इस खास पौधे की यहाँ में जमकर खेती की जा रही है, सांप काटने पर यह बहुत फायदेमंद माना जाता है

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Sarpagandha
Indian Snakeroot plant farming in India is profitable business for farmers. Here are some tips of Cultivation of Sarpagandha and benefits.

Uttarkashi: सर्पगंधा (Sarpagandha) इस पौधे का नाम हम सभी ने सुना है। कहते है इस पौधे के सेवन करने की वजह से ही नेवले को सॉंप के काटने पर भी कोई असर नहीं होता। इसके सेवन करने के वजह से ही नेवला अपनी रक्षा सॉंपो (Snakes) से कर पाता है।

मेडिकल साइंस आज भले ही अपने सिखर पर हो, लेकिन हम जानते है कि आज भी बहुत सी बीमारियों के इलाज के लिए हमें प्राकृ‍तिक इलाजों पर निर्भर होना पड़ता है। क्‍योंकि प्राचीन जड़ी बुटियों (Herbs) की तुलना किसी से नहीं हो सकती।

ऐसी ही आयु‍र्वेदिक और प्राचीन जड़ी बूटी में सर्पगंधा (Indian Snakeroot) का नाम भी शामिल है। इसकी सहायता से मानसिक और शारिरिक दोनों ही प्रकार के रोगों का ट्रीटमेंट हो जाता है। परम्‍परागत चिकित्‍सा की बात करें तो सर्पदंश और कीटदंश में भी इसका उपयोग किया जाता है।

सर्पगंधा कि खेती करने उत्‍तराखंड के किसान हुए आकर्षित

सर्पगंधा का रावोल्‍फिया सर्पेन्‍टीना (Rauvolfia serpentina) वानस्‍पतिक नाम है। इसे अंग्रजी में सर्पेन्‍टीना या स्‍नेक रूट भी कहा जाता है। सर्पगंधा इसे संस्‍कृत में कहते है। अगर हिन्‍दी में बात करें तो इसे धवलबरूआ, नाकुलीकन्‍द, छोटा चॉंद, रास्‍नाभेद इत्‍यादि कहा जाता है। इसे विषनाशक भी कहा जाता है।

इसके लाभ आयुर्वेद में इतने अधिक है कि उत्‍तराखंड के लोग इसकी खेती बहुतायत में करने लगे है। इसकी खेती की तरफ लोग बहुत ही ज्‍यादा आकर्षित हो रहे है। सर्पगंधा सिर्फ एक औषधीय पौधा नहीं है। बल्‍कि इससे जुडें कई कथाऐं भी प्रचलित है।

सर्पगंधा को लेकर कई कथाएं भी है प्रचलित

कथाओं में कहा गया है कि सर्पगंधा का रस चूस कर ही नेवला अपनी ताकत बढ़ाता था। जिस वजह से वह कोबरा सर्प से लड़ पाता था। कहते है कि सर्पदंश के लग जाने पर इसकी पीसी हुई पत्‍ती से आराम मिलता है। वही यह यह भी कथा प्रचलित है कि अगर पागल व्‍यक्‍ति सर्पगंधा के जड़ो को पीसकर पीता है, तो वह पागलपन से मुक्‍त हो जाता है। इस कारण ही इसे पागल की दवा भी कहा जाता है।

कई झूठे तथ्‍य भी है प्रचलित

इसके सर्पगंधा नाम होने के कई मत है। कहते है कि इस पौधे की गंध की वजह से सॉंप दूर भागते है। वही कुछ लोग कहते है कि क्‍योंकि इस पौधे की जड़ बहुत ही लम्‍बी और टेढ़ी है इसलिए इसे सर्पगंधा नाम दिया गया है। लेकिन यह पूरी तरह से तथ्‍यहीन है। इसका नाम सर्पगंधा होने का सबसे प्राचीन तथ्‍य युक्‍त कारण प्राचीन काल में सर्पगंधा को सर्पदंध के इलाज में एक विषनाशक की तरह उपयोग में लाया जाना है।

औष‍धीय गुण से परिपूर्ण है सर्पगंधा

अंग्रेज रफ्सियन सर्पगंधा के बारे में लिखते है कि इस पौधे को जावा तथा भारत में विषों को निष्प्रभावी करने के लिये प्रयोग में लाते है। इसके अर्क और जड़ो तथा पत्तियों को एड़ी में प्‍लास्‍टर के तौर पर भी उपयोग में लाया जाता है।

कहते है सर्पगंधा कोबरा जैसे सांप का विष भी प्रभावहीन कर देता है। इसका आंतरिक प्रयोग हैजा, अतिसार, ज्‍वर के इलाज में भी करते है। वही इसके पत्तियों का मोतियाबिन्‍द के इलाज में प्रयोग किया जाता हे। सर्पगंधा को ज्‍वरनाशक विषनाशक और विषम परिस्थिति जैसे बच्‍चे के जन्‍म के दौरान भी उपयोग में लाया जाता है।

लाभों के चलते किसान परंपरागत खेती छोड़ कर रहे सर्पगंधा की खेती

सर्पगंधा के इसी औषधीय और लाभकारी गुण की वजह से इसकी डिमांड मेडिकल क्षेत्र में अधिक रहती है इसलिए उत्‍तराखंड के लोग इसकी खेती करने लगे है। उत्‍तराख्ंड राज्‍य की जलवायु यहां के हिमालयी इलाके वेशकीमती जड़ी बूटियों के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। वही पर अब सर्पगंधा भी आसानी से उग जाता है। इसलिए इस इलाके में सर्पगंधा की खेती की जाने लगी है।

इस संजीवनी बूटी का उपयोग बहुत अधिक है। इसलिए किसान अपनी परंपरागत खेती को छोड़कर इसकी खेती करने की और आकर्षित हो गये है। उत्‍तराखंड राज्‍य में ही कास्‍तकार मिस्‍टर ओम प्रकाश भट्ट जी सर्पगंधा की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करते है। वह किसानों को सर्पगंधा के बीज और पौधे उपलब्‍ध कराते है। साथ ही लोगों को इसकी खेती के लिए प्रेरित भी करते है।

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