Friday, January 28, 2022
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शौकिया तौर पर मछली पालन शुरू किया था, अब राज्य का पहला एक्वाकल्चर फील्ड स्कूल चलाते हैं

Fisheries Machhali palan

Katak: लोगो को मच्छलियाँ देखना और पालना दोनों पसंद आता हैं। हमने कई घरो और होटल्स या ऑफिस में मच्छली का जार देखा हैं, जिसे फिश एक्विलिब्रियम (Fish Equilibrium) कहते हैं। खबर हैं की ओडिशा के कटक में केंद्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर की के अधिकारियों की पहल से राज्य का पहला ऑर्नामेंटल एक्वाकल्चर फील्ड स्कूल खोला (First Ornamental Aquaculture Field School) गया है।

आपको बता दें की इस मछली पालन स्कूल (Fisheries School) को बीते कुछ सालों से मछली पालन के शौक़ीन शख्स राजेश रंजन महापात्र (Rajesh Ranjan Mahapatra) चला रहे हैं। ओडिशा के कटक जिले में आनंदपुर गांव के रहने वाले राजेश रंजन महापात्र आज पूरे राज्य के लिए एक मिसाल और प्रेरणा बनकर उभरे हैं। इनके कार्य को देश की सरकार ने तक सराहा हैं।

शौकिया तौर पर रंगीन मछलियों को पालन किया

एक समय शौकिया तौर पर सजावटी रंगीन मछलियों को पालने वाले राजेश रंजन महापात्र आज के समय में सजावटी मछलियों का व्यवसाय तो कर ही रहे हैं। इसके अलावा उनके मछली पालन फार्म (Machhali Palan Farm) पर ओडिशा के पहले ऑर्नामेंटल एक्वाकल्चर फील्ड स्कूल का भी संचालन किया जा रहा हैं।

इस विशेष स्कूल में लोगों को मछली पालन का प्रशिक्षण देने और स्वरोजगार देने का काम किया जा रहा हैं। राजेश रंजन के बारे में जानने पर पता चला की वे पहले एक्वेरियम में मछलियां पाला करते थे। उन्होंने कई साल तक प्राइवेट कंपनियों में नौकरी भी की हैं। फिर अपने शौक के चलते उन्हें मछलियों का व्यवसाय करने का ख़याल आया। फिर उन्होंने साल 2007 में जॉब छोड़कर अपने गांव में मछलियों को पालने का काम शुरू कर दिया।

उनका काम थोड़ा थोड़ा चलता रहा और फिर कई साल तक मछलियां पालन (Machhali Palan) करने के बाद उन्हें लगा की इस छोटी सी जगह से काम बढ़ाना पड़ेगा। तब गाँव में जमीन की खोज शुरू की। परन्तु वहां ज़मीन नहीं मिली। ऐसे में उन्होंने घर से 40 किमी दूर पांच एकड़ जमीन खरीदी।

गांव में 5 एकड़ जमीन में मछली पालन फार्म खोला

उन्होंने गांव में पांच एकड़ जमीन खरीदकर वहां फार्म बना लिया था, यह बात 2018 की हैं। ओडिशा में रंगीन मछलियों का व्यवसाय शुरू करने पर राजेश शुरूआती समय में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि अधिकतर रंगीन मछलियां कोलकाता में तैयार होती हैं, वहीं से पूरे देश में सप्लाई होती हैं।

उस वक़्त लोगो को या ग्राहकों को यही पता था की अच्छी मछलियां केवल कोलकाता से ही आती हैं। ऐसे में उन्होंने थोक दुकानदारों की जगह छोटे-छोटे दुकानदारों को जोड़कर अपना व्यवसाय शुरू किया। कई लोग उनके फार्म से ही मछलिया लेकर जाते हैं। आज पूरे ओडिशा में उनके यहाँ से ही मछलियां जाती हैं और बिकती हैं।

यह व्यवसाय सदाबहार

यदि कमाई की बात करे तो आज राजेश को साल भर में 6 लाख से अधिक की कमाई हो जाती है। आज के समय में कई लोगो और युवाओं ने राजेश से जानकारी लेकर अपना खुदका ऑर्नामेंटल मछलियों का व्यवसाय शुरू (Machhali Palan Business) कर दिया है। राजेश ने एक अख़बार को इसकी पूरी जानकारी दी हैं। उस जानकारी के अनुसार यह व्यवसाय सदाबहार हैं।

अधिकारीयों ने ऑर्नामेंटल एक्वाकल्चर फील्ड स्कूल (Ornamental Aquaculture Field School) राजेश के फार्म में खोलने का सोचा और फिर इन्हे शामिल कर लिया, जिससे लोगो और किसानों को प्रशिक्षण देने में मदत मिले। यहां पर अब आदिवासी महिलाओं को भी प्रशिक्षण देने की बात चल रही है।

आदिवासी महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी

महिलाये मछली पालन का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। महिलाओं को टैंक और तकनीकी दिया जायेगा। यह महिलाएं मछलियों का प्रोडक्शन करेंगी और सेल करने के लिए राजेश को दे देंगी। क्योंकि राजेश पहले से इस व्यवसाय में हैं। ऐसे में महिलाओं को मदद मिल जाएगी।

यदि कोई और मछलियों का व्यवसाय शुरू करना चाहता है, तो प्रधानमंत्री मत्स्य योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) की मदद से मछली पालन का व्यवसाय शुरू कर सकता है। सरकार की योजना के तहत कई छोटे-बड़े प्रोजेक्ट चलाये जा रहा हैं। जिनको जैसी सुविधा हो, वह उस प्रोजेक्ट के तहत मछली पालन क्षेत्र में उतर करता है।

ENN Team
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