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Dehradun: गांव में रोजगार के कम अवसर होते है, जिससे गाँव के लोगो को अपने परिवार का पेट भरने के लिए शहरों में रोजगार करना पड़ता है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड (Uttrakhand) की स्थिति भी इससे अलग नहीं है, लेकिन अब एक आईटी प्रोफेशनल महिला (IT Professional Woman) के प्रयासों से राज्य के ग्रामीण इलाकों में ही रोजगार के अवसर बन रहे हैं। इनकी कहानी (Story) जानकर आप खुद को आत्मनिर्भर महसूस करेंगे।
आईटी प्रोफेशनल हिरेशा वर्मा (Hiresha Verma) मशरूम की खेती और उसके प्रोसेसिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़कर लोगों को पैसा कमाने का सुनहरा अवसर दे रही हैं। इसके अलावा, उन्होंने अभी तक 2000 महिलाओं और किसानों को मशरूम की खेती (Mushroom Farming) के लिए ट्रेनिंग भी दी है। भारत में एक बड़ी आबादी रोजगार की तलाश में पलायन करती है। अपना घर बार छोड़कर लोग दूसरे शहर में नौकरी करते हैं। परिवार से दूर होने का गम तो होता है, लेकिन परिवार का पालन पोषण की जिम्मेदारी भी होती है।
कौन है आत्मनिर्भर हिरेशा
गृहणी के रूप में काम करते हुए हिरेशा ने वर्ष 2013 में मात्र दो हजार रुपये खर्च कर घर पर ही मशरूम के 25 बैग लगाए। इससे उन्हें पांच हजार रुपये की आमदनी हुई। यहीं से उनके मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया की शुरुआत हुई, जिसे उन्होंने अपना लक्ष्य बना लिया। वर्ष 2015 में पछवादून के छरबा गांव में मशरूम प्लांट लगाया।
हेनजेन टेक्नालॉजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की एमडी व सीइओ हिरेशा के लगाए प्लांट से तीन वर्ष में ही एक हजार किलो प्रतिदिन मशरूम का उत्पादन होने लगा था। अब यह उत्पादन बढ़कर एक टन प्रतिदिन का हो गया है। मशरूम उत्पादन के लिए वर्तमान में 10 एसी कमरें हैं, प्लांट में 27 कर्मचारियों को रोजगार दिया हुआ है। उद्यमी वर्मा बतातीं हैं कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने को वह ट्रेनिंग भी दे रही हैं, ताकि मशरूम उत्पादन में अन्य महिलाएं भी आगे आ सकें।
पहले प्रयास में मिली सफलता
देहरादून की शिमला बाइपास निवासी हिरेशा वर्मा (Hiresha Verma) का नाम मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में राज्य में पहले स्थान पर आता है। देश ही नहीं विदेश तक उनके उत्पादित मशरूम ने धूम मचाई है। आईटी प्रोफेशनल हिरेशा वर्मा मशरूम की खेती और उसके प्रोसेसिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़कर लोगों को रोजगार के अवसर उनके गांव में ही उपलब्ध करा रही है, जिससे गांव के लोग अपने परिवार से दूर ना हो सके।
Hiresha Verma, an agro-preneur from Dehradun was conferred as the Enterprising Women Of The Year by the Ministry of MSME and India SME Forum on International Women's Day. @minmsme @nitin_gadkari @IndiaSMEforum @CherieBlairFndn #internationalwomensday2021 pic.twitter.com/1DODfvN1BT
— Dhriiti-TheCourageWithin (@DhriitiSocial) March 9, 2021
2013 में अपने सर्वेंट क्वार्टर में हिरेशा वर्मा ने महज दो हजार रुपए की लागत से सीप यानी ऑयस्टर मशरूम के 25 बैग रखे। उन्होंने जिस काम को करने का ठाना उसमे सफलता (Success) मिलेगी भी या नही ये नही पता था। लेकिन खुद को आत्मनिर्भर बनाना था। हिरेशा की पहली ही कोशिश कमाल कर गई और 5 हजार रुपए का मुनाफा हुआ।
मुनाफा होने के बाद शुरू की बड़े पैमाने पर खेती
ऑयस्टर मशरूम की खेती में मिली कामयाबी के बाद मिल्ली यानी दूधिया मशरूम की खेती में भी वो सफल रहीं। लगातार मिलती कामयाबी ने उन्हें मशरूम की खेती बड़े पैमाने पर करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद हिरेशा ने देहरादून (Dehradun) स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से ट्रेनिंग लिया और मशरूम (Mushroom) की अलग-अलग किस्मों के बारे में जानकारी एकत्रित करके खेती करने के नए नये तरीके भी सीखे।
