किन्नर मोहिनी ऐसे बनी आत्मनिर्भर, गहने बेचकर और कर्ज़ लेकर कड़कनाथ मुर्गा फार्म से बम्बर कमाई कर रही

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Mohini kinnar started kadaknath murgi palan and earning money in lakhs. How Start kadaknath Poultry farming in Hindi. Self reliant kinnar Mohini business story and how she became Atmanirbhar.

File Photo

Lucknow: भारत सरकार ने किन्नर समाज को कई अधिकार दिए है और उनके उत्थान के लिए भी अनेक कार्य किये है। किन्नर हमारे समाज का एक अभिन्न हिस्सा है। इसे थर्ड जेंडर का दर्ज़ा प्राप्त है। वैसे को ख़ुशी के वक़्त किन्नर लोगो के घरों में जाकर पैसे मांगते है। शादी विवाह में नाचते है।

इसके उलट मोहिनी किन्नर अपनी कमाई करने पर यकीन रखती है। उनका ज्यादातर समय अपने हाथों से मुर्गियों को दाना देने में व्यतीत होता है। आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ाते हुए मोहिनी (Mohini Kinnar) ने पिछले साल कड़कनाथ मुर्गी फार्म (Kadaknath Murgi Farm) चालु किया था। मोहिनी का प्रयास है कि उनका ये काम सफल हो, जिससे उनके समाज के दूसरेअन्न लोग भी किसी व्यवसाय का रुख ले।

रोजगार के लिए जानकारी जुटाई

मोहिनी (Kinnar Mohini) ने अपने रोजगार के लिए बहुत जानकारी जुटाई। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के द्वारा विकसित सहभागिता संस्था की सहायता से मोहनी किन्नर ने मलिहाबाद में अपनी आजीविका के लिए मुर्गी पालन व्यवसाय (Poultry farm Business) को शुरू किया।

मलिहाबाद के आम के बागों में मुर्गी पालन को व्यवसायिक बनाने के लिए केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा फार्मर्स फर्स्ट प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रयासों के फल स्वरुप कई भूमिहीन और जरुरतमंद किसानों ने आम के बागों के बीच में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित कारी निर्भीक, कारी देवेंद्र, कारी शील और कड़कनाथ मुर्गों को पालना शुरू किया। किन्नरों को कई जगह इग्नोर किया जाता है। उनके साथ दुर्व्यवहार भी होता है।

मोहिनी ने अपना खुदका व्यवसाय शुरू किया

सरकार द्वारा चलाई जा रही मुर्गी पालन योजना से सीख लेकर किन्नर मोहिनी ने परंपरा से परे जाकर अपना खुदका व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने फार्मर फर्स्ट परियोजना से जुड़कर अपना कड़कनाथ पोल्ट्री फार्म (Kadaknath Poultry farm) खोलने का फैसला किया। इसके बाद सहभागिता स्वयं सहायता समूह, मलिहाबाद से इसके बारे में ट्रेनिंग हासिल की।

जिसमे इनको कम खर्चे में फेंसिंग बनाना, दाना बनाना और मुर्गियों को बीमारियों से बचाने की टिप्स दी गई। फिर ट्रेनिंग लेने के बाद मोहिनी ने आर्यन बागवान पोल्ट्री फार्म, माल-मलिहाबाद से मुर्गों की एक किस्म के 500 कड़कनाथ चूजे खरीदे और अपना व्यवसाय आरम्भ किया।

अन्न किनारों को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी

मोहिनी ने एक हिंदी अख़बार को बताया की लैंगिक भेदभाव के कारण हम लोगों को कोई जल्दी न तो नौकरी देता है और न ही बैंक स्वरोजगार के लिए लोन देना चाहती है। ऐसे में बेरोजगार होने से अच्छा किन्नर समाज (Kinnar Samaj) का मुख्य पेशा शादी या बच्चा होने पर घर-घर जाकर बधाई देना, नाचना और ईनाम लेना बन गया है। उन्होंने किन्नरों को अपनी गए दी है कि अपना खुद का व्यवसाय शुरू करके आत्मनिर्भर बनें।

इन सभी मुर्गियों को पालना और खिलाना आसान है। यह रोग से भी बची रहती है। एक समय में बाद बाज़ार में भी इनका अच्चा भाव मिल जाता है। मार्किट में भी इनकी भारी डिमांड बनी रहती है। मुर्गी पालन फूल टाइम फायदे का व्यवसाय है। इसे कोई भी कर सकता है और इसे शुरू करने में लागत भी कम आती है।

एक हिंदी अख़बार में छपी खबर के मुताबिक़ आम बागवानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से मलिहाबाद प्रखंड के तीन गांव में फार्मर फर्स्ट परियोजना चलाई जा रही है, जिसके तहत आम बागवानों को बांगो में पाले जानी वाली मुर्गी की नस्ल जैसे कैरी निर्भीक, कैरी देवेन्द्र, अशील, कड़कनाथ उपलब्ध करवाई जा रही है।

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