कूड़ा बीनकर 5 रु में गुजारा करने वाली महिला आज करोड़ों की मालकिन बनी, क्या है बिज़नेस आइडिया

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Manjula Vaghela Success
Story of Manjula Vaghela who started Shri Saundarya Safai Utkarsh Mahila Sewa Sahkari Mandali Ltd. Manjula Vaghela was rag picker worker.

Jamnagar: गरीबी कभी किसी की किस्मत में जिंदगी भर नही रहती मेहनत करने वाले अपने लकीर को बदलकर अर्श से ऊपर उठकर आसमान तक पहुँच जाते है। मेहनत करने वालो की कभी हार नही होती। सफलता कभी अमीरी गरीबी नही देखती। सफलता मेहनत की मोहताज होती है।

जिसने अपने सपनो (Dreams) को पूरा करने का मन मे ठान लिया, उसको पूरा करने के लिए चाहे जो भी कठिनाई आये उसको हर परिस्थितियों में पाकर रहते है। बस यही जुनून इंसान को फ़क़ीर से अमीर बना देता है। मंजुला वाघेला (Manjula Vaghela) की जिंदगी चिथड़े से लेकर वैभव तक की कहानी (Story) है।

अब सफाईकर्मी सहकारी समिति की प्रमुख

यह 60 साल की महिला जो 1981 तक कचरा बीनने वाली (Rag Picker Worker) थी, अब 1 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार के साथ एक सफाईकर्मी सहकारी समिति की प्रमुख है। पहले मंजुला अहमदाबाद की सड़कों पर कबाड़ बीनने का काम करती थी, मुश्किल से दिनभर मे पाँच रुपय कमाती थी। उसे क्या ही मालूम था कि वह कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

वर्ष 1981 तक पूरे दिन सड़कों से कूड़ा, कबाड़ के पश्चात कठिनाईयों से दिन भर में पांच रुपये ही अजिर्त कर पाती थी, मंजुला वाघेला, 2015 के आंकड़े के हिसाब से उनका सालाना कारोबार (Yearly Turnover) तकरीबन एक करोड़ रुपये (1 Crore Ru) का था।

विश्वसनीय सुविधा मुहैया करवाने की सर्विस

वे आज क्लीनर्स को-ऑपरेटिव की प्रमुख के तौर पर कार्य कर रही हैं इस संस्था में आज 400 लोग हैं। क्लीनर्स को-ऑपरेटिव आज गुजरात में 45 संस्थानों और सोसाइटीज को सफाई और गृह व्यवस्था (Cleaning And Housekeeping) की विश्वसनीय सुविधा मुहैया कराते हैं।

मंजुला (Manjula Vaghela) कभी भी कठिन मेहनत (Struggle) से नहीं डरती, यहाँ तक कि जब वे पांच रूपये (5 Ru) से भी कम की आमदनी कर पाती थीं, तब भी। उनके दिन का प्रारंभ सुबह जल्दी उठने से होता है। वह एक बड़ा थैला कंधे में लटकाकर निकल पड़ती हैं और लोगों के द्वारा फेंके कचरे से रिसाइकिल-मैटेरियल्स अलग करती हैं। इन सभी सामाग्रीयो को एकत्रित कर फिर से उपयोग में आ सकने वाली वस्तुओं को कबाड़ी वाले को बेच देती हैं।

सौंदर्य मंडली की शुरुआत करने में सफल हुई

एक दिन मंजुला की जिंदगी में एक नया अध्याय तब खुलता है, जब उनका परिचय सेल्फ-एम्प्लॉयड विमेंस एसोसिएशन की संस्थापक इला बेन भट्ट से होती है। वे 40 लोगों वाली श्री सौंदर्य सफाई उत्कर्ष महिला सेवा सहकारी मंडली लिमिटेड (Shri Saundarya Safai Utkarsh Mahila Sewa Sahkari Mandali Ltd) के निर्माण में मंजुला की सहायता करती हैं।

इस व्यवसाय (Business) को खड़ा करना स्वम में एक चुनौती थी और उस पर तब और बड़ा दुख आ पड़ा, जब मंजुला के पति का निधन हो गया और अपने पीछे वह एक बेटे को छोड़कर इस दुनिया से चले गए। लेकिन यह हादसा भी मंजुला को उसके मार्ग से नहीं भटका पाई।

मंजुला ने अपने व्यवसाय के लक्ष्य की कमान संभाले रखी थी और किसी के लिए भी कहने को कुछ नहीं था और कोई भी मंजुला को इससे प्रथक नहीं कर सकता था। जल्द ही सौंदर्य मंडली को उनका सर्वप्रथम ग्राहक नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन मिल गया था।

उन्होंने संस्थान, भवनों और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के संगठनों को अपनी सेवाएं प्रदान करना प्रारंभ किया। उन्होंने गुजरात (Gujarat) के अंतरराष्ट्रीय इवेंट वाइब्रेंट को भी सफाई की सेवा प्रदान की। चीथड़ों से कचरा एकत्रित करने वाली सौंदर्य मंडली ने अब एक लंबा रास्ता तय किया था।

वे बहुत सारे आधुनिक उपकरणों और प्रौद्योगिकी का भी उपयोग करते हैं, जैसे हाई-जेट प्रेशर, माइक्रो-फाइबर मॉप्स, स्क्रबर्स, एक्सट्रैक्टर्स, फ्लोर क्लीनर्स, रोड क्लीनर्स आदि। आजकल बड़ी कंपनियां और संगठन सफाई के कार्य और अनुबंधों हेतु इ-टेंडर्स इशू करती है, जो मण्डली (Shri Saundarya Safai Utkarsh Mahila Sewa Sahkari Mandali Ltd) के लिए थोड़ा कठिन है। वे इस दिक्कतों का समाधान के लिए ऐसे लोगों को रोजगार पर रख रही हैं, जिनको इन सब बातों की जानकारी हो।

इन सब के मध्य मंजुला यह सुनिश्चित करती थी कि उसके बेटे का बचपन उस प्रकार से ना बीते जिस प्रकार से उनका बचपन गुज़रा और वह अपने बेटे के मेडिकल विद्यालय के लिए भरपूर धनराशि एकत्रित कर ले। मंजुला और उसके बेटे के संघर्ष की अविश्वसनीय कहानी (Story) के लिए उसके महाविद्यालय ने उन्हें सम्मानित भी किया है।

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