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Delhi: दुनिया में कई अजीबोगरीब रहस्य हैं, जिसके पीछे का राज Mysterious Shivling अब तक कोई सुलझा नही पाया है। भगवान शिव Lord Shiva का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भोलेशंकर को देवों के देव महादेव भी कहते हैं। भगवान शिव के चमत्कारों का उल्लेख पौराणिक कथाओं में भी मिलता है।
भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं देश में जो चमत्कारों से भरे हुए हैं। जिनका आजतक रहस्य नहीं सुलझ पाया है। ऐसा ही एक मंदिर है, अचलेश्वर महादेव मंदिर (Achleshwar Mahadev Mandir) में जो वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है।
भगवान शिव (Bhagwan Shiva) की महिमा चारो लोको में फैली हुई है। महादेव संस्कृति जो आगे चल कर सनातन शिवधर्म (शैव धर्म) नाम से जाने जाती है शिव सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव भी कहते हैं। यें सृष्टि के संहारक और जगतपिता हैं। वैष्णव,शंभू इन्हें सबसे बड़ा वैष्णव भी कहा जाता है। क्योंकि यह परम वैष्णव है।
वैष्णव वह होते हैं। जो भगवान विष्णु के परम भक्त होते हैं। भगवान शिव को भगवान विष्णु का परम भक्त भी कहा जाता है। जिसका उल्लेख सत्व गुण के 6 पुराण और ज्यादातर सभी शास्त्रों में किया गया है वेद, उपवेद, उपनिषद, इतिहास, पुराण, उपपुराण, संहिता तथा सभी शास्त्रों में मिलता है। जैसे विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत, महापुराण, रामायण, महाभारत, ब्रह्मवैवर्त पुराण आदि। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधर आदि नामों से भी जाना जाता है।
ACHALESHWAR MAHADEV temple located outside the Achalgarh Fort Mount Abu,Rajasthan.
The temple is only place on the earth where the Toe of Lord Shiva is worshiped.
Mahadev Shiva Sambhu 🙏🙏@LostTemple7 pic.twitter.com/UpSTD18Qtc— Itishree @भारत भूमि (@Itishree001) May 3, 2020
तंत्र साधना (Tantra Saadhna) में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू शिव धर्म शिव-धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्रहै। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी का नाम पार्वती है। इनके पुत्रकार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं।
शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता वासुकी विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है।
इस शिवलिंग के रंग बदलने (Shivling changes its colour thrice a day) का कारण आज भी नही जान पाए, इसका जवाब आजतक किसी के पास नहीं है। कई बार वैज्ञानिकों की रिसर्च टीमें भी यहां आईं, खोजबीन करके जांच की लेकिन इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका। बताया जाता है कि यह मंदिर हजारों साल पुराना है।
राजस्थान के धौलपुर जिले के चम्बल के वन मे अचलेश्वर महादेव प्रसिद्ध मंदिर है।
यहाँ शिवलिंग की खासियत है कि यह दिन मे तीन बार रंग बदलते है।
सुबह मे शिवलिंग का रंग लाल दोपहर को केसरिया और शाम को सांवला हो जाताहै!शिवलिंग का छोर आज तक कोई ना पा सका,इन्हे पाताल तक माना जाता है! pic.twitter.com/JKSAr0mk6e
— Anamika Brijwasi (@MeriRadhe) September 9, 2019
धोलपुर से पांच किलोमीटर दूर चम्बल नदी के किनारे बीहड़ो में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर (Achaleshwar Mahadev Temple) की स्थापना किसने की कोई नहीं जानता। पहले बीहड़ में मंदिर होने की वजह से श्रद्धालु कम आते थे, लेकिन हालात बदलने के बाद अब यहां दूर-दूर से लाखों की संख्या में शिवभक्त आते हैं। भक्तों का मंदिर से एक अनोखा रिश्ता है।
परिसर में कुछ ऐसी प्रतिमाएं मिली जो शिव परिवार की है। यह मंदिर ऋषि अत्रि की तपोभूमि रही त्र्यक्षकुल पर्वत पर है। त्र्यक्षकुल का अर्थ शिव और शिवा के समस्त कुल का प्रिय धाम है। मंदिर परिसर में प्राप्त प्राय: सभी प्रतिमाएं शिव परिवार की ही हैं।
भगवान शिव को वेदों और शास्त्रों में परम कल्याणकारी और जगदगुरू बताया गया है। यह सर्वोपरि तथा सम्पूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं। भारत में एक भगवान शिव ही ऐसे हैं जिन्हें कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक सभी समान रूप से पूजा जाता हैं। भगवान शिव की मान्यता भी पूरे भारत में बनी हुई है।
सुबह के समय इसका रंग लाल, दोपहर को केसरिया और रात को श्याम हो जाता है। इस शिवलिंग के रंग बदलने के पीछे बहुत सारी दंत कथाएं प्रचलित हैं जो शिवभक्तों को इस मंदिर के आकर्षण में बांध दर्शनों के लिए अपनी ओर आकर्षित करती हैं।आज विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर चुका है, मगर आज भी कुछ ऐसी दैवी शक्तियां हैं जिसके आगे विज्ञान भी हार मान चुका है।
अद्भुत आश्चर्यजनक शिव लिंग देख लीजिए आप सब एक बार ।ओम नमः शिवाय।🚩🙏
धौलपुर जिले(राजस्थान)में चंबल के बीहड़ में स्थित हैं अचलेश्वर मंदिर देश का सबसे अनोखा श्रीयंत्र आकार का अष्टकोणीय मंदिर है,जहाँ चतुर्मुखी शिवलिंग का हर पहर बदल जाता है रंग ये देश का सबसे पुराना जीवित मंदिर है pic.twitter.com/oqS1gds8A9
— Ravikant Mishra (@ravikan0325126) June 4, 2021
धौलपुर का शिवलिंग भी रहस्यमय शक्ति है जिसका पार नहीं पाया जा सका। भगवान अचलेश्वर महादेव मंदिर की चरित्ररचना बहुत पौराणिक है। यहां दर्शनों के लिए आने का रास्ता कठोर पत्थरों से बना हुआ और विकृत है लेकिन इस मंदिर का प्राकृतिक आकर्षण श्रद्धालुओं को यहां आकर्षित कर ले आता है।
मान्यता है कि जो भी अविवाहित लड़की या लड़का यहां शादी की इच्छा से दर्शनों के लिए आते हैं, उनकी मनोकामना बहुत जल्दी पूरी हो जाती है। आज तक इस शिवलिंग का आदि और अंत कोई नहीं पा सका। बहुत समय पहले शिव भक्तों ने शिवलिंग के पास खुदाई कर इसके अंत तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन उनकी यह कोशिश पूरी तरह असफल रही। अनेकों वर्ष गुजर जाने के बाद भी यह रहस्य ज्यों का त्यों बना हुआ है कि इस शिवलिंग का प्रारंभ कैसे हुआ और कैसे इसके रंग बदलने के पीछे क्या रहस्य है।



