मंदिर में शिवलिंग 8 मुख में विराजमान है, भोलेभंडारी के भक्तों पर धन की बरसा होती है

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Pashupatinath Temple Mandsaur
Pashupatinath Temple Mandsaur is known as 8 face Shivlinga Temple. 8 Mukhi Shivling Mandir.

Mandsaur, Madhya Pradesh: सावन आते ही शिव मंदिरों में शिव भक्तों का तांता लगने लगा है। माना जाता है की एक शिव मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों पर धन की बरसा होती है। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में शिवना नदी के समीप भगवान पशुपतिनाथ का मशहूर मंदिर है। इस मंदिर की महिमा है कि यहाँ अष्टमुखी शिवलिंग की पूजाअर्चना होती है। पुजारियों का कहना है कि भगवान भोलेनाथ के 8 मुख, जीवन की 4 अवस्थाओं का व्यख्या करते हैं।

पूर्व का मुख बाल्यवस्था का, दक्षिण का मुख किशोरावस्था का, पश्चिम का मुख युवावस्था और उत्तर का मुख प्रौढ़ा अवस्था के रूप में नजर आता है। यहां के लोगो की ऐसी मान्यता है कि अष्टमुखी पशुपतिनाथ के दर्शन से सभी मन की इक्छा पूरी होती है। उस पर सीधी नजर कुबेर की पड़ जाती है।वो धन धान्य से परिपूर्ण हो जाता है।

यहाँ के लोगो का कहना है कि 19 जून 1940 को शिवना नदी से इस अष्टमुखी शिवलिंग को बाहर निकाला गया था। 21 वर्ष तक भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति नदी के घाट पर ही विराजमान थी। सबसे पहले शिवलिंग को कालूजी धोबी के पुत्र उदाजी ने शिवना नदी में पाया था।

वहाँ के लोगो ने जानकारी दी है कि उदाजी धोबी इसी प्रतिमा पर कपड़े धोने का काम करते थे। फिर एक दिन उनको स्वपन आया कि जिस मूर्ति को पत्थर समझकर तुम कपड़े धोते हैं वह स्वयं भगवान पशुपतिनाथ की है।

फिर लोगो को उदाजी ने अपने स्वप्न के बारे में बताया कि उस स्थान पर भगवान की मूर्ति है। फिर बहा की खुदाई करने के बाद भगवान की अष्ट मुखी मूर्ति मिली थी।

Pashupatinath Temple, Mandsaur के पुजारी जी के अनुसार शिवलिंग के आठों मुखों का नाम कर्ण भगवान भोलेनाथ के अष्ट तत्व के अनुसार किए गए हैं। 1- शर्व, 2 – भव, 3 – रुद्र, 4 – उग्र, 5 – भीम, 6 – पशुपति, 7 – ईशान और 8 महादेव के रूप में पूज्नीय माने जाते हैं। श्रावण महीने के आते ही यहां शिवभक्तों की भारी भड़ी देखने को मिलती है।

यँहा के लोगों ने बोला है कि भक्ति में लीन होकर जो भी भगवान की पूजा के साथ मनोकामना अभिषेक करता है भगवान भोलेनाथ उसकी सभी मन की इक्छा पूरी करते हैं। शिवभक्तों का कहना है कि अष्टमुखी शिवलिंग के दर्शन मात्र से सभी मन की इक्छा पुर्ण होती है।

इतिहासकारों के अनुसार इस शिवलिंग का निर्माण विक्रम संवत 575 AD के आसपास सम्राट यशोधर्मन के काल में हुआ होगा। जिसे मूर्ति को तोड़ने वालों से बचाने के लिए इसे शिवना नदी में बहा दिया गया होगा, लेकिन अभी इसकी पुष्टि नही हुई है, कि सच बात क्या है? कलाकार ने मूर्ति के ऊपर के चार मुख पूरी तरह डिज़ाइन कर दिए थे, जबकि नीचे के चार मुख निर्माणा अधीन थे।

मध्यप्रदेश मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर की तुलना काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ से की जाती है। मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ भगवान की मूर्ति अष्टमुखी हैलेकिन नेपाल में स्थित पशुपतिनाथ चारमुखी हैं। मूर्ति में अष्टमुख के ऊपर शिवलिंग बना हुआ है।

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