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Bhopal: देश में लोग नोकरी से ज्यादा व्यापार को अहमियत दे रहे है। वे कई तरह के व्यापार करने के लिए ढेर सारी रिसर्च करते है उसके बाद वे अपना कारोबार प्रारंभ करते है। देश में महामारी के कारण काफी सारे लोगो ने अपनी अच्छी खासी नोकरी गवाई है, जिससे लोगो में एक दहशत बैठ गई है। देश ने काफी मुश्किल वक्त को सहा है।
कहते है कुछ बुरे के पीछे कुछ अच्छा भी होता है। लोगो ने इस बात को काफी गहराई से समझा है की सरकारी विभाग और खुद के व्यापार से ही भविष्य सुरक्षित है। इसी लिए देश में नईं क्रांति आई। अब देश का युवा खुद को सेल्फडिपेंड बनाने के लिए मेहनत कर रहा है।
महामारी के दौरान लोगो को काफी समय मिला अपने व्यापार की रणनीति बनाने के लिए अब वे अपने कारोबार को प्रारंभ कर देश के अन्य युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे है और इससे देश में प्रगति हो रही है।
आज बात करेंगे सागवान के वृक्ष की खेती (Teak Tree Farming) की। हर वर्ष सागवान के वृक्ष की खपत काफी ज्यादा होती है, परंतु इसका उत्पादन कुल खपत का मात्र 5 प्रतिशत होता है। यदि देश में सागवान के वृक्ष का उत्पादन बढ़ जाए, तो लोगो के साथ साथ देश की अर्थ व्यवस्था में भी सुधार होगा।
लोगो ने खेती का तरीका बदला
लोगो ने अब अपने खेती का तरीका बदल दिया है। अब वे पारंपरिक खेतो को छोड़ को औषधीय पौधे, फल-फूल और इमारती लकड़ी के वृक्षों की खेती प्रारंभ कर रह हैं। इमारती लकड़ी के रूप में सागवान की लकड़ी का बेहद उपयोग होता है, इसकी खेती आपको करोड़पति बना सकती है।
इस वृक्ष की खासियत है कि यह कम पानी, कम खर्च और कम मेहनत में अधिक मुनाफा देती है। इस फसल को तैयार होने में करीब 12 वर्ष का समय लगता है उसके बाद यह फसल एक एकड़ में करोड़ों रुपए देगा।

सागवान की लकड़ी की देश में काफी मांग है। भारत में 180 करोड़ क्यूबिक फीट सागवान की लकड़ी की मांग है, परंतु यहां मात्र 9 करोड़ क्यूबिक फीट सागवान (Saagavaan) की लकड़ी की पैदावार होती है। आप सोच सकते है की यह कितना मुनाफे का सौदा है। सागवान की लकड़ी के साथ छाल, पत्तियों का भी उपयोग होता है।
सागवान की खेती का तरीका
सागवन के वृक्ष काफी आसानी से उग जाते है, इनके लिए किसी विशेष प्रकार की मिट्टी की आवश्कता नहीं पड़ती। सागवान वृक्ष (Sagwan Tree) के लिए दोमट मिट्टी भी अच्छी मानी जाती है। ध्यान रहे सागवान के वृक्ष को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती इसलिए आप उसे जलभराव वालो जगह पर ना गए।
Teak wood (Sagwan) farming in my village:
Teak wood known as the king of timber belongs to the family Verbenaceae. Its scientific name is Tectona grandis. It grows as a huge tree and yields excellent quality wood.#TeakWood #SagwanTrees #TectonaGrandis pic.twitter.com/cFOGz4Au6M— DeVendra (@devmon007) June 15, 2020
ज्यादा पानी से वृक्ष में बीमारी लग सकती है, जिससे पेड़ के मारने की संभावना होती है। सागवान सामान्य तापमान पर अच्छी तरह विकसित होते है। इनके लिए 15 से 40 डिग्री तापमान अच्छा होता है। वृक्षारोपण का सही समय बरसात के पहले का मौसम होता है।
खेती के लिए कुल लागत
सागवान के हाइब्रिड पोधे काफी ज्यादा महंगे होते है। यदि आप बीज से वृक्षारोपण करते है, तो आपको यह सस्ता पड़ेगा। लेकिन काफी सारे किसान भाई बीज से वृक्ष बनाने में अक्षम होते है, क्योंकि सागवान के पौधे (Teak Plants) की उम्र लगभग 18 महीने होना जरूरी है। तभी पौधा वृक्ष बनता है। इसलिए किसान भाई पौधो को नर्सरी से खरीदते हैं।
TEAK PLANTATION ( SAGWAN )
Teak farming requires proper research (in terms of soil test, environment and climate) and good maintenance for 10–12 years. Hence a brief overview will be on the website regarding teak plantation. pic.twitter.com/9rNpZbfMu5— Siya Agrotech Private Limited (@PrivateSiya) July 28, 2020
सागवान की अच्छी प्रजाति का पौधा लगभग 60 रुपये तक मिलता है। आप एक एकड़ जमीन में करीब 400 पौधे की फसल लगा सकते हैं। एक एकड़ जमीन पर 400 वृक्ष लगाने पर आपको 400 बाई 60 यानी 24,000 रुपये मात्र पौधे खरीदने का खर्च आता है। वृक्षारोपण के लिए जमीन में गड्डों की खुदाई का खर्च आता है। वृक्षारोपण के बाद भी देख भाल में भी खर्चा आता है।
एक फसल से करोड़ों का फायदा
सागवान के पौधे को तैयार होने में करीब 12 वर्ष का समय लगता है। तब इसके एक वृक्ष की कीमत करीब 25,000 रुपये होती है। सागवान के वृक्ष एक साथ काटने योग्य नहीं होते। केवल आधे वृक्ष ही 12 वर्ष में तैयार हो पाते है। इस प्रकार किसान 12 वर्ष बाद करोड़ों रुपयों का मुनाफा कमाता है। इसके बाद उसे फायदा ही फायदा होता है। वृक्ष की कटाई के बाद यह पुनः उग जाता है। क्योंकि एक सागवान के वृक्ष की आयु 200 वर्ष होती है।



