएं। वह रात-रात जाग कर उनके डिजाईन पर काम करती थी। वह अपने ख्वाबों को पूरा करने के लिए सब्र नहीं कर सकती थी।

अपनी माँ का निर्णय आने के पश्चात डेनिश ने आगे बढ़ने का निश्चय किया। माँ-बेटी दोनों के पास प्रारंभ करने के लिए सिर्फ 500 रूपये ही थे। परन्तु उसके उत्साह, खुद पर भरोसा और परिश्रम में हर कमी को भर देने का जज़्बा था। उन्होंने उस पैसे से कुछ कपड़े ख़रीदे और एक सिलाई मशीन उन्होंने किस्तों में ले लिया।

प्रारंभ में कोई भी उनके उत्पादों को देखता तक नहीं था, क्योंकि पार्लर में वही पुराना चलन था, जिसमें कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन शेरिल और डेनिश ने अपना विश्वास नहीं खोया। हर पार्लर में जा जाकर वे अपने उत्पाद का प्रचार करते, ताकि कोई तो उनके उत्पाद को अपने पार्लर में जगह दे। अंत में अलवारपेट में स्थित एक पार्लर उनका सामान खरीदने के लिए राजी हो गया और उन्हें केवल 5000 रुपये ही मिले। वे बेहद प्रसन्न थे, क्योंकि उनका मूलधन पहली बार में ही लौट आया था।

भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट का उन्हें सहायता मिली और उनके समर्थन से उन्हें 2.5 लाख का ऋण मिला। प्रोत्साहन के लिए इतनी राशि उनकी कंपनी ड्रीम वीवर्स के लिए जरूरी साबित हुआ। तब उन्होंने तीन और सिलाई मशीन खरीद ली।

उनकी कंपनी का दूसरा ग्राहक हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड था। इस जुड़ाव से उन्हें अपने काम के लिए बहुत सारा नैतिक सहयोग मिला और व्यवसाय में लाभ भी। आज उनके अत्याधिक ग्राहक हैं और हर महीने लाखों का आर्डर उन्हें मिलता है।

डिस्पोजेबल वस्तुओं के आज वे एक प्रमुख निर्माता बन चुके हैं और इनके बनाये डिस्पोजेबल वास्तु जैसे माउथ मास्क, डिस्पोजेबल टॉवेल्स, नैपकिन, पेपर बैग्स, हेड कैप्स, एप्रन, गाउन और लांड्री बैग का उपयोग स्पा में और ब्यूटी पार्लर में अधिक मात्रा में होता है।

परंतु शेरिल को इसी बात की संतुष्टि है कि उन्होंने तकरीबन दो दर्जन महिलाओं को वित्तीय तौर पर अपने पैरों पर खड़ा करने में सफलता प्राप्त की है। उनका व्यवसाय अब ऑस्ट्रेलिया, दुबई, मलेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर तक फैल चुका है। माँ-बेटी की यह जोड़ी आज के समय में उन हर एक के लिए उदहारण बन चुकी हैं, जो आर्थिक तौर स्वतंत्र होना चाहतीं हैं।

ENN Team
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