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Gaya, Bihar: हमारा देश भारत युवाओं का देश है। भारत की कुल आबादी में 65 प्रतिशत युवा है। इन युवाओं में अधिकतर छात्र है। छात्र ही देश का भविष्य है। हर छात्र अपने जीवन में सफैला हासिल करना चाहता है। सफलता प्राप्त करने पर हर बच्चे के माता पिता और शिक्षक बहुत खुश होते है। किसी ने सच कहा है की आज की गई मेहनत और प्रयास भविष्य में सफलता (Success in Furure) पाने का आधार बन जाती है।
आज देश के कुछ स्टूडेंट्स ने एक ऐसा काम किया है, जिससे वे भविष्य में सफलता जरूर हासिल कर लेंगे। आज इन बच्चों ने अपना भविष्य पहले से ही सवार लिया है। बच्चों को आज के आधुनिक समय में दिन प्रतिदिन हो रहे परिवर्तन के अनुसार शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए, ताकि वे आने वाले समय के अनुसार अपने आप को ढाल सकें।
बिहार के एमवीवीडीएवी सीनियर सेकेंडरी कपाल मोचन स्कूल के छात्र आज मिसाल बन रहे है। बिहार के बच्चे किसी भी मामले में कम नहीं हैं। सभी क्षेत्र में अपना परचम लहरा चुके बिहार के युवाओं ने एक और कारनामा कर बिहार वासियों का नाम रौशन किया है। बच्चो ने एक ‘एयर-वाटर प्रोजेक्ट’ (Air Water Project) बनाया है, यह हवा की नमी से पानी बना देता है।
आपको बता दें की जिला स्कूल गया के छात्रों और उसके एक शिक्षक ने देश भर के 300 स्कूलों में पहला स्थान प्राप्त किया है। खुली हवा की नमी से पानी बनाने (Water From Thin Air) में जिला स्कूल गया के छात्रों ने सफलता हासिल की है। यह पटोजेक्ट इतना ख़ास है की स्कूल के छात्रों द्वारा बनाए गए एयर वाटर जनरेटर प्रोजेक्ट को भारत सरकार ने पेटेंट कराया है।
मीडिया में खबर आई है की इस बिहार के बच्चों द्वारा बनाये गए इस प्रोजेक्ट के पेटेंट में एटीएल इंचार्ज डॉ देवेंद्र सिंह, स्टूडेंट प्रेम सागर, प्रीतम कुमार व श्रेया सिन्हा एप्लिकेंट व इन्वोटर है। अब चारों के बीच बांड भरा जाना शेष रह गया है।
साइंस टीचर देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में अटल टिकरिंग लैब के स्टूडेंट द्वारा वाटर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट तैयार किया गया, जिसे केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी दी गई और एयर-वाटर प्रोजेक्ट को भारत सरकार ने पेटेंट कराया है।
कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट डिजाइन व ट्रेडमार्क ने जिला स्कूल गया (Gaya Bihar School) को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइटस का सटिर्फिकेट जारी किया है। इसके अलावा नीति आयोग ने इस प्रोजेक्ट को मार्केट में लाने की जिम्मेदारी डेल व लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन को दी है।
The enthusiastic students from #AtalTinkeringLab Zila School Gaya, #Bihar exhibited their creativity and #AIMtoInnovate.
Their prototype, dew and air water generator was on display at the Rashtrapati Bhavan. pic.twitter.com/xZxoOgt1cU
— Atal Innovation Mission Official (@AIMtoInnovate) November 15, 2019
बिहारी इन्नोवेटर बच्चो ने इस प्रोजेक्ट का नाम एयर वाटर जनरेटर रखा गया है। बताया जा रहा है की इस जनरेटर (Air Water Generator) की मदत से हवा की नमी से पानी बनाया जाएगा, जो कि सौ प्रतिशत शुद्ध व एनर्जी युक्त होगा।
पूरे देश के सभी एटीएल स्कूलों (ATL Schools) के प्रजेक्टो को पछाड़ते हुए कई राउंड की टेस्टिंग के बाद कंट्रोलर ऑफ पेटेंट ने जिला स्कूल गया के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसकी सबसे अहम् बात है कि ड्राई जोन अर्थात जिस स्थान पर पीने के पानी की समस्या होती है, उस स्थान में पीने का पानी कम खर्च में हासिक हो जायेगा।
The enthusiastic students from #AtalTinkeringLab Zila School Gaya, #Bihar exhibited their creativity and #AIMtoInnovate.
Their prototype, dew and air water generator was on display at the Rashtrapati Bhavan. pic.twitter.com/V9TwvuQnOg
— NITI Aayog (@NITIAayog) November 16, 2019
इस जनरेटर की मदत से दिन भर में लगभग 10 से 15 लीटर हवा की नमी से पानी बनाया जा सकता है, जो किसी भी सामान्य परिवार के लिए दिन भर का पिने के पानी का खर्च है। इसी के चलते एटीएल मैराथन प्रतियोगिता में इस प्रोजेक्ट ने 300 में प्रथम स्थान प्राप्त किया। पूरे देश में इस प्रोजेक्ट की वाह वही हो रही है।
Never give up on your aim: President @rashtrapatibhvn
Young minds from across the country were selected from the ATL Tinkering Innovation Marathon 2018 to showcase their ideas at the Rashtrapati Bhavan. #AIMtoInnovate pic.twitter.com/O9MXIV4g3z
— NITI Aayog (@NITIAayog) November 16, 2019
बताया गया है की छात्रों द्वारा बनाये गए एयर वाटर जनरेटर (Air Water Generator) को भविष्य में सोलर सिस्टम से चलाने की योजना है। हवा की नमी को पानी में बदलने वाले इस मशीन में बिजली और मैनुअली चलने वाली विंड मशीन समेत कंडेंसर, कैपेसिटर, फैन, कंडक्टर, सेमीकंडक्टर तथा छोटे-छोटे कई इलेक्ट्रिक उपकरण का प्रयोग किया गया है। आने वाले समय में भारत सरकार इसका इस्तेमाल करेगी।



