
Nagpur: कहते है किसी भी काम को करने के लिए उम्र नही देखी जाती है। जुनून और जस्बा हो तो हर काम आसान होता है। गाँव मे भी कई ऐसी महिला है, जो आत्मनिर्भर बनने के लिए गांव को रूढ़िवादी सोच को तोड़ आगे बढ़ रही है। ऐसी ही आज हम आपको ऐसी महिला अर्थात दादी की कहानी (Dadi Ki Kahani) से रूबरू करा रहे है, जो आपके अन्दर काम करने के जुनून को पैदा कर देगा।
जलेबी फाफड़ा (Fafda) यह गुजराती स्नैक्स है जो पूरे गुजरात में शौक से खाना पसंद करते है। फाफड़ा को बेसन के लिए बेसन का इस्तेमाल किया जाता है और फाफड़ा तैयार होने के बाद इसे जलेबी या चटनी इत्यादि अपनी मनचाही चीजों के साथ सर्व करके खाने का मज़ा ही कुछ ओर होता है। फाफड़ा रेसिपी (Fafda Recipe) यह बीते कुछ दिनों से ज्यादा ही मशहूर हो रही है।
तारक मेहता का उल्टा चश्मा में जेठालाल तो हर किसी का पसंदीदा शो है। आपने जेठालाल के मुंह से कई बार जलेबी फाफड़ा का नाम सुना होगा। जेठालाल को ‘Jalebi fafda’ खाना बहुत ही पसंद है और अपनी पसंदीदा डिश का नाम सुनते ही जेठालाल गड़ा के मुंह में पानी आ जाता है।
काम करने का जोश बना जस्बा
गुजरात का मशहूर नाश्ता फाफड़ा, आज देश के तकरीबन हर हिस्से में खाने के रूप में पसन्द किया जाता है। गुजराती घरों में रविवार या किसी विशेष पर्व के दिन लोग बड़े चाव से फाफड़ा और जलेबी खाना पसंद करते हैं। इसी फाफडे ने कलांवती (Kalawanti Doshi) की जिंदगी बदल दी है, फाफड़ा नागपुर (Fafda Nagpur) की कलावंती दोषी के लिए परिवार चलाने का रास्ता बना हुआ है।
वह पिछले 40 सालों से ठेले पर फाफड़ा बनाकर बेचने का काम कर रही हैं। इस काम को करने में उन्हे कोई भी झिझक नही है। 75 साल की उम्र में दादी आजभी नोजवानो को टक्कर दे रही है। 75 साल की उम्र में फाफडा बनने के तरीके को देख लोग हैरान रह जाते है दादी के अंदर आज भी वही जोश है उनका जोश आज भी कम नही हुआ। कई लोग तो उनके इस जोश को देखने के लिए भी उनके पास आते हैं।
सोशल मीडिया में मचाई धूम
सोशल मीडिया पर उनका एक Video वायरल होने के बाद, आज वह नागपुर के साथ-साथ देश के हर कोने में फेमस हो गई हैं। इतनी उम्र में भी जिस जोश और मुस्कान के साथ वह अपने काम को करती हैं, वह कई युवाओं के लिए प्रेरणा से कम नही है।
कमाई का जरिया
गुजरात से यहां आने के बाद, थोड़े वक्त के लिए मेरे पति ने नमकीन बनाने की दुकान में काम किया था। लेकिन वहां से मिलने वाली सेलरी से घर खर्च नही चल पाता था। बड़ी मुश्किल से 2 समय की रोटी के लिए जुगाड़ होता था। तभी हमने खुद का काम स्टार्ट करने के बारे में विचार किया और ‘राममनुज फाफड़ावाला’ (Rammanuj Fafdawala) नाम से अपना बिज़नेस को नया रूप दिया।
दादी बताती है 40 साल पहले मेरे पति ने फाफड़ा बनाने के काम स्टार्ट किया था। वो अकेले ही परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाये हुए थे। उन्हें अकेले मेहनत करता देख, मैंने उनका साथ देने का विचार किया। उन्हें देखकर ही मैंने फाफड़ा बनाना सीखा। इसी से मेरे पूरे परिवार का पालन पोषण होता है।
कलावंती और उनके पति ने इस व्यापर के जरिये अपने पांच बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी और घर का खर्च निकलता है। आज वह अपने सबसे छोटे बेटे भावेश के साथ मिलकर काम को आगे बढ़ा रही हैं। इतनी उम्र में भी उनका जोश देखने लायक रहता है। उनका अपने काम के प्रति जोश काम नही हुआ।
पति की मौत के बाद नही हारी हिम्मत
11 साल पहले उनके पति उनका साथ छोड़ इस दुनिया को अलविदा कह गये थे। लेकिन कलावंती ने हार नही मानी अपने बुलन्द होसलो से अपने काम को आगे बढ़ाते चले गई। रास्ते मे कई कठिनाई आई लेकिन सभी पार करते हुए अपने बिजनेस को चालू रखा। उन्होंने दो साल इस काम को अकेले ही संभाला। उनकी तीनों बेटियों की शादी हो गई थी और बड़ा बेटा बाहर काम करने निकल गया।
75 की उम्र में 25 का जोश. नागपुर की इस दादी के ठेले पर बने फाफड़े, जाते हैं अमेरिका तक. लोग हैं जिनके फाफड़े के दीवाने। pic.twitter.com/ZhebQF0Ta8
— sanatanpath (@sanatanpath) September 15, 2021
ऐसे में अगर वह चाहतीं, तो यह काम बंद कर सकती थीं। लेकिन उन्होंने इस काम को जारी रखने का निर्णय किया। 40 साल से हम एक ही जगह पर अपना ठेला लगा रहे हैं और हमने अपने फाफड़ों के स्वाद के कारण ही, इतना नाम कमा लिया है की दूर दूर से लोग फाफडा खाने आते है। कलावंती, लोगो के इस स्वाद को हमेशा बनाये रखना चाहती हैं।
कई लोगो की सुबह होती है इसी फाफडे से
इन स्नैक्स में गुजराती स्वाद लाने के लिए, सारे नाश्ते मूंगफली के तेल में शुद्धता से बनाए जाते हैं। यही कारण है कि नागपुर में बसने वाले कई गुजराती, अपने दिन की शुरुआत दादी के बने फाफड़े से ही करते हैं। जितनी खुशी के साथ कलावंती इस फाफडा में जान डालती है, उनके बेटे भी उसी खुशी के साथ इस काम को आगे बढ़ा रहे है।
भले ही कलावंती दोषी (Fafdawali Dadi Kalawanti Doshi) ने अपना सारा जीवन बड़े संघर्ष के साथ बिताया हो, लेकिन कभी अपने होसलो को कम नही होने दिया पति की मौत के बाद भी सारे घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर खुशी के साथ जीवन बिता रही है। लेकिन उनके चेहरे की मुस्कान, उनके पास फाफड़ा खाने आए लोगों का भी दिन बना देती है। जिस खुशी के साथ वो फाफडा बनाती है वो हर किसी के लिये प्रेरणा है।



