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Udaipur: खेती हर किसी के मध्य बहुत ही प्रचलित है। हर युवा इस पर अपना हाथ आजमा रहा है। हमने देखा कि है कि खेती के क्षेत्र मे नए प्रयोग कर युवा सफल भी हो रहे है। खेती से ही संबन्धित जोधपुर से एक खबर आ रहीं है। जहां वकालत का पेशा करने वाले एक व्यक्ति ने अपना यह कार्य छोड़कर चार साल से उदयपुर आकर खेती कर रहे है। 40 साल के युवा जिनका नाम रविन्द्र सिंह चूंडावत (Ravindra Singh Chundawat) है।
उन्होंने खेती में ऐसा हाथ आजमाया की कुछ ही समय मे उन्होने खुद को लखपति बना दिया। रवीन्द्र ने फार्म हाउस (Farm House) की अपनी दो से ढाई बीघा की जमीन में पॉली हाउस बनाकर खीरा तथा ककड़ी की खेती (Cucumber Farming) की है। रवीन्द्र ने यह बिजनेस कर केवल 1 वर्ष में ही 40 लाख रुपए की कमाई कर ली है।

इसके बाद वह आगे बढ़ते गए। दो साल के अंतर्गत ही रवीन्द्र ने एक और पॉली हाउस निर्मित किया। अब कि बात करे तो पांच बीघा जमीन पर रवीन्द्र ने 2 पॉली हाउस बनाई है। जिसको मदद से साल भर में वह एक करोड़ रुपए की कमाई कर लेते हैं।
जोधपुर के किसान ने पाली हाउस बनाकर खेती की बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति का किया ईस्तेमाल
रवीन्द्र जी अपनी खीरा-ककड़ी की खेती करने के लिए बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए वह पानी व्यर्थ न जाए इसका पूरा ख्याल रखते है। वह कुएं में पाए जाने वाले पानी को सबसे पहले बड़ी हौदी में भरते हैं।
उसके बाद बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति को पाइप का इस्तेमाल कर अपने पाली हाउस में पौधे को पानी पिलाते हैं। वैसे आपको जानकारी के लिए बता दे कि पॉली हाउस में अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है।
रवीन्द्र ने वकालत छोड़ खीरा-ककड़ी की खेती कर करोडों की कमाई की
रवीन्द्र कह्ते है की जब वह जोधपुर में वकालत किया करते थे, उसी समय उनके मन में अलग कुछ नया अनोखा करने का मन हुआ। इस बीच ही रवीन्द्र को पता चला कि पाली हाउस बनाकर खीरा-ककड़ी की खेती से उदयपुर में अच्छे दाम मिलते हैं।

जिसके बाद रवीन्द्र ने इस नए खेती के बिजनेस की शुरुआत उदयपुर जिले से करने मन बनाया। रविन्द्र सिंह ने इस खेती से बहुत क्रम समय मे ही अच्छी आमदनी कर ली। कुछ साल में ही उदयपुर मे रवीन्द्र के आलीशान फ्लैट है और दो लग्जरी कारें भी हैं।
एक साल मे 4 बार की जा सकती है खीरा और ककड़ी की खेती
रविन्द्र बताते हैं कि पॉली हाउस को बनाने के लिए लगभग दो से ढाई बीघा जमीन की जरूरत होती है। इतनी जमीन में खीरा-ककड़ी के लगभग दस से लेकर बारह हजार पौधे उगते हैं। इस खेती में एक साल में पूरि 3 फसलें उगाई जाती हैं। क्योंकि यह फैसले 4 महिने में तैयार हो जाती है।

दो से लेकर ढाई बीघा जमीन पर अगर एक पॉली हाउस में ककड़ी कि खेती (Kakdi Ki Kheti) हो तो 1 महीने में लगभग 50 से 60 टन माल तैयार हो जाता है। 20 से 40 रुपए में खीरा ककड़ी प्रति किलो बिकती है। जिससे एक साल में 50 लाख रुपये के लगभग आमदनी हो जाती है।
पाली हाउस के लिए सरकार भी अनुदान देती है
जानकारी के अनुसार अब तो किसानों के लिए केन्द्र ओर राज्य सरकार पॉली हाउस (Polyhouse) निर्मित करने और उसमें खेती करने के लिए लगभग 70 फीसदी तक का अनुदान देने लगी है।
अगर आप भी इस खेती को करना चाहते हैं तो जानकारी के लिए बता दे कि दो से ढाई बीघा जमीन और पॉली हाउस के निर्माण के लिए करीब 35 लाख का खर्चा आपको बैठेगा। जिसमें से 70 फीसदी खर्चा लघु सीमांत किसान राशि के तोर पे सरकार को मिल जाती है।




