
Presentation Image Credits: PTI File Image
Delhi: आज देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। ऐसे में कुछ जगहों पर हिन्दू मंदिरों के धन और सम्पत्ति को निशाना बनाया जाने लगा है। भारत की
80 प्रतिशत आबादी और संस्कृति हिन्दू है। हिन्दू मंदिर भारत का इतिहास और पहचान हैं। यदि कोई हिंदी भक्त मंदिर को दर्शन के लिए जाता है और मंदिर में स्वयं की इच्छा से दान पुन्न करता है, तो वह डोनेशन में दिया गया दान केवल उस मंदिर के ईस्वर की पूजा, मंदिर की पालन और धर्म के कार्यों के लिए भक्त का योगदान होता है।
एक हिन्दू भक्त के दान करने का मकसद ही मंदिर और ईस्वर के लिए किये जाने वाले धार्मिक कार्यों से होता है। भक्त सोचता है की उस मंदिर के प्रबंधन से लेकर मंदिर के जीर्णोद्धार और पूजन में उस दान का सदुपयोग हो सके। एक हिन्दू भक्त जब मंदिर की दान पति में मुद्रा डालता है तो वह चाहता है की उस धन से मंदिर की साफ़ सफाई, पूजा, प्रसाद, भंडारे से लेकर अन्न धार्मिक कार्यों में उस धन का इस्तेमाल हो। परन्तु यहाँ ऐसा नहीं हो रहा है।
केरल में हिन्दुओ के मंदिर के धन को एक तरह से हड़पा गया। आपको जानकारी हो की हिन्दू धार्मिक स्थल के अलावा किसी अन्न धर्म के स्थल से 1 रुपये भी नहीं लिया गया, किन्तु केरल की सरकार ने एक हिन्दू मंदिर के 5 करोड़ रुपया हड़प लिए। आपको बता दें की वामपंथी और गौ भक्षक केरल सरकारों ने सभी हिन्दू मंदिरों को अपने कण्ट्रोल में ले लिया है और मंदिरों के लिए अलग-अलग बोर्ड बना रखेलिए है और उस बोर्ड में हिन्दुओ को नहीं, अपितु अपने खास लोगो को आसीन कर दिया है।
The Kerala HC on Friday admitted a PIL filed by the president of DSJP, KSR Menon, challenging the action of the Guruvayoor Devaswom Board Chairman giving away Rs 5 crore to CM Relief Fund.
“The court said it is a very serious issue,” said Menon.#LeftistsLootKeralaTemples pic.twitter.com/c2lksw5fbC
— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) May 9, 2020
केरल की सरकार ने यहाँ के विश्व विख्यात गुरुवायुर मंदिर के लिए भी एक बोर्ड बना दिया और सर्कार के बनाये बोर्ड ने गुरुवायुर मंदिर को हिन्दू भक्तो द्वारा दान में दिए 5 करोड़ रु केरल की वामपंथी सरकार को पलटा दिए। हिन्दुओ ने मंदिर के धार्मिक कार्यो और जीर्णोद्धार के लिए डोनेशन दिया था और सरकार के बोर्ड ने रुपयों को फिक्स्ड डिपाजिट में जमा कर दिया था, अब उसी से 5 करोड़ रुपए सरकार को भिजवा दिए गए।
*Stop using our Temples as Cash Cows
*We dont need Devaswom boards, which caters to secular govt over Hindus
*Stop this day light looting#LeftistsLootKeralaTemples pic.twitter.com/84lJEaYk1z
— Shilpa Nair (@shilpamdas) May 9, 2020
अब सोशल मीडिया पर लोग आरोप लगा रहे हैं की केरल की सरकार ने हिन्दुओ के मंदिर का पैसा कोरोना के नाम पर हड़प लिया है। वही दूसरी तरफ किसी भी चर्च या मस्जिद से 1 पैसा भी नहीं लिया गया है। हिन्दू भक्त सवाल कर रहे हैं की हिन्दू मंदिर का धन किसी खैरात से है क्या केरल सरकार। ऐसा ही एक केस तमिलनाडु से भी आया है।
सोशल मीडिया में लोगो का आरोप है की तमिलनाडु की सरकार मंदिरों को अपनी निजी संपत्ति समझ रखा है। अभी सरकार ने लगभग 47 मंदिरों से मुख्यमंत्री रिलीफ फंड के लिए 10 करोड़ रुपए देने का बेतुका आदेश जारी किया है।
खबर आई है की तमिलनाडु में Hindu Religious and Charitable Endowments तमिलनाडु राज्य के 47 मंदिरों को लॉकडाउन में विभिन्न समस्याओं से निपटने के लिए टोटल 10 करोड़ रुपए मुहैया करने का आदेश सुनाया है। अब इस आदेश के आने बाद इसे हिन्दू भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया जा रहा है। ऐसा कहने का कारण यह बताया गया की एक ओर हिन्दू मंदिरों से इतना धन लूटा जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर मस्जिदों को रमज़ान के दौरान हर प्रकार की सुविधा प्रदान की जा रही है। लोगो का कहना है की यह जज़िया कर है।
राज्य सरकार ने अभी ही ये आदेश जारी किया है कि लगभग 3000 मस्जिदों के लिए 5450 टन चावल की आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा 21 रुपए प्रति किलो के दर से ये चावल तमिलनाडु को कुल 11 crore रुपए के मूल्य के हिसाब से मुहैया होगा। मतलब है की मस्जिदों को खुश करने और रमजान मनवाने के लिए तमिलनाडु सरकार हिन्दू मंदिरों पर जज़िया कर लगाने पर उतारू है।
अभी देश में कोरोना लॉकडाउन के कारण धार्मिक स्थलों मंदिरों पर ताला लगा हुआ है और कपाट लगभग बंद है। ऐसी स्थिति में तमिलनाडु सरकार का यह आदेश साफ़ दिखता है की राज्य सरकार केवल अपना खज़ाना भरने और एक कौम के तुष्टिकरण करने का काम कर रही हैं। सोशल मीडिया पर एक सेर यूजर का सवाल की हिन्दू मंदिरों का खज़ाना खैरात का है क्या तमिलनाडु सरकार।
#StopAttackingSaffron
Tamilnadu Gov. has directed 47 temples to give Rs. 10 crore of surplus income to CM relief fund… This move has come in for severe criticism as the same has not been demanded from the Chrisitian and Muslim institutions that get government grants yearly. pic.twitter.com/jqD7o6oLnR— Dr Poonam Sharma (@PoonamS18232206) May 1, 2020
अब सेशल मीडिया पर तमिलनाडु सरकार को लोग लगे है लतियाने पर शायद उनकी बात और ट्रेंड का कुछ असर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर हो। तमिलनाडु सरकार के की इस खिचाई का प्रमुख कारण है कि जहां एक ओर वे हिन्दू धार्मिक स्थलों से करोड़ों का धन हड़पने में ज़रा भी संकोच नहीं कर रहे, तो वहीं ऐसा कोई भी फरमान इसाई और मुस्लिम संस्थानों या उनके धार्मिक स्थलों को नहीं दिया गया है, एक तो इनको हमेशा ही सरकारी अनुदान उपलब्ध होते रहते हैं।



