गरीबी झेली, खेतों में मज़दूरी भी की, अब केले के कचरे से करोड़ों कमा रहा 8वीं पास शक्स

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PM Murugesan Machine
Social Change Maker from Madurai, PM Murugesan developed a recycling method to use banana fibre found in plantain waste into usable ropes and earning crores. PM Modi praises Murugesan who made a machine to make ropes from the waste of Banana.

Madurai: हर व्यक्ति के अंदर वो ताकत होती है, जो उसे एक सफल व्यक्ति बना दे, बस उसे पहचानने और सही दिशा में मोड़ने की जरुरत होती है। जो ऐसा कर ले वह सफल हो जाता है और जो अपनी सोच और संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं करता, वह हमेशा गर्दिश में ही रहता है और अपनी फूटी किस्मत हो कोसता रहता है। आज हम एक मेहनती शक्स की बात कर रहे है, जिसने अपनी किस्मत खुद लिखी है।

तमिलनाडु (Tamilnadu) में मदुरै (Madurai) के मेलाक्कल गांव में रहने वाले एक स्कूल ड्रॉपआउट व्यक्ति ने केले के कचरे से करोड़ों की कमाई कर सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। PM Murugesan नाम का यह शक्स केले के कचरे से कटोरी, बैग, टोकरी, बास्केट और अन्न सामान सामन बनाकर करोड़ो कमा रहे है, बल्कि सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दे रहे है। मुरुगेसन ने एक खास मशीन (Murugesan Machine) भी बनाई है, जिसकी मदद से केले के कचरे को रस्सी बनाया जा सकता है और इस रस्सी का इस्तेमाल अन्न चीज़ों में किया जाता है।

दिक्कतों के चलते उन्हें बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी

तमिलनाडु के Murugesan केवल 8वीं तक ही पढ़े हैं। जीवन में कई दिक्कतों के चलते उन्हें बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। इसके बावजूद जिस तरह से उन्होंने केले के कचरे का इस्तेमाल किया वो बहुत बड़ी मिसाल है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, मुरुगेसन एक गरीब किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता ने बड़ी मुश्किल से उनको स्कूल भेजा। परन्तु 8वीं के बाद उनके पास इतने पेसे नहीं थे कि वो Murugesan की पढ़ाई जारी रख पाते।

जिसके चलते इतनी छोटी उम्र में ही Murugesan अपने पिता के साथ खेतों पर काम करने के लिए विवश हो गए। मुरुगेसन ने खेती में कई तरह के प्रयोग किए। उन्हें लगातार असफलताएं मिलीं। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। इसी सिलसिले में साल 2008 में Murugesan ने अपने परिवार के साथ मिलकर केले के पेड़ के कचरे का उपयोग करके काम करने का निर्णय लिया।

फैसला किया कि वो केले के कचरे का उपयोग करेंगे

उन्होंने थोड़ी जानकारी जुटाकर फैसला किया कि वो केले के कचरे का उपयोग करेंगे। कई लोग पहले से ही केले के धागे का उपयोग माला में फूलों को पिरोने के लिए कर रहे थे। फिर मुरुगेसन इसमें कुछ नया प्रयोग करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने नारियल की भूसी से रस्सियां बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीन में केले का कचरा डाला। उन्हें उम्मीद थी कि ऐसा करने से उन्हें केले की रस्सी प्राप्त हो जाएगी।

प्रयोग करने पर यह आइडिया काम नहीं आया और आगे ऐसे कई प्रयासों के बाद 2017 में Murugesan ने साइकिल पहिया, रिम्स और अन्न चीज़ों का उपयोग करके केले के कचरे की कताई के लिए अपनी खुद की एक मशीन बना ली। Murugesan ने मशीन बन जाने के बाद जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) से संपर्क किया। उन्होंने संस्थान से मदद मांगी और उन्हें मशीन देखने के लिए बुलाया गया।

संस्थान के अधिकारियों ने अपने दौरे में Murugesan की मशीन की बहुत तारीफ की और उसे बहुत कारगर बताया। इससे प्रेरित होकर Murugesan ने अपनी मशीन को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए 1.5 लाख रुपए का अन्य निवेश किया और उस अपने नाम पेटेंट करा लिया। इस तरह Murugesan अब न सिर्फ़ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि 300 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उनके साथ काम करने वाली अधिकतर महिलाएं हैं।

M S Ropes Production Center Earning

आज मुरुगेसन की कमाई आपको हैरान कर देगी। उनके ‘M S Ropes Production Center’ का साल का टर्नओवर लगभग 1.5 करोड़ रुपए है। इसके अलावा उनकी कंपनी कई पुरस्कार और अवार्ड भी जीत चुकी है। Murugesan की कहानी आज सभी लोगो को प्रेरित करने के लिए काफी है।

एक बार देश के प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) जी ने कृषि अवशेषों से धन कमाने की दिशा में देश में हो रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए मदुरै के मुरुगेसन का जिक्र किया था और बताया कि उन्होंने केले (Banana) के अवशेषों से रस्सी बनाने की एक मशीन (Machine) बनाई है।

उन्होंने कहा, ‘मुरुगेसन जी के इस नवोत्पाद से पर्यावरण और गंदगी का भी समाधान होगा तथा किसानों के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता भी बनेगा।’ प्रधानमंत्री ने कहा था कि इन लोगों के बारे में देश को बताने का उनका मकसद इतना है कि लोग उनसे प्रेरणा लें।

उन्होंने कहा, था की जब देश का हर नागरिक अपने जीवन में विज्ञान का विस्तार करेगा, हर क्षेत्र में करेगा, तो प्रगति के रास्ते भी खुलेंगे और देश आत्मनिर्भर भी बनेगा और मुझे विश्वास है कि ऐसा देश का हर नागरिक कर सकता है।

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