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Mysore: भारत देश मे त्योहारों के सीजन मे तो अगरबत्ती की डिमांड कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए अगर आप कम बजट वाले बिजनेस की खोज मे है, तो अगरबत्ती बनाने का बिजनेस (Incense Stick Business) आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। अगरबत्ती बनाना बहुत ही आसान है। कम बजट मे स्टार्ट करके आप इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते है।
महिलाओं के लिए ये बिजनेस (Agarabattee Business) सबसे बड़ा मुनाफा कमाकर देने वाला है। महिला वर्ग सबसे मजबूत वर्ग होता है, पर लोगो ने उन्हें कम आका, जिससे पहले की महिलाएं चूल्हा चौका तक सीमित रह गई थी, पर आज की हर एक महिला अपने आप में सेल्फ डिपेंड हो रही है और सरकार के साथ साथ प्राइवेट कंपनी भी उनकी मदद में लगी है।
देश में बहुत से NGO चल रहे है, जो महिलाओं के हित में काम करते है। बहुत से व्यापार है जैसे अचार, पापड़, दोना पत्तल, इन उद्योग में 90 प्रतिशत महिलाओं की जरुरत होती है। एक और ऐसा उद्योग है, जहाँ अगरबत्ती का व्यापार किया जा रहा है, जो महिला सशक्ति करण का हिस्सा है। अब जानते उन महिलाओ के बारे में, जिन्होंने इस बिजनेस से अपनी जिंदगी बदल दी।
कौन है यह महिला और किस तरह किया अपने उद्योग की स्थापना
नंदिनी रंगनाथ (Nandini Ranganath) जिनकी उम्र करीब 38 वर्ष है। उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा के लिए कर्नाटक से अपने गांव से मैसूर शिफ्ट हुई थी। बीकॉम से ग्रेजुएशन कर आत्मनिर्भर का सपना लिए अपने परिवार का समर्थन करना चाहती थी।
इस के चलते उन्होंने अपना अगरबत्ती का व्यवसाय (Agarabatti Business) शुरू किया। इसके लिए उन्होंने साईकिल पूर अगरबत्ती के साथ हाथ मिलाया और अपने पति की सहायता से एक किराए के स्थान पर नंदिनी यूनिट नाम से एक व्यापार शुरू किया।
कंपनी के चलते ही वह अपनी बेटी की शिक्षा पूर्ण कर अपने गांव तलकाडु वापस जाने के लिए सक्षम हुई। जहा उनकी खुद की जमींन थी और वहां एक बेहतर कार्य करने के लिए अच्छा जुगाड़ कर सकती थी। केवल एक मशीन के माध्यम से शुरू हुआ काम अब 8 मशीनो से होता है और उनके काम को 9 महिलाएं चला रही हैं।
1500 से ज्यादा महिलाओं को मिला समर्थन
नंदिनी रंगनाथ अपने काम को लगान से करती रही और आज वह 1,500 महिलाओं में से एक हैं, जिनको साइकिल प्योर अगरबत्ती (Cycle Pure Agarbathies) के माध्यम से आउटसोर्सिंग पहलों का समर्थन प्राप्त हुआ। सन 1950 से अगरबत्ती निर्माण कंपनी ग्रामीण महिलाओं के साथ समूह बनकर अगरबत्ती बनाने का काम करवाते है। जिससे गामीण महिलाओं को रोजगार के साथ आमदनी से घर की मदद मिल जाती है।
साईकिल प्योर अगरबत्ती के मैनेजिंग डायरेक्टर अर्जुन एम रंगा से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वे कच्चे माल की व्यवस्था करते है और ग्रामीण महिलाओं को देते है, फिर वह एक सप्ताह में बने प्रोडक्ट को कलेक्ट करके लाते और उन्हें उनका भुगतान करते हैं और आगे के काम के लिए और कच्चा माल उपलब्ध कराते है।
With firm vision and values that continue to guide us to this day, Shri. N. Ranga Rao and Smt. Sita Ranga started Cycle Pure Agarbathies in 1948. A humble beginning where the home doubled up as the factory & the family members served as the staff. #CycleThroughTheYears #Throwback pic.twitter.com/FN78BAixks
— Cycle.in (@CYCLEdotIN) November 2, 2020
नंदिनी इन्ही महिलाओं में से एक हैं, जिसने इस पहल को आगे बढ़ाया। शुरू में उन्होंने एक यूनिट में ‘Cycle Pure Agarbathies’ के लिए काम किया और समय के साथ टेक्नोलॉजी को सीख और उन्हें अपनाया। अपने काम को और बढ़ाया। इस काम के लिए कई महिलाओं को रोजगार दिया।
काफी सारी महिलाओं को रोजगार दिया
कुटीर उद्योग ग्रामीण भारत का सबसे अच्छा रोजगार हैं। इन लघु उद्योगों में काम करने से ग्रामीण महिला के साथ साथ उनका परिवार भी सशक्त बनाता है। एन आर ग्रुप के ब्रांड, Cycle Pure ने ग्रामीण कर्नाटक क्षेत्र में कुटीर उद्योग द्वारा दिए गए अवसर को पहचाना और इस क्षेत्र में महिलाओं को रोजगार दिया। देश में अगरबत्ती बनाने वाले क्षेत्र में व्यापक रूप से ग्रामीण महिलाओं का योगदान है।
अर्जुन का कहना है कि पुरुष वर्ग सुबह से काम पर निकाल जाते हैं और महिलाएं घर में रहती हैं, बच्चों और घर परिवार को संभालती है। महिलाये घर के काम से फ्री हो जाती है, तो उनके पास खाली समय होता है, जब काम खत्म कर बच्चे को स्कूल पंहुचा देती हैं। इसीलिए हमने इस पर ध्यान दिया और महिलाओं को आय का एक माध्यम प्रदान किया।
The Govt's move is going to give a lot of relief & confidence to MSMEs: @arjunranga, MD, Cycle Pure Agarbathies tells TIMES NOW. pic.twitter.com/Mvm5ZVKqSL
— TIMES NOW (@TimesNow) May 14, 2020
अर्जुन को याद हैं कि कैसे उनके दादा और साइकिल अगरबत्ती के फाउंडर एन रंगा राव ने ग्रामीण महिलाओं को आउटसोर्स प्रदान करने का फैसला लिया, जिससे उन्हें सशक्त बनाया गया। अर्जुन कहते है अगरबत्ती की ज्यादा पहचान महिलाएं को होती है, जिससे वह अपनी निपुणता से संभालती हैं। क्योंकि इन उत्पाद को सहूलियत से संभालने की जरुरत होती है। कंपनी ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण महिलाओं और उनके परिवारों को रोजगार प्रदान किया।
बिज़नेस को बढ़ावा मिला
वे किस तरह काम करते हैं, इस विषय में अर्जुन से बात करके पता लगा की महिलाओं के प्रशिक्षित समूह से कुछ जिम्मेदार महिलाओं का चयन करते हैं। जो दूसरों का मार्ग दर्शन करती हैं और उत्पाद की गुणवत्ता तय करती हैं। ये महिलाएं फिर नए कार्यकर्ताओं की मदद करती है।
अगरबत्तियां शुरू में महिलाये अपने हाथों से बनाती थी, 2005-06 में यह मशीनीकृत प्रक्रिया बन गई। महिलाओं को उनके घरों में यह मशीनें उपलब्ध कराई गई। आज सिर्फ प्रीमियम उच्च गुणवत्ता वाली अगरबत्ती हाथों से बनाई जाती है।



