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Travancore/Kerala: देश के सबसे बड़े न्याय के मंदिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पद्मनाभस्वामी मन्दिर (Padmanabhaswamy Temple) के प्रबंधन में त्रावणकोर के राजपरिवार के अधिकार को मान्यता दे दी है। आज सोमवार सुबह इस केस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला देते हुए तिरुअनंतपुरम के जिला जज की अध्यक्षता वाली कमेटी को मंदिर की व्यवस्था और देखरेख का अधिकार सौंपा है।
आपको बता दे मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गए था कि सुप्रीम कोर्ट में केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर प्रबंधन और प्रशासन का विवाद पिछले 9 सालों से चल रहा था। केरल हाईकोर्ट के फैसले को केरल में त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। पद्मनाभस्वामी मंदिर के पास लगभग दो लाख करोड़ रुपये की संपत्ति है। जिसे लेकर विवाद बना हुआ था।
While pronouncing its verdict on the dispute over management of Sree Padmanabhaswamy Temple, the Supreme Court on Monday said that the Royal Family of Travancore still has the shebait right.
The efforts to bring the temple under govt control have failed.#Padmanabhaswamytemple pic.twitter.com/QFONgjlZPB
— Amit Poddar (@fbjamit) July 13, 2020
जानकारी हो की भगवान पद्मनाभ के इस भव्य मंदिर का पुनःनिर्मार 18वीं सदी में इसके मौजूदा स्वरूप में त्रावणकोर शाही परिवार ने कराया था। इसी शाही परिवार ने 1947 में भारतीय संघ में विलय से पहले दक्षिणी केरल और उससे लगे तमिलनाडु के कुछ भागों पर शासन किया था। देश की स्वतंत्रता के बाद भी पद्मनाभस्वामी मंदिर का संचालन यही राजपरिवार द्वारा नियंत्रित ट्रस्ट करता रहा था, जिसके कुलदेवता भगवान पद्मनाभ हैं। यह सिलसिला कई सालों तक चलता रहा था।
फिर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की बेंच ने पिछले साल 10 अप्रैल को मामले में केरल हाईकोर्ट के 31 जनवरी, 2011 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर, उसकी संपत्तियों का प्रबंधन संभालने तथा परिपाटियों के अनुरूप मंदिर का संचालन करने के लिए एक निकाय या ट्रस्ट बनाने को कहा था।
The Princess of #Travancore Royal Family her highness Aswathi Thirunal crying with, tears after #SupremeCourt verdict on #Padmanabhaswamytemple
See the simplicity Joy w 😢
Long love Sanatan Dharm
Hinduism
Thank U @narendramodi for saving it from loot of communist
🌹😍🚩💃🕺 pic.twitter.com/lIzlOiiNp4— Nandini Idnani Andhbhakt 🇮🇳 (@nandiniidnani69) July 13, 2020
आओजी बता दे की सुप्रीम कोर्ट ने तय करना था कि देश के सबसे अमीर मंदिर (Padmanabhaswamy Mandir) का मैनेजमेंट राज्य सरकार देखेगी या त्रावणकोर का पूर्व शाही परिवार। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सवाल किया की क्या यह मंदिर सार्वजनिक संपत्ति है और इसके लिए तिरुपति तिरुमला, गुरुवयूर और सबरीमला मंदिरों की तरह ही देवस्थानम बोर्ड की स्थापना की जरूरत है या नहीं।
कोर्ट की बेंच इस बात पर भी फैसला दे सकती है कि त्रावणकोर के पूर्ववर्ती शाही परिवार का मंदिर पर किस हद तक अधिकार होगा और क्या मंदिर के सातवें तहखाने को खोला जाए या नहीं। आने वाले समय में यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा। आपको बता दे की मंदिर का अंतिम दरवाज़ा अभी खुला नहीं है और मान्यता के अनुसार उसके बहुत खजाना होने की संभावना जताई गई है।
Evil Eyes on the Treasures of our Prabhu have been forced to turn away…
The Glory will Shine till Eternity 🙏#Padmanabhaswamytemple pic.twitter.com/u9sZ67HimM
— Kashmiri Pandit कश्मीरी पण्डित (@KashmiriPandit7) July 13, 2020
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 में पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन और संपत्तियों पर नियंत्रण से संबंधित हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मंदिर के खजाने में मूल्यवान वस्तुओं, आभूषणों का भी विस्तृत विवरण तैयार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 8 जुलाई 2011 को कहा था कि मंदिर के तहखाने-B के खुलने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक रहेगी, जुलाई 2017 में कोर्ट ने कहा था कि वह इन दावों का अध्ययन करेगा कि पद्मनाभस्वामी मंदिर के एक तहखाने में रहस्यमयी ऊर्जा वाला अपार खजाना है। ऐसा भी कहा जाता है की इस ख़ज़ाने की रक्षा बड़े बड़े सांप करते है।



