सावन का पवित्र माह चल रहा है। यह महीना भगवान भोलेनाथ को बहुत ही अतिप्रिय होता है। जब भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से चार महीने के लिए क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं तो सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव अपने कंधों पर ले लेते हैं। सावन के महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना से हर तरह की मनोकामना पूर्ण होती है।
सावन के महीने में भोलेनाथ के मंदिरों भोलेभक्तो की में भारी भीड़ रहती है। सावन में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का अपना एक विशेष महत्व होता है। 12 ज्योतिर्लिंगों के अतिरिक्त देश के अलग-अलग भागो में कई चमत्कारी और रहस्यमयी शिव मंदिर है। इन मंदिरों की खास बात यह है कि इनकी प्राचीनता, डिज़ाइन और अनोखे सभी को आश्चर्य में डाल देते है।
भोलेनाथ का बिजली महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है। ऐसी अलौकिकता है कि इस शिव मंदिर में प्रत्येक 12 वर्ष के बाद भयानक आकाशीय बिजली यहाँ गिरती है। मंदिर के शिवलिंग पर बिजली गिरती है, जिसके कारण यह शिवलिंग खंडित हो जाती है जिसे मंदिर के पुजारी मख्खन का उपयोग करके इसे पुनः जोड़ देते हैं और कुछ ही समय के बाद शिवलिंग अपने पुराने रूप में को धारण कर लेती है।
शिव का ममलेश्वर महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश में स्थित है। हिमाचल प्रदेश में एक अनोखा अद्भुत शिव मंदिर है जिसे ममलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता हैं। इस मंदिर में खास बास्त है कि यहाँ 200 ग्राम का गेंहू का दाना है। पुजारी की ऐसी मान्यता है यह गेंहु का दाना महाभारत काल से है जब पांडवो ने अपने अज्ञातवास का कुछ टाइम यहां पर गुजरा था। जहां पर रहकर शिवजी की आराधना की थी।
भूतेश्वरनाथ शिवलिंग छत्तीसगढ़ में स्थित है। इस अनोखे भूतेश्वर नाथ शिव मंदिर में एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जो भूतेश्वरनाथ के नाम से विख्यात है। इस अनोखे शिवलिंग की महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शिवलिंग दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग है जो समय के साथ अपने आप मोटा और बड़ा होता जा रहा है। हर वर्ष इसकी लंबाई 6 से 8 Inch बढ़ जाती है।
कमलनाथ महादेव मंदिर उदयपुर में स्थित है। इस अद्भुत भोलेनाथ के मंदिर में भगवान शिव से पहले रावण की पूजा अर्चना की जाती है। इसकी स्थापना खुद रावण ने की थी।कहा जाता है कि इसी जमीन पर रावण ने अपना सिर काटा था।
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर गुजरात में स्थित है। यह भोलेनाथ का मंदिर अपने आप में अद्भुत है। अरब सागर के पास बना यह मंदिर कुछ क्षण के लिए आंखों के सामने से अचानक गायब हो जाता है फिर पुनः उसी जमीन पर प्रगट भी हो जाता है।
अचलेश्वर महादेव मंदिर राजस्थान में स्थित है। इस शिव मंदिर की अनोखी बात है कि यह दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है। सुबह के टाइम शिवलिंग का रंग लाल रहता है, दोपहर के टाइम केसरिया रंग में दिखता है जबकि शाम होते होते इसका रंग सांवला हो जाता है। इसके अतिरिक्त इस शिवलिंग की खास बात यह है कि इसके छोर का आज तक कोई जानकारी नही लगी है।




