
Patna: कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं अर्थात हमारे आसपास के बहुत से बच्चे होते हैं, जो शानदार हुनर या दिमाग रखते हैं, परंतु अवसरों की कमी पैसों की किल्लत या परिवार का पिछड़ा बैकग्राउंड कई बार उन्हें कैरियर के आधे रास्ते से ही पढ़ाई से मुंह मोड़ ना पड़ जाता है। लेकिन कुछ बच्चे और मां-बाप ऐसे होते हैं, जो इन विपत्तियों से लड़ते हुए आगे निकल जाते हैं।
आज की कहानी है उस अमरजीत (Amarjeet Kumar) की, जिसके पास ना तो पिता का साया था ना ही पैसे था तो सिर्फ जज्बा, आगे बढ़ने का और कहते हैं जहां चाह वहां राह तो उसे मदद मिली एक एनजीओ की, जिसने 35 लाख रुपए की स्कॉलरशिप मुहैया करवाकर उसका इंजीनियर बनने का सपना किया साकार।
पिता ने 2017 में ही कहा अलविदा मां ने अकेले संघर्ष कर इस काबिल बनाया पुत्र को
जानकारी के अनुसार अमरजीत कुमार पटना (Patna) के करीब बोरिंग रोड नामक स्थान के रहने वाले हैं, उनके मां-बाप दोनों मजदूरी करते थे, परंतु किसी कारणवश पिता ने 2017 में गुजर गए। लेकिन अपने पुत्र की काबिलियत को देखते हुए मां ने पड़ोस के घरों में मजदूरी करना शुरू किया और बच्चे को पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अमरजीत के अनुसार उसकी आज की सफलता का श्रेय सिर्फ और सिर्फ उसकी मां को जाता है और उन्हीं के आशीर्वाद से वह आज इस मुकाम तक पहुंच पाया। अमरजीत बेंगलुरु स्थित अटारिया विश्वविद्यालय मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दाखिला ले चुके हैं। यहां तक पहुंचने के लिए उनके पास काबिलियत तो थी, परंतु पैसे की कोई सोर्स नहीं। बीपीएल कार्ड के धारक होते हुए उन्होंने प्रयास किया स्कॉलरशिप का और सफल हो गए उसे पाने में।
अमरजीत की काबिलियत को पहचाना, जिसकी बदौलत यह स्कॉलरशिप हासिल हुई
अमरजीत के अनुसार जब उन्हें पता चला कि बेंगलुरु के कॉलेज में उनके 4 साल की फीस रहने खाने हॉस्टल का खर्चा, लाइब्रेरी, ट्यूशन फीस एवं अन्य सभी खर्चे मिला लें, तो करीब 35 लाख रुपए की जरूरत पड़ेगी।
इसके लिए उन्हें एक एनजीओ जिसका नाम है डेक्सटेरिटी ग्लोबल ने एक एंट्रेंस एग्जाम के जरिए स्कॉलरशिप हासिल करने का जरिया बताया और मदद की उस एग्जाम की तैयारी करने में आज उस एग्जाम को पास करके अमरजीत कुमार अटारिया विश्वविद्यालय में प्रवेश पा चुके हैं।
ये ट्रस्ट अब तक सैकड़ों बच्चों की मदद कर चुके
आपको बताना चाहेंगे दोस्तों डेक्सटेरिटी ग्लोबल ट्रस्ट (Dexterity Global Trust) जिसके स्थापक है शरद कुमार (Sharad Kumar)। उन्होंने शुरू से अमरजीत की काफी सहायता की स्कूल की पढ़ाई के लिए भी इस ट्रस्ट के संस्थापक ने अमरजीत का एडमिशन सेंट डोमिनिक सेबियो स्कूल में करवाया जहां वह और उनकी सिस्टर दोनों ने अपनी पढ़ाई की थी।
इससे अमरजीत को शुरू से ही बेहतर स्कूल शिक्षा प्राप्त हुई और वह माइंडसेट आया कि इतनी परेशानियों के चलने के बावजूद वह किसी बड़े कॉलेज में दाखिला ले सकता है। यह ट्रस्ट समाज के कई बच्चों को स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई के लिए मदद करता आया है।
पिछले साल ही एक बच्चे को ढाई करोड़ की स्कॉलरशिप (Scholarship) अचीव करने में मदद की थी और यह न्यूज़ इंटरनेट पर वायरल भी हुई थी। शरद कुमार डेक्सटेरिटी टू कॉलेज के तहत वह कार्यक्रम चलाते हैं, जिससे काबिल बच्चा स्कॉलरशिप की मदद से उच्च शिक्षा हासिल कर सके।
ऐसे काबिल बच्चे हो तो उन्हें सही मुकाम पहुंचने के लिए मार्गदर्शन अवश्य करें
असली सफलता यह नहीं कि आप किस मुकाम तक पहुंचे बल्कि सही मायनों में सफलता उसे कहेंगे कि आपने कितने लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया। हम शुक्रगुजार हैं शरद और उनके एनजीओ (NGO) का जिन्होंने ऐसे बच्चों का भविष्य संवारने का जिम्मा उठाया।
आपसे भी कहना चाहेंगे कि अगर आपके आस पास ऐसे काबिल बच्चे हैं, तो उन्हें किसी एनजीओ या सरकारी योजना तक पहुंचने में उनकी मदद करें ताकि समाज और देश को काबिल और हुनरमंद लोग मिल सके।



