मोदी सरकार ने कैलाश मानसरोवर मार्ग की सड़क बना दी, अब कार से इतने दिनों में यात्रा पूरी होगी

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Kailash Mansarovar Yatra
Kailash Mansarovar Yatra New Route. The shorter route to Kailash Mansarover. How to Reach Mansarovar. Modi Government has given new and easy route for Kailash Mansarovar Yatra.

Delhi: मोदी सरकार के प्रयासों से हिन्दू तीर्थस्थल कैलाश मानसरोवर यात्रा अब और भी अधिक आसान होने वाली है। कैलाश मानसरोवर के लिये अभी तीर्थ यात्रियों को 79 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती है, किन्तु अब मोदी सरकार ने घटियाबगर से लिपूलेख के बीच लगभग 60 किमी लंबी सड़क बनवा दी है। इस सड़क (Kailash Mansarovar Yatra Road) के बन जाने से लोग अब कार या गाड़ियों से मानसरोवर तक जा पाएंगे। दिल्ली से यात्रा शुरू कर वापस आने में 16 दिन लगेंगे। इससे पहले 22 दिन लगते थे।

उत्तराखंड होते हुए मानसरोवर जाने वाला रास्ता आसान हुआ

आपको बता दे की मानसरोवर का उत्तराखंड से होते हुए जाने वाला रास्ता अब आसान होने वाला है। जानकारी हो की उत्तराखंड से होते हुए मानसरोवर तक जाने वाले रास्ते पर पहले 6 दिन में 79 किमी पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। अब यही यात्रा कार से 3 दिन में पूरा कर पाएंगे। यहां सड़क निर्माण लगभग पूरा हो गया है। यात्री अल्मोड़ा या पिथौरागढ़ होते हुए चीन सीमा से लगे लिपूलेख तक गाड़ियों से पहुंच सकेंगे।

इस कार्य में घटियाबगर से लिपुलेख तक 64 किमी सड़क की योजना थी। अब यह कार्य पूरा होने की कगार पर है। अप्रैल 2020 तक बर्फबारी के कारण काम बंद रहेगा। उसके बाद पुनः काम पूरा किया जाएगा। कैलाश मानसरोवर यात्रा के इस मार्ग से 1981 में यात्रा शुरू हुई थी। यात्रियों को खतरनाक पहाड़ियों से गुजरना पड़ता है। नए रास्ते से यात्रा में समय बचेगा।

भाजपा सरकार ने कांग्रेस की पिछली सरकार को इस काम में पछाड़ा

यहाँ पर भाजपा सरकार ने कांग्रेस की पिछली सरकार को इस मामले में पछाड़ दिया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सड़क का निर्माण 2007 में घटियाबगर से शुरू हुआ था। फिर इस सड़क निर्माण की गति 2014 तक बहुत धीमी रही थी। इस योजना में चीन की सीमा से लगे गुंजी से भी सड़क बनाने की योजना थी, किंतु यह कठिन काम था।

इसमें सबसे बड़ी कठिनाई 14 हजार फीट ऊंचाई पर गूंजी तक जेसीबी, बुलडोजर, रोड रोलर जैसे भारी उपकरणों को पहुंचाने की थी। सभी भारी उपकरणों के पार्ट्स गूंजी तक हेलीकॉप्टर से पहुंचाए गए। वहां इंजीनियरों ने इन्हें असेंबल कर मशीनें बनाईं। इसके बाद दोनों तरफ से सड़क निर्माण कार्य शुरू हो पाया।

आपको बता दे की यह यात्रा उत्तराखंड के धारचूला से शुरू होती है। यहां से मंगती नाला तक 35 किमी गाड़ियों से जाते हैं। उसके बाद पहले दिन यात्री जिप्ती-गालातक तक 8 किमी पैदल चलते हैं। यहां रात में रुककर दूसरे दिन 27 किमी चलकर बूधी और फिर तीसरे दिन 17 किमी चलकर गूंजी पहुंचते हैं। यहीं पर यात्रियों की मेडिकल जांच होती है। फिर 5 वें दिन 18 किमी पैदल चलकर नबीडांग तक पहुंचते हैं। फिर 6वे दिन 9 किमी चलकर लिपूलेख के रास्ते चीन की सीमा में पहुँच जाते हैं।

नई सड़क बनने से दूरी और समय हुआ कम

अब यह नई सड़क (Kailash Mansarovar Yatra New Route) बनने के बाद यात्री धारचूला से पहले दिन 6 घंटे में वाहनों से बूधी जाएंगे। फिर अगले दिन 3 घंटे में गाड़ियों से गूजी पहुँच जायेंगे। दूसरी रात गूजी में बितानी होगी और मेडिकल जांच के बाद तीसरे दिन लिपूलेख होकर चीन पहुंचेंगे। चीन में 80 किमी सड़क यात्रा के बाद कुगू पहुंचेंगे। फिर कुगू से मानसरोवर तक का रास्ता तय करेंगे।

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