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Khambhat, Gujarat: भगवान भोलेनाथ को भारत और हिन्दू धर्म में पूजा जाता है, भगवान् महादेव (Bhagwan Bholenath) को देवों के देव भी कहा जाता है। जो भी उनकी शरण में आया उसके सारे दुखो का निवारण होना तय है। देश मे अनगिनती शिव मंदिर है, जिनसे जुड़ी अलग-अलग महिमा और कहानिया भी है। मंदिरो में होने बाले चमत्कार भी है। जो जानकर हमारे मन मे इस मंदिर को देखने की लालसा पैदा कर देता है। यहाँ पर भगवान शिव के मंदिर के साथ-साथ बाबा भोले नाथ की ज्योतिलिंग भी है।
बाबा भोलेनाथ के मंदिर से जुड़ी कहानियों, चमत्कार और वास्तुकला लोगो को आकर्षित करते रहे है। इसके अलग-अलग हिस्सों में भगवान भोलेनाथ के कई मंदिर है। जहाँ देश ओर विदेश से लोग बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते है, लेकिन आपको बता दे, इन शिव मंदिरों में एक ऐसा शिव मंदिर है, जहाँ पर भक्तों के आने की असली वजह मंदिर का गायब (The disappearing temple of Shiva in Gujarat) होना बताया जाता है। हो गए न हैरान, लेकिन आपको बता दे, बताया जाता है कि यह अनोखा शिव मंदिर दिन में 2 बार गायब हो जाता है अर्थात अदृश्य हो जाता है।
भारत के गुजरात (Gujarat) में स्थित इस मंदिर का नाम है ‘स्तंभेश्वर मंदिर’ (Shree Stambheshwar Mahadev Temple)। इस अनोखे मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि भगवान शिव (Bhagwan Shiva) के अनेकों मंदिरों में से एक प्रसिद्ध मंदिर स्तंभेश्वर मंदिर की महिमा निराली है। भोलेनाथ के अलग अलग मंदिर है, जिनकी कहानिया हमे इस बात के संकेत देती है, कि इस धरती पर भगवान शिव की कृपा बरकार है। उनके इन्ही मंदिरो में से एक मंदिर स्तंभेश्वर मंदिर जो कि गुजरात शहर के बड़ोदरा शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गांव में है।
कहा जाता है महादेब का ये मंदिर कई बार गायब जो जाता है। ये मंदिर भारत के रहस्मय मंदिरो में से एक मंदिर है। गायब होने की बजह से स्तंभेश्वर महादेव मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple) को गायब मंदिर (Unseen Temple) भी कहा जाता है। वैसे इस मंदिर से जुड़ी कहानी सामने आती है, जिसमे बताया जाता है, कि इस मंदिर को गायब मंदिर (DISAPPEAR TEMPLE) क्यो कहा जाता है, इस गायब मंदिर के पीछे एक अनोखी घटना छिपी हुई है।
स्थानीय किस्सों में जो कहानी बताई जाती है, उसकी माने तो ये घटना साल में कई बार देखने को मिलती है। जिसकी वजह से ये मंदिर अपने आप मे खास बन गया है। ये मंदिर (Under water sea temple in Gujarat) अरब सागर में खम्बात की खाड़ी (Khambhat Gujarat) के किनारे स्थित है। समुद्र के बीच मे स्थित होने के कारण इस मंदिर की खूबसूरती देखने लायक है। समुद्र के बीच मे स्थित होने के कारण सुंदरता देव कहा जाता है।
Shree Stambheshwar Mahadev Mandir Gujarat Is Under Water In Sea #Temple #Hindu #Mandir #Gujarat pic.twitter.com/3E7oZ4kOui
— sanatanpath (@sanatanpath) December 13, 2018
यहाँ पर समुद देवता स्वयं शंकर भगवान का जलाभिषेक करते है। लहरो के समय शिवलिंग पूरी तरह जल मग्न हो जाता है। ये परम्परा सदियों से चलती आ रही है। शिवलिंग का आकार 4 फिट ऊँचा और 2 फिट घेरे बाला है। इस मंदिर के दर्शन लहरो के समय ही किये जा सकते है दरसल ऊंची लहरो के समय यह मंदिर पानी मे डूब जाता है।
Stambheshwar Mahadev Temple, Kavi Kamboi, Gujarat. The Temple is about 150 years old. The Temple is also known as the Submerging temple. The Temple is flanked by the Arabian Sea on one side and the Bay of Cambay on the other side. pic.twitter.com/hM8NYbstoV
— Saradhi (@SaradhiTweets) July 21, 2020
पानी मे डूब जाने की बजह से ये मंदिर दिखाई नही देता, इसलिए इस मंदिर को गायब मंदिर (Hidden Temple in Sea) कहा जाता है। ऊँची लहरो के खत्म होने पर पानी मंदिर के धीरे-धीरे नीचे उतरता है ऒर मंदिर दिखने लगता है। इस मंदिर का निर्माण कुमार कार्तिकेय ने तारकाशुर नामक राछस का वध करने के बाद किया था। शिव मंदिर की खोज लगभग 150 साल पहले हुई थी।
Did you know?
Stambheshwar Mahadev in Gujarat is one of the unique & Incredible place to visit.
Temple can only be visited during the low Tide hours. In hours of High tide it remains mostly submerged. it is surprise that despite remaining in water the temple is still the same. pic.twitter.com/ekihB32YlS
— Vedic Woman (@Vedic_Woman) July 4, 2020
अगर आप इस मंदिर को देखने जाए तो कहा जाता है की एक दिन और रात का खाना रखना पड़ता है साथ मे, ताकि आप वहाँ होने वाले चमतकारी दृश्य को देख सके। सुबह के समय लहरो का प्रभाव कम रहता है। तो मंदिर के अंदर जाकर शिवलिंग के दर्शन किये जा सकते है। शाम से रात के समय लहरो का प्रभाव ज्यादा रहता है, जिसकी वजह से मंदिर को पानी मे डुबाते हुए देखा जा सकता है।
#जयतु_सनातन_धर्म
Stambheshwar Mahadev Temple, Kavi Kamboi, Gujarat. The Temple is about 150 years old. The Temple is also known as the Submerging temple. The Temple is flanked by the Arabian Sea on one side and the Bay of Cambay on the other side. pic.twitter.com/5Ylki0tlcW— Queen (@QueenOfPBH) July 21, 2020
जिस वजह से शिवलिंग के दर्शन नही हो पाते है। सुबह ओर शाम ये मंदिर आंखों से ओझल हो जाता है। शिवपुराण में इस मंदिर का उलेखय मिलता है। इस मंदिर से अरब सागर का सुंदर नजारा दिखाई पड़ता है। यहाँ भक्तो को पर्चे बाटे जाते है। जिसमे ज्वारभाटा आने का समय लिखा रहता है। जिससे यहाँ आये किसी भी भक्तो का किसी भी प्रकार से कोई नुकसान न हो।



