
Delhi: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) ने लगभग 67 साल पहले दिल्ली स्थित पुराने किले (Purana Qila) में की गई खुदाई के दौरान प्राप्त हुए प्राचीन संरचनात्मक अवशेषों के संरक्षण का फैसला किया है। जानकरी हो की ब्रिटिश हुकूमत से देश के आजाद होने के बाद यह पहली खुदाई बताई जाती है, जो साल 1953 में की गई थी। पुराना किला नई दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित प्राचीन दीना-पनाह नगर का आंतरिक किला है।
असल में दिल्ली के पुराने किले (Old Fort Delhi) में यह खुदाई महाभारत काल (Mahabharata Era) के पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ (Indraprastha) का पता लगाने के लिए की गई थी। इसी मकसद से दोबारा साल 1969-1973 में भी इस किले में खुदाई कार्य हुआ था। जानकरी हो की दोनों बार खोदाई में टीम का नेतृत्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद् बीबी लाल ने किया था। आज वही बीबी लाल 100 के हो गए हैं।
अब एक बार फिरसे भारत सरकार इसे लेकर गंभीर है और पांडवों (Pandavs) की इस प्राचीन जगह (Ancient Site) पर साक्ष जुटाने का मन बना रही है। अब पुराने किले की खुदाई स्थल से प्राप्त अवशेषों के संरक्षण का कार्य नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (National Buildings Construction Corporation Limited) को दिया गया है।
खबर है की एनबीसीसी अपना योजना ड्राफ्ट बनाकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सौंपेगा। ASI की पर्मिशन और दिशा निर्देशन में एनबीसीसी काम करेगा। इस योजना के अंतर्गत खुदाई के गड्ढों और सूचना पैनलों को ढंकने के लिए एक शेड भी लगाया जायेगा। जिसकी लंबाई 150 मीटर होगी और चौड़ाई 50 मीटर होगी। यह शेड को ऐसे बनाया जाएगा कि तेज आंधी या तूफान में इसे नुकसान न हो। यह भी बताया गया है कि खुदाई स्थल के आसपास सूचना बोर्ड लगेंगे, जिन पर खुदाई के बारे में जानकारी दी जाएगी।
पुराना किला (Old Fort Delhi) को महाभारत काल का पांडवो का किला माना जाता है। यही साइट प्राचीन इंद्रप्रस्थ नगरी रही थी। इस बात के कई साक्ष्य भी मौजूद है।
विकिपीडिया में भी यही तथ्य बताया गया है। देखें pic.twitter.com/tC5gFgyMrl— sanatanpath (@sanatanpath) July 21, 2020
ज्ञान हो की साल 1955 में दिल्ली के पुराने किले (Purane Qile) के दक्षिण पूर्वी भाग में की गई खुदाई में कुछ मिट्टी के बर्तन के टुकड़े पाए गए थे, जो कि महाभारतकालीन (Mahabharata Time) पुरा वस्तुओं से मेल खाते थे। ASI द्वारा कराई गई खुदाई से पता चला है कि लगभग 1,000 BC के काल में यहां लोग रहते थे। खुदाई में मिले विशेष प्रकार के बर्तनों अन्न चीजों के इस्तेमाल से इसकी पुष्टि होती है। यहां खुदाई में मिले बर्तनों के अवशेषों के आधार पर पुरातत्वविदों की मान्यता है कि यही जगह पांडवों की राजधानी रही होगी।
इस मुद्दे पर कई इतिहासकारों और जानकरों का मानना है कि पुराने किले का स्थल इंद्रप्रस्थ (Indraprastha, the capital of the kingdoms of the Pandavas from the Mahabharata) से जुड़ा हुआ है। जो महाभारत काल में पांडवों की राजधानी हुआ करती थी। पूर्व अधिकारी बीबी लाल द्वारा 1953-54 और 1969-1973 में की गई खुदाई के दौरान टेराकोटा खिलौने और चित्र बने कुछ कटोरे प्राप्त हुए थे।
Purana Qila when it was Old Delhi, a place of refuge in the lawless countryside around Shahjahanabad pic.twitter.com/APgtdLBFUw
— William Dalrymple (@DalrympleWill) January 18, 2020
बताया गया की खुदाई में प्राप्त चीज़ों का संबंध 1500 ईसा पूर्व तक का माना गया था। पुराना किला में सबसे नई खोदाई 2018 में हुई थी, जिसकी देखरेख वसंत कुमार स्वर्णकार ने की थी, जो अब ASI आगरा सर्कल में अधीक्षण पुरातत्वविद के पद पर काविज हैं। साल 2018 की खोदाई में भी पहले की तरह हुई खुदाई से मिलते जुलते साक्ष्य मिले थे।
12th-century Vishnu idol found at Purana Qila, #Delhi http://t.co/ZCKyGXBqFM pic.twitter.com/it5vOrHoC7
— Hindustan Times (@htTweets) March 10, 2014
मान्यतों और किस्सों के अनुसार इस प्राचीन किले को यमुना नदी (Yamuna River) के किनारे पर पाँडवों द्वारा खोजा गया था, जो कि 5000 साल से भी अधिक पुराना है और महाभारत काल से पूर्व बना था। शोधार्थियों ने इस बात की पुष्टि की है कि पुराना किला के अन्दर इन्द्रप्रस्थ नाम का एक छोटा सा पुरवा था।
इसके बाद यहाँ ऐसा हुमायूँ और अफगान शासक ने भी राज किया था और नया नाम शेरगढ़ नाम दिया गया था। इसके साथ ही भारत के अन्तिम हिन्दू शासक सम्राट हेम चन्द्र विक्रमादित्य उर्फ हेमू द्वारा सन् 1556 ईस्वी में अकबर की सेनाओं को दिल्ली और आगरा में परास्त करने के बाद उनका राजतिलक इसी किले में किया गया था।
Lost City of Indraprastha !!
An inscription in Sanskrit (1300 CE) at Purana Qila in Delhi talks about a Bavli dedicated to people of Indraprastha.
Mughal history book, Razam Nama talks about Indraprastha.
But our Historians keep denying the Hindu past of Delhi … Why ? pic.twitter.com/rlcWePHxf0
— Kashmiri Pandit कश्मीरी पण्डित (@KashmiriPandit7) July 10, 2020
किले की मजबूत और मोटी दीवारों के तीन द्वारों पर दोनो तरफ बुर्ज हैं। ये दीवारें 18 मीटर ऊँची और डेढ़ किमी लम्बी हैं जिनपर तीन मेहराबयुक्त प्रवेशद्वार हैं जिन्हें पश्चिम में बड़ा दरवाजा, दक्षिण में हुमायूँ का दरवाजा और तालुकी द्वार हैं, जिसे निषेध द्वार भी कहते हैं। सभी तीन प्रवेशद्वार विशाल दोमंजिला संरचनायें हैं, जिनके दोनो ओर बुर्ज होने के साथ-साथ बाल्कनी या झरोखा और मण्डप है।