ICAR felicitates Ms. Hiresha Verma from Dehradun, Uttarakhand for her outstanding achievements towards the Promotion of Mushroom Farming. #ChooseToChallenge #IWD2021 #ICAR pic.twitter.com/BvMGYody5J
— Indian Council of Agricultural Research. (@icarindia) March 8, 2021
2014 में हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मशरूम अनुसंधान निदेशालय से भी हिरेशा (Mushroom Farmer Hiresha Verma) ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। खाद-बीज से संबंधित मशरूम विभाग, देहरादून से और वित्तीय सहायता के लिए एनएचएम और एनएचबी से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने देहरादून के पास ही एक गांव में 500 बैग क्षमता वाले बांस की तीन झोपड़ियां तैयार की।
इसके बाद उन्होंने ऑयस्टर मशरूम के दो चक्र लिए और उचित तापमान रखते हुए दो साल तक मौसमी खेती की। इसके बाद हिरेशा ने मशरूम की खेती (Mushroom Kheti) के लिए अलग-अलग संस्थानों से तकनीकी जानकारी हासिल करनी शुरू कर दी। रोजाना 20 किलो मशरूम उत्पादन से यह काम शुरू करने वाली हिरेशा आज सफल उद्यमी बन चुकी हैं।
2000 लोगों को दे चुकी हैं प्रशिक्षण
उनके पास आधुनिक उत्पादन उपकरणों और सुविधाओं वाला फार्म है। 1000 किलो प्रतिदिन उत्पादन क्षमता वाले इस फार्म में 10 एयर कंडीशन कमरे हैं, जहां साल भर मशरूम उत्पादन होता रहता है। इस फार्म में 15 लोग जॉब कर रहे हैं। इसके अलावा हिरेशा ने आसपास के क्षेत्र के लोगों को की भी मशरूम की खेती कर आत्मनिर्भर बनाने में हेल्प की है।
Congratulations to @HireshaVerma, Alumni, Spirit of Manufacturing Awards, on winning the We Can Award in the Business Plan Competition for Women Entrepreneurs organized by the @USAndIndia.
She is among the five women in the country to receive this honour!#WomensDay pic.twitter.com/TK4HL015gn
— TiE Delhi-NCR (@TiEDelhi) March 8, 2021
हिरेशा (Hiresha Verma) ने अभी तक 2000 महिलाओं और किसानों को मशरूम की खेती के लिए ट्रेनिंग भी दी है। हिरेशा आज औषधीय मशरूम की किस्मों की भी खेती कर रही हैं। मशरूम उत्पादन के साथ ही हिरेशा ने प्रोसेसिंग की व्यवस्था भी कर रखी है। वे मशरूम से अचार, कुकीज, नगेट्स, सूप, प्रोटीन पाउडर, चाय और पापड़ जैसे बाई प्रोडक्ट्स भी बना रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित किया
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उत्तराखंड की उद्यमी हिरेशा वर्मा को सम्मानित किया गया था। मशरूम उत्पादन में अग्रणी हिरेशा वर्मा को केंद्र सरकार के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने चयनित किया है। आठ मार्च को कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था।
हिरेशा को उनकी कोशिशों के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं। इस पुरस्कार के लिए कृषि भवन नई दिल्ली में बीते जनवरी में आवेदन मांगे गए थे, जिसमें देश भर से छह महिलाओं को अलग-अलग व्यवसाय में चुना गया है। महिला उद्यमी हिरेशा वर्मा प्रोग्रेसिव मशरूम ग्रोअर अवार्ड पाने वाली देश की पहली महिला भी हैं। हाल ही में उन्हें दुबई में संपन्न कनेक्टिग वूमेन चेंजमेकर्स समिट में अमेरिकी दूतावास की ओर से सफल महिला उद्यमी के रूप में सम्मानित भी किया जा चुका है।
Sushant Uniyal ji from Uttarakhand is sharing his success story with PM Shri Narendra Modi.
Sushant ji is engaged in Dhingri Mushroom farming. pic.twitter.com/oIeiYcBfsW
— Mann Ki Baat Updates मन की बात अपडेट्स (@mannkibaat) August 9, 2021
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए देश की जिन छह महिलाओं को चयनित किया है, उनमें वर्मी कंपोस्ट क्षेत्र में आसाम की कनिका तालुकदार, मशरूम उद्यमी उत्तराखंड की हिरेशा वर्मा, नान टिबर फोरेस्ट प्रोडक्ट क्षेत्र में उड़ीसा की प्रमिता परिदा, इंटीग्रेटेड फार्मिक सिस्टम क्षेत्र में जोधपुर राजस्थान की सोनिया जैन, एक्वाफोनिक्स क्षेत्र में केरल की रेखा टी व पुणे की कमल परदेशी का चयन किया है। उन्हें राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनेक अवार्ड मिल चुके हैं।



