
File Photo Credits: Twitter
Mumbai: कुछ लोग अपना फ्री समय काटने के लिए कितना कुछ करते है, कुछ तो अपने समय की कद्र नही करते तो समय भी उनकी कद्र नही करता। लेकिन जो व्यक्ति अपने हर समय का सदुपयोग करता है, एक दिन समय भी उसका साथ देते हुए, उसको उस मुकाम तक पहुचा देता है जिसके बारे में वो कभी सोच भी नही सकता।
हम ऐसी कहानी (Story) से रूबरू कर रहे है, जिसके बारे में सोचकर आप हैरान रह जाएंगे। फ्री बैठे बैठे एक दिन कुछ कमाने का सोचा फिर क्या है इस सोच ने उसकी जिंदगी बदलकर रख दी। कुछ कमाने के इस मंत्र से अपने बिजनेस (Business) को प्रारंभ करने वाली इस लड़की के मस्तिष्क में अचानक एक दिन एक युक्ति सूझी।
उसे उस समय यह तनीकसा भी अंदाजा नहीं था कि यह विचार आने वाले समय में उसे करोड़पति महिलाओं की सूची में शुमार कर देगा। उन्होंने बस अपने विचार पर समय व्यर्थ करने के हिसाब से कार्य करना प्रारंभ किया। आपको भरोसा नहीं होगा, आज इस विचार से बनें उत्पादों की केवल भारत में ही नहीं बल्कि, पूरी विश्व में अपार लोकप्रियता है।
कभी साधारण सी दिखाई देने वाली ये लड़की अब खास महिलाओं की सूचियों में शुमार है ‘बैगिट’ कंपनी (Baggit Company) की संस्थापक नीना लेखी (Nina Lekhi) हैं। मुंबई के एक संपन्न परिवार में पली-बढ़ी नीना बाल्यकाल से ही बिंदास प्रवृत्ति की शख्स थी।
बाल्यकाल से ही पढ़ाई में निपुण रहने वाली नीना ने वाणिज्यिक कला (Commercial Art) में अपना भविष्य बनाने का निश्चय किया और इसी कड़ी में उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध सोफिया पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में दाखिला लिया। क्लास के पश्चात मिलने वाले वक़्त का सदुपयोग करने हेतु उन्होंने ‘श्याम आहूजा’ के डिजाइनर शोरूम में नौकरी (Job) करनी भी प्रारंभ कर दिया था।
नीना का सदेव से यही मानना था कि मुझे ख़ुद के पैर पर खड़ा होना है। डिजाइनिंग शोरूम में कार्य करने के दौरान उन्हें एक अद्भुत विचार आया। उन्होंने सोचा जिस प्रकार टीशर्ट पर कुछ वाक्य या आदर्श-वाक्य लिखे होते हैं, क्यों न इसी तरह के वाक्य लिखे बैगो (Quotes on Bags) का निर्माण किए जाएं।
नीना (Nina Lekhi) ने बिना कोई उत्सुकता के केवल समय व्यर्थ करने के लिए बैगो के निर्माण का अपने आइडिया पर कार्य प्रारंभकिया। उसी डिज़ाइनर शोरूम में उन्होंने एक लिफ्टमैन और एक जिप ठीक करने वाले व्यक्ति की सहायता से साधरण कैनवस से बैगों का निर्माण प्रारंभ किए। बैगों का निर्यात प्रारंभ होने पर उन्होंने अपने स्टोर के मालिक से इन्हें विक्र करने की अनुमति ले ली।
'Failure is the stepping stone to success’ an oft-used proverb is a true testament to the life of 55-year-old Nina Lekhi,Today, Baggit has grown into a Rs 111 crore company with over 360 SKUs in handbags, 360 in wallets, and 70 in mobile pouches.#entrepreneur #womenentrepreneurs pic.twitter.com/rI4kr2W6yX
— Business Charcha (@businesscharcha) April 29, 2021
इसी दौरान उनकी जानपहचान अपनी सखी के भाई मनोज से हुई। मनोज कपड़ों की प्रदर्शनी और सेल लगाया करते थे। उन्हें नीना द्वारा निर्मित बैग बेहद पसंद आए और उन्होंने अपने सामान के साथ नीना के बैग को विक्रय करने का भी निर्णय लिया।
नीना को उस वक़्त एक बैग के निर्माण में तकरीबन 25 रुपए की लागत लगती थी। जबकि वह बाजार में इसे 60 रुपए के मूल्य पर विक्रय किया करती थीं। इस प्रकार से बैग के निर्माण का यह कारोबार पचास फीसदी से भी अधिक के मुनाफे करना प्रारंभ कर दिया।
“Take that failure in your stride, and miracles will happen” – Nina Lekhi, founder of Baggit on realising your dreams. #StartupStories #BMU pic.twitter.com/7WNZ26KhgW
— BML Munjal University (@BMLUniv) January 7, 2017
नीना ने कुछ अलग करने की मनीषा से और नए प्रयोग करने के उद्देश्य से सामन्य बैग की जगह कुछ एटीट्यूट वाले कोट लिखने प्रारंभ कर दिए। इससे इस बैग को एक नई पहचान मिली और फिर ‘बैगिट’ (Baggit) का जन्म हुआ। नीना माइकल जैक्सन की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं और उनकी बीट इट से प्रभावित होकर उन्होंने ‘बैगिट’ नाम से अपने व्यवसायिक जीवन को प्रारंभ किया।
तीन बर्षों के अंदर ही नीना द्वारा निर्मित बैगों की बिक्री (Bag Sells) दस गुना बढ़ गई। इस प्रारंभिक कामयाबी से प्रोत्साहित होकर नीना ने और विभिन्न विभिन्न प्रकार के बैग का निर्माण प्रारंभ कर दिए। उन्होंने चमड़े के बैग के निर्माण का भी प्रयास किया, लेकिन बदबू के कारण से उन्होंने जानवरों की खाल उपयोग न करते हुए सिंथेटिक लैदर के बैग (Synthetic Leather Bags) का निर्माण किया।
From 7K To 111-Crore Business: This Is How Baggit’s Nina Lekhi Did It All https://t.co/Dn65kZU80Q pic.twitter.com/zhwZopr6DA
— bhatnaturally 🇮🇳 (@bhatnaturally) May 16, 2021
देश में बढ़ते मोबाइल उपभोक्ताओं को देखकर उनके मन में डिज़ाइनर मोबाइल पाउच के निर्माण का ख्याल आया। नीना ने बेल्ट, पर्स जैसे अन्य एक्सेसरीज भी बनाने का कार्य प्रारंभ किये। आज ‘बैगिट’ के द्वारा निर्मित उत्पाद के केवल भारत में ही नहीं परंतु संपूर्ण विश्व (All Over World) में दीवाने हैं।
इतना ही नहीं देशभर में तकरीबन हर बड़े शहर में उनके फ्रेंचाइजी हैं। ‘Baggit’ कंपनी का वैल्यूएशन 100 करोड़ के पार है। कोई भी विचार बड़ा या छोटा नहीं होता। बस हमें चाहिए कि अपने विचार पर दृढ़-संकल्प होकर पश्चिम के साथ काम करें।



