महिला ने शिक्षिका की नौकरी छोड़ी और डेयरी बिज़नेस शुरू किया, गाय के दूध से होने लगी अच्छी कमाई

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Dairy Cow Milk Business
Kerala Woman Ashley John Quits Teacher Job And Started Dairy Cow Milk Business. Now Kottayam Woman Earning Good By Animal Husbandry.

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Kottayam: हमारे देश में पशुपालन करना धर्म का काम माना जाता है। पशुओं को लोग अपने घर के अहम सदस्‍य के तौर पर देखते है। आजकल पशुपालन करके लोग काफी मुनाफा भी कमाते है। आज पशुपालन एक मुख्‍य व्‍यवसाय के तौर पर उभर कर हमारे सामने आ चुका है। डेयरी का बिजनेस करके लोग लाखों में कमाई करते है।

कहा जाता है, कि महिलाऍं पशुओं की देखभाल एक पुरूष से काफी बेहतर करती है। क्‍योंकि उनकी हर एक दैनिक क्रियाओं का ख्‍याल एक महिला अपने बच्‍चों कि तरह रखती है, जैसे पशुओं को के खान पान का ध्‍यान रखना, उनके स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखना इत्‍यादि। घरेलू स्‍तर पर भी देखा गया है कि महिलाऍं दूध से दही, पनीर और मठा काफी बेहतर तरीके से बना पाती है।

हालांकि पहले यह कहा जाता था कि महिलाऍं पुरूषों से बेहतर बिजनेस नहीं कर सकती। लेकिन आज यह परिस्थिति बदल चुकी है। आज की महिला पुरूषों से बेहतर उद्यमी बन कर सामने आ चुकी है। ऐसे ही कार्य को केरल राज्‍य के कोट्टायम में रहने वाली एक महिला ने कर दिखाया है।

केरल (Kerala) राज्‍य के कोट्टायम (Kottayam) में रहने वाली महिला ऐशली जॉन (Ashley John) ने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड कर डेयरी का बिजनेस (Dairy Business) किया और एक सफल उदयमी बन कर दिखाया। किस तरह एशली जॉन ने डेयरी बिजनेस करके मुनाफा कमाया आइये जानते है।

इस तरह की शुरूआत

ऐशली जॉन केरल के एक हाई स्‍कूल में एक शिक्षिका (High School Teacher) के तौर पर काम किया करती थी। उनका प्रारंभ से इंटरेस्‍ट पशुपालन पर था। इस वजह से उन्‍होंने अपने पसंद के कार्य को करने का मन बनाया।

उन्‍होंने डेयरी का बिजनेस शुरू किया। प्रारंभ में उन्‍हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी, क्‍योंकि घर वालों का मानना था कि ऐशली को शिक्षिका के तौर पर ही कार्य करना चाहिए। लेकिन ऐशली ने सब को नजरअंदाज करते हुए अपने मन के मुताबिक बिजनेस करना चूज किया और उसमें सफलता भी प्राप्‍त कर पाई।

ऐशली ने अपने बिजनेस की शुरूआत 2013 में की थी। 2013 में सिर्फ और सिर्फ 5 गायों से ऐशली ने डेयरी का बिजनेस शुरू किया था। उनके इस कदम को आगे बढ़ाने में कृषि, पशु चिकित्‍सक और इस विभाग से रिलेटेड सभी लोगों ने उनका सहयोग किया।

ऐशली गाय के दूध (Cow Milk) से तो मुनाफा कमाती ही है, इसके अलावा वह दूध से दही, घी, मक्‍खन बना कर भी लाभ कमाती है। 5 गायों से शुरू हुआ सफर आज इस स्थिति में पहुँच चुका है कि आज उनके पास 65 गाय हो चुकी है। जिनसे ऐशली की आमदानी में बहुत अधिक वृद्धि हुई है।

कई पुरूष्‍कारों से की जा चुकी है सम्‍मानित

ऐशली को अपने बिजनेस आइडिया, उसमें समर्पण और देश के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आने की वजह से कई पुरूस्‍कारों से सम्‍मानित किया गया है। अपने बिजनेस आइडिया की वजह से उन्‍हें 2013-2014 में कोट्टायम के किसान पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जा चुका है। इसके अलावा प्रखंड पंचायत से भी 1015-16 के लिए सर्वश्रेष्‍ठ महिला उद्धमी का पुरस्‍कार मिल चुका है। ऐशली को 2016-17 में भी सर्वश्रेष्‍ठ महिला उद्यमी का खिताब केरल राज्‍य के द्वारा मिल चुका है।

अपने जुनून की वजह से मिली सफलता

ऐशली जॉन बनना इतना आसान नहीं है, उनकी इस उँचाई तक पहुँचने में उनके लगन और जुनून का बहुत बड़ा हाथ है। ऐशली रोज सुबह 3 बजे उठती है, और सुबह कि शुरूआत अपने फार्म में आकर करती है।

ऐशली सिर्फ पशुओं कि देखभाल करके उनका दूध निकालने का काम नहीं करती, बल्‍कि ऐशली कमर्शियल वाहन तक चलाती है। अपने बिजनेस से जुड़ा हर कार्य ऐशली खुद करती है। उनकी सक्‍सेस स्‍टोरी को बहुत से न्‍यूजचेनल और अखबार वालों ने बताया है। आज ऐशली दुनिया कि हर एक महिला के लिए प्रेरणा स्‍त्रोत बन चुकी है।

डेयरी उद्योग में महिलाओं किे विशेष भूमिका

पशुपालन (Animal Husbandry) मे महिलाओं के अहम रोल को जानने के लिए हमारे देश के कृषि अनंसंधान परिषद के द्वारा 9 राज्‍यों में रिसर्च किया गया। जिससे उन्‍हें पता चला कि महिलाओं कि भागीदारी पशुपालन में 58 प्रतिशत है और मछली पालन में इनकी भागीदारी लगभग 95 फीसदी है।

इस रिपोर्ट के द्वारा बताया गया कि देश के राज्‍य छत्‍तीसगढ़, बिहार और मध्‍यप्रदेश में इन बिजनेस में 70 प्रतिशत इनकी हिस्‍सेदारी है। यह आकडे साबित करते है कि पशुपालन में महिला पुरूषों कि तुलना में काफी आगे है। पशुपालन में महिलाऍं सफलता के नये परचम लहरा रही है। हालांकि महिलाऍं पुरानी परंपरा के अनूसार ही यह बिजनेस करती है। उन्‍हें इसमें प्रशिक्षण की आवश्‍यकता है।

उन्‍हें प्रशिक्षण मिल जाये, तो वह इस क्षेत्र में और आगे बढ़कर अपना मुनाफा कई गुना कर सकती है। इसलिए हमारी सरकार के द्वारा कई प्रशिक्षण संस्‍थाऍं खोली गई है। जहॉं महिलाऍं उत्‍तम नस्‍ल के पशुओं का चुनाव करने, उनकी सही तरीके से देखभाल करने और उनका प्रबंधन करने से संबंधित सभी तरीके को सीख सकती हैै।

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